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ध्यान और कुण्डलिनी जागरण के वास्तविक और काल्पनिक अनुभवों को कैसे समझें ?

अतुल विनोद:

ध्यान या कुण्डलिनी जागरण के अनुभव का अर्थ है – ध्यान के दौरान आध्यात्मिक जागरूकता के एक बढ़े हुए स्तर का अनुभव करना। ध्यान के अनुभव सामान्य अनुभव नहीं होते हैं| जो हम सामान्य रूप से अपनी इन्द्रियों से अनुभव करते हैं वह ध्यान के अनुभव नहीं हैं, ध्यान के अनुभव स्पष्ट नही होते न ही साधारण होते हैं, ये अलौकिक होते हैं| ध्यान के वास्तविक अनुभव कुण्डलिनी जागरण के बाद ही होते हैं|

जो अनुभव या लक्षण ध्यान के बाद भी चलते हैं वे भी ज्यादातर मामलों में ध्यान या कुण्डलिनी जागरण के अनुभव वास्तविक नहीं होते, ये सब भ्रान्तिदर्शन कहे जाते हैं, कई बार ये हमारी ग्रंथियों(चक्रों) के सक्रियकरण(एक्टिवेशन) से जुड़े असामान्य लक्षण होते हैं| जिन्हें विज्ञान इल्लुजन, होलिसिनेशन या साइकोसिस कहता है और योग भ्रान्तिदर्शन|

वो कौन से अनुभव हैं जो ध्यान से जुड़े नहीं हैं?

ध्यान के अनुभव ध्यान में ही होते है ध्यान के बाद नहीं, ये केवल गहन ध्यान / समाधि की अवस्था में होते हैं| ध्यान से उठने के बाद नहीं होते|

जागृत हों, पूरी तरह से सचेत हों, और आपके शरीर पर पूरा नियंत्रण होने की दशा में ध्यान के अनुभव नहीं होते| जब आप शारीरिक और मानसिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल हों तब ध्यान के अनुभव नहीं होते|

यदि अप शांत हैं , सहज हैं , मौन में हैं तब भी ध्यान के अनुभव नहीं होंगे|

लेकिन यदि हम पूरी तरह जागरूक हैं और हम खुली आँखों के साथ रंग, रोशनी देख रहे हैं,तो यह ध्यान का अनुभव नहीं है और ये किसी समस्या का लक्षण हो सकते है ।

ध्यान के दौरान क्या क्या अनुभव होते है जो ध्यान के वास्तविक अनुभव हैं?-

ध्यान के वास्तविक और आभासी अनुभवों को समझना होता है, ध्यान का पहला पहला वास्तविक अनुभव अक्सर मृत्यु के आभास से जुड़ा होता है, आपको लगता है कि आप अपने शरीर या सांस पर से नियंत्रण खो रहे हैं, शरीर जड़ हो जाता है, आप ट्रान्स(नींद जैसी स्थिति) में जा सकते हैं, आपको झटके लग सकते हैं|

ध्यान के दौरान पीले घेरे में गहरा नीला या काला रंग दिखाई देगा जैसे कोई आँख, कलर्स बदल भी सकते हैं|

विभिन्न रंगों की रोशनी। ये गतिमान हो सकती हैं, चक्कर लगाते हुए ,सूरज की तरह चमकदार ,आंखों को तनाव में डाले बिना। कुछ समय बाद गायब हो जाएगी और शरीर की चेतना वापस आ जाएगी।

ध्यान के दौरान हर जगह एक चमक या सफेदी दिख सकती है ,इस रौशनी के अलावा कुछ भी नहीं – न ऑब्जेक्ट, न हम। हर जगह अंधेरा दिख सकता है चारो ओर अँधेरा। हम महसूस कर सकते हैं कि हम अपने शरीर को हिलाने डुलाने में असमर्थ हैं और इस अंधेरे को देखने से रोकना मुश्किल लगेगा। ये अनुभव थोडा डरा सकता है कुछ देर में ये अनुभव चला जायेगा तब हम शरीर को हिला सकेंगे|

प्रिज्म की तरह से निकलते हुए अनेक रंग दिखाई दे सकते हैं, ये एक दूसरे पर चक्कर लगा सकते हैं, कलर्स का सेंटर शुद्ध सफेद रंग का होगा। बाहर रंग-बिरंगी रश्मियाँ, प्रकट होती गायब होती, केंद्र का शुद्ध सफेद रंग बड़ा होने लगता है और तब तक बड़ा होता जाता है जब तक कि हर जगह शुद्ध सफेदी या चमक के अलावा कुछ नहीं दिखता।

एक बहुत छोटी सफेद प्रकाश या उज्ज्वल प्रकाश की किरण या बिंदु। इसका आकार ठीक रेत के एक छोटे से दाने का होगा। कुछ पंखुड़ियों या असंख्य पंखुड़ियों के साथ विभिन्न रंगों के कमल। कली के रूप में या पूरी तरह से खिला हुआ |

पूर्ण रूप से खिले हुए कमल ऊपर की ओर नहीं बल्कि आपके सामने होंगे। सबसे प्रमुख होगा असंख्य पंखुड़ियों वाला एक विशाल गहरा गुलाबी कमल।

ध्यान के दौरान आने वाले अन्य सामान्य अनुभव-

• भगवान,देवी,विभिन्न आकारों के दिव्य रूपों के दर्शन । लगेगा जैसे प्रकाश ने ही भगवान या देवी का रूप ले लिया है।
• भगवान / देवी / देवता या दिव्य रूप के धड़ के बिना चेहरा /सिर
• अजीब दिखने वाले,इंसानों जैसे भयानक और भयावह रूप।
• मनुष्य के धड़ पर नाग |
• ऐसी वस्तुएं, लोग या स्थान जिन्हें पहले कभी नहीं देखा
• एसा लगेगा जैसे आप गायब हो गए हैं फिर भी देख रहे हैं

• सब शून्य में लीन हो गया , बस बाकी है एक सफ़ेद प्रकाश, चारों तरफ पानी ही पानी है और कुछ नही, पानी में डूबते हुए, जैसे साँस लेना मुश्किल है, मरने का डर और ध्यान का टूटना,या कोई दूसरा डूब रहा है| या मृत्यु है ही नहीं आप पानी की गहराईयों में गोते लगा रहे हैं

• आप अपने आध्यात्मिक रूप (सूक्ष्म शरीर )को बैठकर ध्यान करते हुए देखेंगे। यह शरीर पूरी तरह से अलग है, जिसके बारे में किसी ने कभी पढ़ा या कल्पना नहीं की है।

• जैसे आसपास की सभी वस्तुएं मैं हूँ, मैं और वे एक हो गए हैं ,पेड़,झाड़ियाँ,घास, मकान,पत्थर,रेत,अंतरिक्ष और आपके आसपास की सभी वस्तुओं में आप हैं और आप में वो सब एकाकार हो रहे हैं |आप सभी प्रकार की भावनाओं के स्वामी हैं,जैसे मैं पूर्ण हूँ,आपके पास सब कुछ है या सब कुछ आपका है,आप सब कुछ हैं और सब कुछ आप में है ,गहन शांति का विचार|

• आप कोई वस्तु बन गये हैं ,अत्यधिक आनन्द ख़ुशी का अनुभव करते हैं जैसे कि आप खुशी के नशे में हैं। आप अवर्णनीय शांति,आप अनुभव करेंगे कि आपका शरीर बहुत हल्का हो गया है। आप अनुभव करेंगे कि आपके पास कोई शरीर नहीं है और आप अजन्मे हैं।

• अचानक आप रोना, हंसना, मुस्कुराना, अनायास बोलना शुरू कर देंगे और ध्यान के दौरान अन्य भावनाओं का प्रदर्शन करना शुरू कर देंगे।

• आप क्या कर रहे हैं आपको पता हो सकता है नही भी, आप अनुभव करेंगे कि आप सो रहे हैं और खर्राटे ले रहे हैं। आप लेटे हुए,सोते हुए और खर्राटे लेते हुए खुदको देखेंगे

• लगेगा जैसे शरीर असहनीय रूप से गर्म हो गया है। या शरीर बहुत ठंडा हो गया है और आप अपने शरीर को हिला नहीं सकते हैं आपकी आंखों के नीचे, आपके होठों या आपकी सांसों में ठंडक का अहसास होता है।

• शरीर बेदम हो गया है।

• अचानक झटके या रुक-रुक कर हाथ,पैर,गर्दन,धड़ या पूरे शरीर में झटके।

कुण्डलिनी जागरण व ध्यान के उच्चस्तरीय अनुभव क्या हैं?-

• शरीर के किसी भी हिस्से या पूरे शरीर में अचानक झटका लगता है जैसे कि आपने किसी बिजली के तार को छू लिया हो।

• बहुत तेज गति, हिलना डुलना,आवेशित हो सकते हैं, शरीर का घूमना, आगे पीछे आना जाना, फुदकना

• हाथों,जीभ,आंख,होंठ,चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों की अजीब गतिविधियाँ

• शरीर का नृत्य करना, डोलना, घूमना, तालबद्ध होना

• शरीर विभिन्न आसन स्वयं करना शुरू कर देता है या विभिन्न स्थितियों में खुद को घुमाता है।

• जैसे कोई और है जो आपके शरीर को मूव करा रहा है|

• असमान्य और कठिन आसन भी आसानी से अपने आप लगने लगना|

• अपनी जगह बदल लेना|

• आपके पेरिनेम(मूलाधार)के आसपास कुछ हिलते हुए ,कम्पन महसूस करना ,कूदने की इच्छा होना

• पैरो की मांसपेशियों में कम्पन

• जैसे कोई छाती दबा रहा है

आपके पेरिनियम (मूलाधार) से सिर तक उर्जा के जाने का अनुभव, रीढ़ में कम्पन रीढ़ की हड्डी से जाती हुयी हवा या हवा के बुलबुले का अनुभव, हृदय तक पहुचती हुयी हवा जो बाद में पूरे शरीर को हिलाने लगती है |

आप अनुभव करेंगे जैसे कि एक छोटा पहिया आपके पेट के बटन के चारों ओर बहुत तेजी से घूम रहा है और आप उस जगह पर कुछ गर्मी का अनुभव करेंगे।

साधना के दौरान कभी आप सांप की तरह फुफकारने लगेंगे तो कभी उसकी तरह रेंगने लगेंगे। आप शेर या बाघ की तरह गरजना शुरू कर देंगे और अपने खुले हाथों से बाघ या शेर की तरह इशारे करना शुरू कर सकते हैं । आप एक हाथी, मछली, पक्षी, आदि की तरह भी इशारा कर सकते हैं। आप अनजाने ध्वनियों, शब्दों, आदि को बोलेंगे जिन्हें कभी सुना नहीं। आपको ऐसी आवाज़ें सुनाई देंगी जो बहुत अचानक,बहुत कम होती हैं|

ध्यान के असली अनुभवों और कुछ ख़ास तरह की मानसिक व शारीरिक बीमारियों(tinnitus/vertigo/Meniere’s) के बीच बहुत कम अंतर होता है इन लक्षणों को बहुत बारीकी से समझना होगा कई बार साधक बीमारियों के लक्षणों को ध्यान के परिणाम समझ लेता है|

आप स्वाद और सूंघने से जुड़े अलग अलग अनुभव महसूस कर सकते हैं अच्छी और बुरी दोनों तरह की वस्तुओं को सूँघने या चखने का अनुभव करेंगे। (आप अपने NOSE / TONGUE के साथ कभी भी SMEL / TASTE नहीं करेंगे। अनुभव के बाद आपको एहसास होगा कि आप ध्यान कर रहे थे |

आपका पूरा शरीर तैर रहा है या आपको पूरे शरीर में गुदगुदी की अनुभूति हो सकती है। आप सांस लेने में असमर्थ हो गए हैं ,आप शरीर को हिलाने,सांस लेने,रोने,चिल्लाने,बोलने या कुछ भी करने में असमर्थ हैं। आप कुछ समय बाद उठेंगे कि आपको पता चलता है कि आप ध्यान कर रहे हैं।

आप अलग-अलग तरीके से सांस लेंगे – बहुत धीमी,बहुत तेज,बहुत छोटी ,बहुत लंबी ।

आप अनुभव करेंगे कि आपकी सांस आपके फेफड़ों के विभिन्न भागों में अलग-अलग समय अवधि के लिए बंद है। आप सांस लेने में तकलीफ का अनुभव करेंगे।

आप अनुभव करेंगे कि आप अनजाने में एक नासारंध्र से सांस ले रहे हैं और अपनी उंगलियों से किसी भी नथुने को बंद किए बिना विपरीत नथुने से हवा को बाहर निकाल रहे हैं।

अपने आप होने वाली विभिन्न श्वास क्रियाएं कुण्डलिनी की स्वाभाविक क्रिया है। जब इस तरह के प्राणायाम और क्रिया आपके साथ होते हैं,तो आप कुंडलिनी को जगाने के लिए प्राणायाम या क्रिया के अभ्यास के बारे में अज्ञान /भ्रम का एहसास करेंगे।

आउट ऑफ़ बॉडी अनुभव- आप अनुभव करेंगे कि आप अपने सिर के ऊपर से निकल रहे हैं, एक सफेद तंतु से जुड़े हुए जैसे कि कमल का तना या एक गर्भनाल और ऊपर आकाश में एक हजार शाखाओं में बंटी हुई पंखुड़ियाँ ।

आप अनुभव करेंगे कि आप नाभि से बाहर निकल रहे हैं और ऊपर और ऊपर आकाश में जा रहे हैं,फिर भी उसी सफेद धागे की तरह नाल के माध्यम से आप आपके शरीर से जुड़े हुए हैं |

आप अनुभव करेंगे कि आप वापस आ रहे हैं और धीरे-धीरे अपने शरीर में प्रवेश कर रहे हैं। आप अपने शरीर को महसूस करना शुरू कर देंगे जैसे कि आप किसी और के शरीर को महसूस कर रहे हैं, तब आप वापस अपने होश में आएंगे और महसूस करेंगे कि आप ध्यान कर रहे हैं।

ध्यान करते समय आप अनुभव करेंगे कि आप अपने शरीर से उठ चुके हैं और आप अपने शरीर को दूर से देख रहे हैं।

ध्यान के अनुभवों का क्या महत्व है-  बहतु ज्यादा, ये अध्यात्म की समझ बढ़ाते हैं, ध्यान में होने का अहसास कराते हैं, आत्मा और परमात्मा की समझ बढ़ाते हैं|

 

ATUL VINOD



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