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डेमोग्राफी चेंज पर ध्रुवीकरण तय करेंगे नतीजे

सार

पांच राज्यों बंगाल,तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में चुनाव की घोषणा हो गई है. बंगाल में दो और बाकी चार राज्यों में एक चरण में मतदान होगा..!!

janmat

विस्तार

    बंगाल को छोड़कर सभी चुनावी राज्यों में SIR हो गया है. बंगाल में दस्तावेजों की जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर न्यायिक अधिकारी कर रहे हैं. यह तय नहीं है कि चुनाव के पहले प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. शायद इसीलिए बंगाल के चुनाव को सबसे अंत में रखा है. 

    देश में चुनाव का ट्रेंड बदल गया है. अब सुशासन और कुशासन मुद्दा नहीं है बल्कि राज्य सरकारों की फ्रीबीज योजनाएं चुनावी परिणाम हाईजैक करने लगी हैं. फ्रीबीज़ के कारण चरमराती अर्थव्यवस्था की चिंता से परे राज्य सरकारें जीत के लिए चुनाव से 6 महीने पहले ऐसी योजनाएं लागू कर देती हैं. बिहार में तो ड्यूरिंग इलेक्शन महिलाओं के खातों में पैसे डाले गए. 

    पांच राज्यों में सरकारों की वापसी फ्रीबीज की योजनाओं पर टिकी है. सभी राज्यों में महिलाओं के खातों में नगद पैसा दिया जा रहा है. कोई भी दल फ्रीबीज की योजनाओं के लिए किसी दूसरे दल को दोषी नहीं ठहरा सकता है.  हमाम में सभी का चेहरा एक जैसा है.

    लोकसभा चुनाव के बाद जिन भी राज्यों में चुनाव हुए हैं उनमें दिल्ली को छोड़कर महाराष्ट्र हरियाणा और बिहार में सरकारों की वापसी हुई है. महिलाओं को नगद राशि देने की योजना ने इन सरकारों की एंट्री इनकम्बेंसी को रौंदते हुए चुनाव की दिशा को बदला है. चुनावी राज्यों में भी सुशासन और कुशासन मुद्दा नहीं है. एंटी इनकम्बेंसी और गवर्नेंस के करप्शन चरम पर है. भ्रष्टाचार से कमाए करोड़ों रुपए जब्त हुए हैं. गवर्नेंस की गुणवत्ता पांच साल तक इग्नोर की जाती है और अंतिम साल में फ्रीबीज के माध्यम से मैंडेट हाईजैक किया जाता है.

    फ्रीबीज का इलेक्शन ट्रेंड कायम रहा तो इन पांचो राज्यों में जो सरकार हैं उनके रिपीट होने की संभावना है. ऐसी योजनाओं के इंस्टेंट लाभ को देख ममता बनर्जी ने चुनाव घोषणा के दो घंटे पहले मस्जिदों के इमाम और पुरोहितों के मानदेय में बढ़ोतरी कर दी. कर्मचारियों के महंगाई भत्ते का ऐलान भी किया गया. इसके पहले महिलाओं के खातों में नगद राशि देने की योजना लॉन्च की गई थी.  

    फ्रीबीज के अलावा चुनावी नतीजे डेमोग्राफी में बदलाव और ध्रुवीकरण से भी प्रभावित हो रहे हैं. बंगाल में SIR पर विवाद के पीछे भी यही कारण माना जाता है. सीमावर्ती राज्य होने के कारण बांग्लादेश से घुसपैठ यहाँ आम समस्या है. बीजेपी इसके खिलाफ खड़ी है तो ममता इसे अपना वोट बैंक मान रही हैं. 

    चुनाव घोषणा के साथ आ रहे ओपिनियन पोल बता रहे हैं कि अभी भी ममता बनर्जी की स्थिति मजबूत है. संभावना है कि टीएमसी सत्ता में वापसी करेगी. फाइटर छवि और बंगाली अस्मिता के दांव से ममता लाभ में हैं. यहां BJP की समस्या ममता के सामने कोई स्थानीय विश्वसनीय चेहरा न होना है. बंगाल की 100 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम निर्णायक हैं. मुस्लिम वोट 70% अकेले ममता को मिलता है. इस तरह उनकी शुरुआत 100 सीटों से होती है. अगर मुस्लिम वोट में विभाजन होता है तो इसका नुकसान जरुर टीएमसी को उठाना पड़ेगा.

    बाबरी मस्जिद के निर्माण की घोषणा के साथ हुमायूं कबीर चुनावी मैदान में हैं. उनकी पार्टी मुस्लिम राजनीति करने वाली AIMIM  से गठबंधन भी कर सकती है. बिहार में मुस्लिम वोट बैंक बंट गया था. बंगाल में इसकी संभावना कम दिखाई पड़ती है.

    तमिलनाडु में भी फ्रीबीज ही मूल मुद्दा दिख रहा है. DMK की सरकार के खिलाफ एंटी इन्कम्बेंसी है. बीजेपी का  यहाँ AIDMK से एलाइंस है. फ़िल्मी हीरो विजय की पार्टी अकेले लड़ रही है. तमिलनाडु का परिणाम उनके परफॉर्मेंस पर भी निर्भर करेगा. अगर उनकी पार्टी ने डीएमके को नुकसान पहुंचाया तभी वहां फेरबदल हो सकता है. एनडीए का जनाधार बढ़ना निश्चित है लेकिन सत्ता अभी दूर ही दिख रही है.

    केरल में भी फ्रीबीज योजनाओं के कारण वामपंथी सरकार की वापसी हो सकती है. नगरीय चुनाव में बीजेपी ने बेहतर प्रदर्शन किया था. केरल की राजधानी में बीजेपी का महापौर बना है. केरल का नाम बदलकर केरलम किया गया है. कांग्रेस केरल में अपनी सरकार बनाने के लिए आश्वस्त है लेकिन बगावत और भितरघात बड़ा संकट है.

     असम में बीजेपी मजबूत है. सीएम हेमंत विश्व सरमा पोलराइजेशन के मास्टर माने जाते हैं. कांग्रेस को मुस्लिम वोट बैंक का तो समर्थन है लेकिन काउंटर पोलराइजेशन से उसकी जीत की संभावना धुंधला जाती है. असम में भी कांग्रेस बगावत और भितरघात से जूझ रही है. पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा बीजेपी में शामिल हो गए हैं. प्रियंका गांधी असम स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्ष हैं. पहले उन्हें यूपी का प्रभार दिया गया था तब पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था. अब असम में भी कांग्रेस बेहतर नहीं कर पाती है तो प्रियंका की काबिलियत पर भी सवाल उठ सकते हैं. पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश है वहां भी एनडीए की सरकार की ही वापसी की संभावना है.

    सभी राज्यों में चुनाव मुस्लिम वर्सेस अन्य पर सिमट जाते हैं. बंगाल सहित कई राज्यों में डेमोग्राफी में हो रहा बदलाव वहां रहने वाले हिन्दुओं को परेशान करने लगा है. चुनाव घोषणा के पहले ईरान युद्ध के कारण भारत में एलपीजी गैस और पेट्रोल-डीजल के संकट को कांग्रेस और विपक्षियों ने सरकार के खिलाफ बड़ा मुद्दा बनाया है. चुनावों के कारण सरकार इस संकट के समाधान के प्रति आश्वस्त भी होगी. 

    यह इतिहास भी पहली बार बन रहा है कि पांच राज्यों में चुनाव कराने वाले मुख्य चुनाव आयुक्त महाभियोग का सामना कर रहे हैं. सवाल किसी राज्य का नहीं लेकिन फ्रीबीज़ की योजनाएं सुशासन को दुष्प्रभावित कर रही है.

    चुनाव जीतने के लिए जब फ्रीबीज़ ही पर्याप्त है तो फिर कोई भी दल सुशासन की चिंता क्यों करेगा? इसकी चिंता तो मतदाताओं को ही करना होगी.