भोपाल। मंगलवार को पन्ना टाइगर रिजर्व में रेडियो कॉलर वाला दो वर्षीय बाघ मृत पाया गया। उसकी मौत एक अन्य बाघ से क्षेत्रीय लड़ाई में लगी चोटों के कारण हुई। गश्ती दल को मंगलवार दोपहर लगभग 2:30 बजे दो बाघों के बीच लड़ाई की सूचना मिली। शव में खोपड़ी टूटी हुई थी और शरीर पर कई घाव थे। वन अधिकारियों ने बताया कि बाघ अक्सर गांवों के आसपास घूमता था, इसलिए उसे रेडियो कॉलर पहनाया गया था।
26 को किया गया था रेस्क्यू
मृतक बाघ का 26 अप्रैल 26 को पन्ना टाइगर रिजर्व के परिक्षेत्र अमानगंज बफर के पास तारा ग्राम से रेस्क्यू किया गया था। रेस्क्यू उपरान्त बाघ को पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में स्वस्थ्य अवस्था में रेडियो कॉलर पहनाकर छोडा गया था। उक्त बाघ की हाथियों और वन कर्मियों द्वारा 24x7 निगरानी की जा रही थी। चिकित्सक दल द्वारा पोस्ट गार्टग के उपरान्त बताया गया कि उक्त बाघ के शरीर के विभिन्न अंगो में घाव के निशान हैं एवं कशेरुका की हड्डी, खोपड़ी की हड्डी (Vertebral bone, Skull bone) भी टूटी पायी गयी, जिससे यह प्रतीत होता है कि बाघ की मृत्यु प्रथम दृष्टया आपसी संघर्ष के कारण हुई होगी। पोस्ट मार्टम रिपोर्ट प्राप्त होने पर मृत्यु का कारण स्पष्ट हो सकेगा। पोस्ट मार्टम के दौरान लिये गये समस्त सेम्पल सक्षम प्रयोगशालाओ में जांच के लिये भेज दिये गये है।क्षेत्र में कैमरा ट्रैप लगाकर, हाथियो एवं वन कर्मियों द्वारा सघन गश्ती की जा रही है।
जनवरी से अब तक 32 बाघों की मौत
जनवरी 2026 से मध्य प्रदेश में 32 बाघों की मौत हो चुकी है। इनमें से सात की मौत शिकार से संबंधित घटनाओं के कारण हुई, जबकि बाकी की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई। पिछली बाघ जनगणना के अनुसार, राज्य में 785 बाघ हैं, जिनमें से 35% संरक्षित क्षेत्रों से बाहर हैं। शिकार से संबंधित सभी सात मौतें बिजली के झटके के कारण हुईं। इनमें से पांच बाघिनें 18 महीने से आठ साल की उम्र की थीं। ये मौतें पूर्वी मंडला, उत्तरी शाहडोल, पश्चिमी छिंदवाड़ा वन प्रभाग, उमरिया और दक्षिणी सिवनी वन क्षेत्र में हुईं।
बाघों की मौतें 5 प्रतिशत से कम :राजौरा
वन्यप्राणी शाखा की प्रमुख समीता राजौरा ने बताया कि प्रदेश के वन क्षेत्रों एवं उसके आसपास बाघों की सालाना मृत्यु 5 प्रतिशत से भी कम है। तथा यह सामान्य स्वरुप का है, क्योंकि प्रदेश में बाघों की संख्या साढ़े सात सौ से भी अधिक है। उन्होंने बताया कि ज्यादातर मौतें प्राकृतिक स्वरुप की हैं। उन्होंने कान्हा में पिछले दिनों मृत चार बाघों के मामले में बताया कि किसी संक्रामक पशु को खाने से इनकी मृत्यु हुई है जिस पर संबंधित वन क्षेत्र को संक्रमण मुक्त करने की कार्यवाही की गई है और आसपास के ग्रामों के तीन सौ से अधिक कुत्तों का वैक्सीनेशन किया गया है।
गणेश पाण्डेय