खुद को समझदार समझना  दुनिया का सबसे बड़ा भ्रम है …. – P अतुल विनोद

खुद को समझदार समझना  दुनिया का सबसे बड़ा भ्रम है,  चतुराई की जगह नासमझी  से बदलती है जिंदगी—,P अतुल विनोद

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दुनिया हमें सयाना बनाने पर तुली रहती है|  बचपन से ही हम सयाने बनने के सपने संजोने लगते हैं|  बच्चे क्यों चाहते हैं कि बड़े बन जाए?  जबकि बड़े होने से कभी किसी को कुछ मिला नहीं और बड़े होने के बाद भी हम बचपन को याद करते हैं?  क्योंकि हम बड़े बने बच्चे होने के कारण?

बच्चे थे तभी हैरानी थी तभी जिज्ञासा थी तभी प्यास थी और इसी प्यास से  ज्ञान की कुछ बूंदे मिली और समझ बैठे खुद को  सयाना| ये समझदारी और सयानापन,  ये बुद्धिमानी और चतुराई,  बहुत खतरनाक है|  ये तेजी से हमें अपना ही गुलाम बना लेती है|  हम अपनी समझदारी के जाल में फंस जाते हैं|समझदारी बहुत चतुर और चालाक है|  ये समझदारी जिस डाल पर बैठती है उसी को काट देती है|हम समझदार हो गए हैं ये सिर्फ एक सोच है|  ये सोच हमें ऊंचा उठाने के लिए नहीं है नीचे गिराने के लिए है|

जिसने खुद को समझदार समझ लिया मान लिया कि वो मैच्योर हो गया है| बड़ा हो गया है, जानकार हो गया है, एक्सपर्ट हो गया है|समझ लेना तभी उसकी  नीचे की यात्रा शुरू हो गई फिर वो कहां जाकर गिरेगा  कल्पना भी नहीं की जा सकती|दुनिया में समझदारों की बहुत दुर्गति हुई है| असली दुनिया की नजर में भले ही समझदार कहलाते  हो लेकिन खुद अपने आप को समझदार मानने की भूल मत करना|

हमसे बड़ा नासमझ कोई नहीं है|  छोटी मोटी बातें जान लेने से दुनिया के बड़े रहस्य जान लेने का दम्भ सबसे बड़ा भ्रम है|हम क्या जानते हैं?  पूरी दुनिया में अब तक पैदा हुए  वैज्ञानिक,  ज्ञानी, दार्शनिक, समझदार, बुद्धिमान, विद्वान, चिंतक, विचारक  प्रकृति परमात्मा और  इस तंत्र को लेकर वही बातें कह रहे हैं जो सदियों से चली आ रही हैं|जीवन और जीवन से जुड़े हुए गूढ़ रहस्य  थोड़े बहुत पकड़ में आए हैं तो वो सनातन धर्म को मानने वालों को|

क्योंकि सनातन धर्म के मानने वाले अपना कोई धर्म मत, पंथ, या संप्रदाय नहीं बनाते|   वो पहले ही मान लेते हैं कि जो कुछ है वो सनातन है आदि है और अनंत है| इसलिए  उन्हें ज्ञान की थोड़ी बहुत झलक मिली |जिन्हें भी इस संसार में चाहे वो किसी भी धर्म का हो, सच्चाई और समझ  का छोटा भी अंश मिला वो ज्ञानी  होने के बाद भी सबसे बड़े अज्ञानी हो गए|

वो जितना जानते गए उतना ही हैरत में पढ़ते गए|  समझदार बनने की बजाये उनकी  नासमझी बढ़ती गई|  उन्होंने घोषित कर दिया  कि मुझसे बड़ा निरीह, अज्ञानी, दुर्बुद्धि और मूरख कोई नही|

 

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