भोपाल: कहने को तो मध्यप्रदेश की वित्तीय हालत खराब है। प्रदेश को लाड़ली बहना योजना से लेकर अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर लगातार कर्ज लेना पड़ रहा है। बावजूद इसके वन विभागों के अधिकारियों की मौज है। इसी कड़ी में वन विभाग लाखों रुपए खर्च कर पांच सितारा होटल में कार्यशाला के नाम पर इस माह रिटायर्ड हो रहे पीसीसीएफ की फेयरवेल करने जा रहा है।
इस कार्यशाला को लेकर फील्ड के अधिकारी दबी जुबां सवाल उठा रहें हैं कि यह कार्यशाला तब होने जा रहा जब जंगल में हर दिन आगजनी की 60 से अधिक घटनाएं हो रही, हर महीने 8 टाइगर की मौत हो रही हो, अतिक्रमण बढ़ रहें हो, अवैध उत्खनन हो रहें हो और माफिया द्वारा वन रक्षक हरिकेश गुर्जर को कुचलकर मार दिया गया और हरकेश गुर्जर को अफसर अभी तक शहीद का दर्जा नहीं दिलवा सके। मैदानी अफसरों द्वारा क्षेत्रीय कार्यशाला के बहाने पीसीसीएफ के फेयरवेल इवेंट्स यानि मौज-मस्ती की पाठशाला के आयोजन पर लाखों रुपए खर्च करने के औचित्य पर सवाल खड़ा किया जा रहा है। इस पर रिटायर्ड दबंग आईएफएस आज़ाद सिंह डबास का कहना है कि जब विभाग के पास वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा हो, तब पांच-सितारा होटल में कार्यशाला आयोजित करना, समय और सरकार के लाखों रुपए की बर्बादी के सिवा कुछ नहीं है।
पेंच और इंदौर में कार्यशाला
पीसीसीएफ विकास पुरुषोत्तम धीमान ने एक सर्कुलर जारी कर 8 मई को पेंच टाइगर रिजर्व और 15 फरवरी को इंदौर के पांच सितारा होटल में कार्यशाला आयोजित करने के निर्देश दिए है। फील्ड के अफसरों में चर्चा है कि पीसीसीएफ विकास पुरुषोत्तम धीमान इस महीने सेवानिवृत हो रहें हैं। इसलिए कार्यशाला के बहाने फेयरवेल इवेंट्स आयोजित करना है। जारी सर्कुलर के अनुसार 8 मई को पेंच टाइगर रिजर्व में आहूत कार्यशाला में जबलपुर, बालाघाट और सिवनी सर्किल के सीएफ और डीएफओ शामिल होne के लिए कहा गया है । जबकि 15 मई को इंदौर में एक पांच सितारा होटल में होने वाली कार्यशाला में इंदौर, खंडवा और उज्जैन संभाग के अफसरों को बुलाया गया है। रातकालीन समय में दिन की कार्यशाला मौज-मस्ती की पाठशाला तब्दील में हो जाएगी।
कार्यशाला तो श्योपुर में करना था : डबास
रिटायर्ड दबंग आईएफएस आज़ाद सिंह डबास का कहना है कि अगर पाठशाला रखना ही था तो श्योपुर -मुरैना में रखते, जहां रेत माफियाओं ने एक वनरक्षक को कुचलकर मार डाला। डबास का कहना है कि यदि वन बल प्रमुख शुभ रंजन सेन श्योपुर -मुरैना में कार्यशाला रखते और वन माफियाओं के खिलाफ एक्शन प्लान तैयार करते तो फ्रंटलाइन स्टॉफ का मनोबल बढ़ता। यह कार्यशाला एक पीसीसीएफ विकास धीमान के रिटायर्ड मंथ पर मौज -मस्ती की कार्यशाला सिवा कुछ नहीं है।
असीम श्रीवास्तव के कार्यकाल में हुई थी परिपाटी
1988 बैच के आईएफएस असीम श्रीवास्तव फरवरी 2024 में वन बल प्रमुख बने। तब 1992 बैच के आईएफएस अफसर पीसीसीएफ विकास यूके सुबुद्धि ने क्षेत्रीय कार्यशाला के बहाने पूर्व रिटायर्डमेंट फेयरवेल पार्टी का आयोजित करवाया। सुबुद्धि नवंबर 24 में रिटायर्ड हुए और तब लोगों को समझ में नहीं आया। इस आयोजन का असल मकसद तब समझ आया जब जून 25 तत्कालीन पीसीसीएफ विकास सुदीप सिंह ने अपने रिटायर मंथ में पांच सितारा होटलों में क्षेत्रीय कार्यशाला के आयोजन करवाया। इंदौर और ओरछा की होटलों से तस्वीरें मीडिया में आई, उससे कार्यशाला का असल मकसद सार्वजनिक हो गया।इंदौर में गेट-टू-गेदर यानि कार्यशाला बनाम मौज-मस्ती की पाठशाला में क्या-क्या हुआ, यह किसी से छुपा नहीं है। गिफ्ट से लेकर सूटरूम तक को लेकर सबसे अधिक विवाद हुआ। तब भी सेवानिवृत आईएफएस डबास ने इस मस्ती की पाठशाला की संज्ञा देते मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को पत्र लिखा था।
गणेश पाण्डेय