वामनावतार

|| वामनावतार ||  

वामनावतार का रहस्य यह वह प्रथम सुक्ष्म बाल परमाणु है, जिसका वर्णन, कणाद, एंव गौतम नामक ऋषियों ने किया है। आधुनिक विज्ञान जिसे परमाणु कह रहा है वह तो परमाणु है ही नही ।

यह तीन बिन्दुओं से युक्त नन्हा परमाणु ही पौराणिक कथाओं या वामनावतार है। यही इस ब्रह्माण्ड को धारण किये हुए है। यह ब्रह्माण्ड के केन्द्रीय नाभिक ये मध्य बैठा धन एवं ऋण पोल पर अपनी शक्ति के पग रखे हुए, शीर्ष पर शेषनाग के फणों के रूप तीसरा पग डाले इस महाबली ब्रह्माण्ड से समस्त बल को नियन्त्रित कर रहा है ।

यज्ञ तो महाबलि भवंरधाराओं ने प्रारम्भ किया था, पर उस पर नियन्त्रण इस वामनावतार का हो गया। हमने तीन बिन्दुओं से परमाणु वामनावतार को जाना यह शक्ति रूपा, आधागौरी , की बाल्यावस्था है। इसका नाभिक विष्णु का बालरूप है।मूल तत्त्व को खींच- खींचकर यह नन्हा परमाणु अपना विस्तार करता है।
अब यह परमाणु या वामनावतार पांच बिन्दुओं का है इन पांचों से पांच प्रकार की आदि ऊर्जा तरंगें निकलती है।
  • १-महामाया= आकाश= पार्वती
  • २-गन्धर्व= सरस्वती= नाद= वायु
  • ३-नाभिक= सुर्य=अग्नि= विष्णु
  • ४- दुर्गा= जल= ब्रह्मा
  • ५- काली= पृथ्वी=कामदेव
ऊपर दिये गये नाम केवल नाम नही है ये गुणो पर आधारित नाम है बिन्दु १ से जो तरंगें उत्पन्न होती है, वह आकार का निर्माण करती है इसलिए इसे "आकाश तत्व" कहा गया है बिन्दू २ की तरंगों से पदार्थ नें गैसीय गुण आते है, इसलिए. इन्हें वा यू तत्त्व कहा गया है बिन्दू ३ से अग्नि, अर्थात प्राण अग्नि निकलती है बिन्दू ४ पर से तरलीय गुण आते है और बिन्दू से ठोसत्व से गुण उत्पन्न होते है।

इन्हीं पांचों को प्राचीन युग मे पंच तत्त्व कहा जाता है! ये मूल तत्त्व ( उपनिषदों के तत्त्व) के बाद की आदि तरंगें है । इसलिए इन्हे " तत्त्व " लगाकर व्यक्त किया गया है ।तत्त्व का अर्थ सार है। आत्मा का भी यहीं अर्थ है।

वस्तुतः ये पांच तत्त्व पांचप्रकार की ऊर्जा तरंगें है, जो पदार्थ मे पांच गुण उत्पन्न करती है जैसे- आकार(आकाश), गैसीयगुण (वायु) तरलीय गुण(जल), ठोस तत्व (पृथ्वी) एवं ताप (अग्नि)।

आधुनिक युग मे इसे पृथ्वी ग्रह , आग, पानी और आकाश मान लिया । वायु सा अर्थ वायुमंडलीय वायु से ले लिया और इन्होंने जो आलोचनाएँ की है, उसके बारे मे आप जानते है सम्भवतः ऐसी ही स्थिति के लिए कहा गया है ये ही लोग कहते है कि पदार्थ की तीन अवस्था होती है, इन्हें यह नही मालुम किये क्यो होती है ये "ताप" को उसका कारण मानने, परन्तु यह सभी पदार्थों पर एक सा प्रभावी नही है कुछ सीधे गैस बन जाते है विज्ञान में अपवादात्मक स्थिति हो तो वह नियम या सिद्धान्त ही गलत होता है।
परन्तु अपनी बुद्धि हीनता का कौन स्वीकार करता है।

अशोक वशिष्ट


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