जन्मदिन जब किसी लीडर का हो तब तो फिर पार्टी के लिए वह संविधान के दिन जैसा होता है. सभी लीडर अपना जन्मदिन मनाते हैं, लेकिन राहुल गांधी के जन्मदिन पर परिवार से ज्यादा पार्टी के कार्यकर्ता खुशी का इजहार करते हैं. इस बार के जन्मदिन में तो यह खुशी सिर चढ़कर बोल रही है.

    राहुल गांधी को परशुराम के अवतार में दिखाया जा रहा है. अल्पसंख्यक सम्मेलन में राहुल गांधी के पहुंचने पर जो नजारा दिखा वह तो अजब-गजब था. राहुल गांधी जैसे ही मंच पर पहुंचे हॉल में उपस्थित सभी प्रतिभागी एक साथ खड़े होकर नारे लगाने लगे देश का पीएम कैसा हो राहुल गांधी जैसा हो. वैसे तो यह अल्पसंख्यक सम्मेलन था लेकिन इसके बहुसंख्यक मुस्लिम समाज के नेता ही थे. इस सम्मेलन में राहुल गांधी पुरानी वही बात दोहराते हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी एक साल में हट जाएंगे. कांग्रेस के नव निर्वाचित राज्यसभा सांसद और मीडिया प्रवक्ता पवन खेड़ा तो राहुल गांधी के पीएम बनने की संभावना के प्रश्न पर कहते हैं, कि 2029 के पहले ही वह प्रधानमंत्री बन जाएंगे. 

    देश में अब तक कोई भी लीडर ऐसा नहीं था, जिसके लिए ऐसा नारा लगा हो कि देश का पीएम कैसा हो. यहां तक कि नरेंद्र मोदी के लिए भी ऐसा नारा नहीं लगा. जब वह सीएम थे तब तो कोई ऐसा सोच भी नहीं सकता था कि वह प्रधानमंत्री बन सकते हैं. जब उन्हें भाजपा ने पीएम उम्मीदवार बनाया तब तो नारे की जरूरत भी नहीं रही. पार्टी ने जनादेश के लिए उनको देश के सामने पेश कर दिया गया. 

    राहुल गांधी 2004 में पहली बार सांसद बने थे. दस साल तो यूपीए की सरकार रही उस समय वह चाहते तो पीएम या मंत्री तो कम से कम बन ही सकते थे. पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस या उसके गठबंधन ने राहुल गांधी को पीएम उम्मीदवार के रूप में पेश नहीं किया. कार्यकर्ताओं की भावनाएं ऐसी हो सकती है लेकिन जब इससे जन भावनाओं का मेल नहीं होता तो फिर नाउम्मीदी मिलती है. 

    राजनीति, मीडिया, इंटेलेक्चुअल सब विभाजित है. अपनी आस्था के हिसाब से नजरिया पेश किया जाता है. जनता का नज़रिया चुनाव में ही मायने रखता है. मेन मीडिया और सोशल मीडिया पर यही डिबेट चल रही है, कि क्या राहुल गांधी पीएम बन सकते हैं. कांग्रेस के इंटेलेक्चुअल शशि थरूर भले ही पीएम मोदी की तारीफ करते हैं. लेकिन वह राहुल गांधी के जन्मदिन पर यही कहते हैं कि कांग्रेस का समय आ गया है. इसमें कोई दो राय नहीं है कि बीजेपी, आरएसएस और पीएम नरेंद्र मोदी से निर्भीकता से लड़ते हुए राहुल गांधी ही दिखाई पड़ते हैं. 

    राहुल गांधी एसपीजी प्रोडक्शन में पले बढ़े हैं. उन्हें भारत को जानने समझने के लिए ट्यूटर की जरूरत है. उनकी भारत जोड़ो यात्रा देश को जोड़ने और समझने की थी. राहुल गांधी की इस यात्रा में सड़क पर उतरने को कांग्रेस का इकोसिस्टम बहुत बड़ी उपलब्धि मानता है. किसी भी नेता को जो देश का पीएम बनना चाहता है, उसे तो जमीन पर जनता के बीच लगातार रहने की जरूरत है. जिसको देश पर जमीन पर उतरने के लिए किसी अभियान की जरूरत है.

    यूपीए सरकार के पतन के बाद कांग्रेस का सारा पावर राहुल गांधी में ही समाहित है. कांग्रेस का इलेक्टोरल परफॉर्मेंस लगातार सवालों के घेरे में है. मत प्रतिशत और कुल मिले मतों की संख्या घटती बढ़ती रही है, लेकिन उसमें उल्लेखनीय कोई सुधार नहीं आया है. पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की लोकसभा सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, लेकिन उसके बाद राज्यों में जितने भी चुनाव हुए हैं उन सब में कांग्रेस को पराजय का ही मुंह देखना पड़ा है. केवल केरल में कांग्रेस की सरकार बन सकी. 

    पार्टी संगठन के भीतर भी अराजकता का वातावरण है. राज्यसभा प्रत्याशी का मध्य प्रदेश में नामांकन निरस्त हो जाता है. दूसरी तरफ झारखंड में कांग्रेस का राज्यसभा प्रत्याशी जीतने के लिए जरूरी संख्या होने के बावजूद पराजित हो जाता है. 

    कांग्रेस इकोसिस्टम राहुल गांधी के पक्ष में जिस तरह से सोच रहा है वह असंभव नहीं है, लेकिन कांग्रेस ने सारे प्रयोग कर लिए हैं. साफ्ट हिंदुत्व पर भी कांग्रेस गई, लेकिन कुछ भी फायदा नहीं हुआ. अब कांग्रेस जाति विभाजन और मुस्लिम वोट बैंक पर अपनी राजनीति को आगे बढ़ा रही है. राहुल गांधी जैसा नेता जो विदेश से पढ़ा हुआ है, वह कास्ट सेंसस और हर ग्रोथ में फास्ट का कैलकुलेशन करता है. इससे उनका प्रगतिशील अप्रोच तो बिल्कुल भी नहीं दिखता है.

     राहुल गांधी 56 साल के हो गए हैं. जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं. अभी तक 56 इंच सीने की चर्चा होती थी अब 56 साल उम्र की चर्चा हो रही है. 60 साल में तो व्यक्ति सीनियर सिटीजन हो जाता है. देश का पीएम कौन बनेगा यह तो जनादेश तय करेगा, लेकिन उम्र का भी पीएम होता है. समय के लिए पीएम का मतलब पोस्ट मेरिडियन होता है. 

    राहुल गांधी की उम्र का टाइम जोन तो एएम से निकल गया है. अब वह पीएम टाइम जोन में हैं. यह ऐसा टाइम जोन है जिसमें अनुभव की गंभीरता झलकनी चाहिए. हर शब्द तोल-मोल कर बोलना चाहिए. 

    कांग्रेस को यह जरूर ध्यान रखना चाहिए कि पहले कांग्रेस का गवर्नेंस ही देश के सामने था. अब दूसरी विचारधारा का गवर्नेंस भी देश ने देख लिया है. इसी तुलना के बीच राहुल गांधी को जनादेश में अपना बहुमत साबित करना होगा. जन्मदिन पर सपने का प्यार देश की पुकार नहीं बन सकता.