पानी से ही है जीवन की कहानी इसे बचाएं ना करे नादानी

पानी से ही है जीवन की कहानी इसे बचाएं ना करे नादानी
मृत्यु अटल है फिर भी जीवन के लिए साधन संसाधन जुटाने में इंसान धर्म-अधर्म, नैतिक-अनैतिक भूल कर रात दिन लगा हुआ वैसे ही यह सब जानते हुए जल ही जीवन है जल को सहेजने की बजाए बर्बाद और प्रदूषित करने में जाने अनजाने ही लगा हुआ है जब लोग जीवन के लिए जरूरी जल को संरक्षित करने के प्रति इतना उदासीन है तो सरकारों के स्तर पर कितना भी प्रयास हो उसका वांछित परिणाम शायद नहीं मिल सकेगा.

विश्व जल दिवस पर उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश की बेतवा केन परियोजना पर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच एमओयू हस्ताक्षर होना प्रसन्नता की बात है इससे दोनों राज्यों को लाभ होगा जो बारिश का पानी अभी बर्बाद हो जाता है वह पानी खेतों की सिंचाई और बिजली बनाने के काम आएगा इस परियोजना को लेकर लंबे समय से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच में विवाद चल रहा था अब ऐसा और अवसर आया है जब उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश और परियोजना की कुल लागत का 90% देने वाले केंद्र में सरकार एक ही विचारधारा को एक ही दल की मौजूद है. 

इसी शुभ अवसर के कारण केन बेतवा परियोजना जो लंबे समय से रुकी हुई थी उस पर काम चालू होने उम्मीद जगी है नदियों को जोड़ने की परिकल्पना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई ने की थी यह यह परिकल्पना साकार होती है तो बारिश में बाढ़ से होने वाली त्रासदी तो बचेगी ही और बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों काजल ऐसे क्षेत्रों में भेजा जा सकेगा जहां सूखे की स्थिति बनती है पूरा देश नदियों के माध्यम से जुड़ा हुआ है.

Water
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्षा का पानी संरक्षित करने के लिए फ्रिज द रेन अभियान प्रारंभ करने की घोषणा की है आजकल त्रासदी यह है कि जो जीवन और समाज से जुड़े हुए मुद्दे हैं उनमें भी राजनीति के नजरिए से समय-समय पर अलग-अलग तरह से अभियान चालू किए जाते हैं चालू करने का तो खूब प्रचार हो जाता है लेकिन उनकी सफलता सवालों के घेरे में रहती है.

मध्य प्रदेश की ही बात करें तो हमने पहले भी देखा है की जलाभिषेक अभियान पानी रोको अभियान जैसी पानी बचाने अभियान चलाने की खूब शोर मचाए गए लेकिन आज कोई भी बताने की स्थिति में नहीं है कि इस अभियान में कितना खर्चा हुआ और हमने क्या उपलब्धि हासिल की अब जब पानी बचाने का नया अभियान आ गया तो पुराने अभियान तो वैसे ही समाप्त हो गए ऐसा देखा गया है की अभियानों का नाम बदलकर पुरानी पुरानी कुछ उपलब्धियां बता दी जाती है और पानी बचा लिया जाता है धरती तो सूखे की सूखी रहती है पानी नहीं हो तो जीवन नहीं है. 

आज वैज्ञानिक दूसरे ग्रहों पर खोज कर रहे हैं वहां पानी अगर सुरक्षित मिल गया तो फिर वहां भी जीवन आबाद हो जाएगा हम भोपाल की ही बात करते हैं भोपाल का तालाब भोपाल की जीवन रेखा है तालाब के संरक्षण के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए गए लेकिन ऐसी दुखद स्थिति आज बनी हुई है कि आज भी गंदा पानी सीधे तालाब में मिल रहा है आज आज हमारे जल स्रोत क्यों प्रदूषित हो रहे हैं शहरी इलाकों में तो कंक्रीट के जंगल जो बन रहे हैं वह तो नदी नाले आप को बंद कर रहे हैं हर जगह पत्थर के ब्लॉक लगाए जा रहे हैं कहीं खुली जमीन नहीं है जिससे बरसात में पानी प्राकृतिक ढंग से अंदर जा सके कौन है 

सरकारी अभियान उसको चलाने वाला कोई भी सरकारी अफसर हो वह अफसर उस अभियान के खर्च में से कितनी भी राशि अपने लिए भ्रष्टाचार के रूप में निकाल ले लेकिन व वह अक्सर जो भी कर रहा है उससे उसके जीवन पर भी असर पड़ रहा है अगर पानी प्रदूषित हो रहा है तो वही पानी वह अफसर उसका परिवार पी रहा है सर सरकार की योजना के लिए तो भ्रष्टाचार करो लेकिन ऐसी जीवन से जुड़ी चीजों में ऐसा जरूर दिमाग में आना चाहिए कि इसमें जो भी गड़बड़ी हो रही है उसका दुष्परिणाम हमें भी भोगना पड़ेगा वर्षा का पानी बचाना हमारे जीवन से जुड़ा हुआ है.

सरकार का ही नहीं हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह पानी बचाकर अपने जीवन की रक्षा करें और आने वाली पीढ़ियों के जीवन के लिए अनुकूल वातावरण बनाए जलवायु परिवर्तन हो रहा है कभी कभी बारिश कभी सूखा और मौसम में जिस दिन का बदलाव देखा जा रहा है वह पूरी दुनिया कुछ चिंता में डाले हुए हैं धरती जंगल हवा पानी आकाश यही ईश्वर के रूप है इसी से हमारा जीवन है इसलिए अगर हम जीना चाहते हैं और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बचाना चाहते हैं तो बारिश के पानी को संरक्षित करना बहुत जरूरी है पानी को बर्बाद होने से रोकना और पानी को प्रदूषण से बचाना भी हमारी पहली जिंदगी में भारत की संस्कृति प्रकृति की पूजा पर आधारित है हम सभी को अपने पूर्वजों ध्यान और संदेश को आत्मसात करते हुए प्रकृति की रक्षा वह अपने जीवन में पूजा के रूप में शामिल करना समय की आवश्यकता है

Priyam Mishra



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