टोटके-स्वयं भगवान शिव टोटकों की मान्यता के समर्थक

 टोटके-स्वयं भगवान शिव टोटकों की मान्यता के समर्थक

 टोने-टोटके की प्रक्रिया मानव द्वारा निर्मित नहीं, बल्कि "शिव प्रणीत" है। स्वयं देवाधिदेव महादेव के मुखारविंद से "टोटकों की सृष्टि" हुई है। एकबार कैलाश पर्वत के शिखर पर संसार का कल्याण करने वाले देवाधि देव महादेव से " भगवान दत्तात्रेय'" ने "तंत्र कल्प" (टोटकों की महानता) का वर्णन करने की प्रार्थना की।



श्री दत्तात्रेय उवाच

कलौ सिद्धं महाकृत्यं तंत्र विद्या -विधानकम्।

 कथयस्य महादेव देव-देव  महेश्वर ॥

बिना कीलक मंत्राश्च तंत्राश्य यंत्राश्च कथिताः शिव।

तंत्र विद्या क्षणात् सिद्धिः कृपां कृत्वा वदस्वं मे ॥

भावार्थ :- श्री दत्तात्रेय जी ने भगवान शिव से कर जोड़ कर विनती करते हुए पूछा - हे महादेव! कलियुग में तंत्र विद्या (टोटके रूपी विद्या) के द्वारा ही समस्त कार्य मानव पूर्ण कर सकेंगे अतएव हे महेश्वर! आप उस तंत्र विद्या को प्रकाशित करें जो तंत्र विद्या कीलन रहित हैं, जो अल्प समय में ही सफलताए प्रदान करती ऐसी तंत्र विद्या का ज्ञान प्रदान करें। ऐसी तंत्र विद्या का ज्ञान प्रदान करें।

श्रृणु सिद्धि महायोगिन्! सर्व योग विशारद। 

तंत्र विद्या महा-गुह्या देवानामपि दुर्लभाः॥ 

तिवाग्रे कथा देव! तंत्र-विद्या शिरोमणि ।

 गुह्याद गुह्या महा गुह्या, गुह्या गुह्या पुनः पुनः॥

 गुरु-भक्ताय दातव्या नाभक्ताय कदाचन। 

मम भक्ति कमनसे दृढ़ चित्त युताय च ।।

 भावार्थ :- हे समस्त प्रकारेण योगों का ज्ञान रखने वाले महायोगी दत्तात्रेय! तंत्र सिद्धि (टोटकों की सिद्धि) की बात सुनो । तंत्र विद्या अत्यन्त गुप्त है तथा यह देवताओं के लिए भी दुर्लभ है, जो सर्वोत्तम शिरोमणि विद्या है। यह अत्यन्त गोपनीय अपितु गोपनीय से भी अधिक गुप्त है। यह तंत्र विद्या (टोटके रूपी विद्या) उसी को देनी चाहिए जो कि गुरु भक्त है, "गुरु रक्षा कवच" धारण करता है। जिसे गुरु के प्रति भक्ति-श्रद्धा और उनके वचनों पर विश्वास न हो, उसे इस विद्या को नहीं देना चाहिए। यह विद्या सिर्फ मेरे प्रति एक निष्ठावान भक्ति वाले तथा दृढ़ चित्तवान साधक को ही देनी चाहिए।


मात्र तिथिर्न नक्षत्रं नियमों वासरः।

न व्रतं नियमों होम काल वेला विवर्जितम्॥ 

केवलं तंत्र-मन्त्रेण ह्यौषधि सिद्धि दायिनी। 

यस्याः साधना मात्रेण क्षणात सिद्धिश्च जायते।।

भावार्थ :- यहाँ जिन तंत्र प्रयोगों (टोटकों के प्रयोगों) का कथन कर रहा हूँ, उसके प्रयोग में मात्र तिथि, नक्षत्र, वार और समय के विचार करने की आवश्यकता होती है। इसमें व्रत, उपवास, होम आदि करना भी आवश्यक नहीं होता है। केवल तंत्र में कही गई विधि के अनुसार ही ग्रहण की गई जड़ी बूटियाँ" प्रभाव में शीघ्र सिद्धि प्रदान करती हैं।

 भगवान शिव द्वारा वर्णित उपरोक्त श्लोकों से तंत्र शास्त्र (टोटके शास्त्र) की महिमा महामहान है अत: तंत्र व टोटकों की सच्चाई को नकारा नहीं जा सकता।

 

 


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