भ्रष्ट निलंबित अधिकारियों का पिछले रास्ते से प्रवेश: सुलगते सवाल

भ्रष्ट निलंबित अधिकारियों का पिछले रास्ते से प्रवेश: सुलगते सवाल

देश में अधिकारियों का भ्रष्टाचार के मामलों में निलंबित होना नई बात नहीं है|  लेकिन हम देखते हैं कि ऐसे मामलों में अधिकारी कब बहाल हो जाते हैं पता ही नहीं चलता|

भ्रष्टाचार देश की एक बड़ी समस्या है|भ्रष्टाचार ऐसी योजनाओं में भी हो जाता है जहां पर एक आम इंसान को इसमें आटे में नमक करने में भी खौफ आ सकता है,  आखिर गरीब बच्चों के पोषण आहार में कैसे अपना नमक तलाशें,  लेकिन तृष्णा अंतरात्मा को दबा देती है|

आम और गरीब लोगों की थाली में से पैसा चुराने वाले अधिकारी कई बार एक्सपोज हो जाते हैं सरकारें इन्हें अपनी साख बचाने के लिए निलंबित कर देती है|  लेकिन सरकारों का दोहरा चरित्र तब दिखाई देता है जब वह इन्हें बहाल कर देती हैं|

मध्य प्रदेश सहित तमाम राज्यों में ऐसे कई मामले सामने आए जब हमने देखा कि अधिकारियों के भ्रष्टाचार के मामले उजागर होते ही सरकारों ने तुरंत सख्त ऐक्शन लेने का दावा किया|

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एक्शन हुआ भी अधिकारी दंडित हुए, निलंबित हुए और पेपरों में खबरें छप गई|

कुछ माह पहले सीबीआई ने जम्मू-कश्मीर कैडर के एक आईएएस अधिकारी राजीव रंजन को गिरफ्तार किया था|  राजीव रंजन को अवैध हथियार लाइसेंस बांटे जाने के घोटाले में गिरफ्तार किया गया था|  लेकिन 2021 आते-आते उनकी सेवाएं कब बहाल हो गई पता ही नहीं चला|

केरल कैडर के एक आईएएस अधिकारी श्रीराम वेंकटरमण पर आरोप लगा कि उन्होंने नशे में गाड़ी चलाते हुए एक पत्रकार को बुरी तरह पीटा बाद में वह निलंबित कर दिए गए और 2020 में बहाल हो गए सरकार ने उन्हें संयुक्त स्वास्थ्य सचिव भी बना दिया|

यह सिर्फ दो तीन उदाहरण नहीं है बल्कि ऐसे अनेक उदाहरण हैं जिनमें निलंबित अधिकारियों को बहाल कर दिया गया हालांकि यह वह अधिकारी थे जिनके मामले देश में सुर्खियों का सबब बने थे|

ऐसे मामलों में सरकारों ने जो दलीले दी वह गले से नहीं उतरती|

अधिकारियों के सस्पेंशन गंभीर किस्म के मामलों में ही होते हैं लेकिन इसके बावजूद भी सरकारें उन्हें बचाने में सक्रिय भूमिका निभाती है|

दरअसल इसके पीछे कुछ आईएस या राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के संगठन भी होते हैं|

ऐसे अधिकारियों को उनकी लॉबी बचा ले जाती है|

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इस तरह के मामलों में राज्य सरकार अधिकारियों को बहाल करने में देर नहीं लगाती बस उन्हें इंतजार होता है सही मौके का|  कहा तो यह भी जाता है कि सस्पेंशन तो सिर्फ दिखावे के लिए होता है उस अधिकारी को पहले ही बता दिया जाता है कि उसे जल्द ही बहाल कर दिया जाएगा, सरकार को नाक बचानी है इसलिए उसे निलंबित किया जा रहा है|

छत्तीसगढ़ के एक आईएएस अधिकारी बाबूलाल अग्रवाल को एक बड़े भ्रष्टाचार के घोटाले में सस्पेंड कर दिया गया था लेकिन बाद में उन्हें बहाल कर दिया गया और वह सचिव तक बनाए गए|

यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी प्रदीप शुक्ला को ₹5000 करोड़ के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन घोटाले में सस्पेंड कर दिया गया था उन्हें जेल भी जाने जाना पड़ा लेकिन उन्हें रिहा कर दिया गया और 2015 में उन्हें बहाल कर दिया गया|

दरअसल ऐसे अधिकारियों को राजनैतिक आकाओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है| यह अधिकारी अपनी सेवा के दौरान ऐसी लाइन बना लेते हैं जिनके आधार पर उन्हें एक प्रोटेक्शन मिल जाता है|

अनुशासनहीनता भ्रष्टाचार और कदाचार के लिए सरकारों के पास कोई ठोस रवैया नहीं होता|  क्योंकि सरकार में बैठे लोग खुद भ्रष्टाचार में लिप्त रहते हैं इसलिए वह सिर्फ दिखावे के लिए एक्शन लेते हैं|

सरकार के जिम्मेदारों को मालूम होता है कि अधिकारी तो सिर्फ मोहरा होते हैं इशारा तो उनका ही चलता | इसलिए ऐसे अधिकारियों को बचाना और बहाल करना उनकी जिम्मेदारी और कर्तव्य हो जाता है|

प्रशासनिक अमले में भले ही एक दूसरे को बहुत ज्यादा सहानुभूति की नजरों से ना देखा जाते हो, लेकिन भ्रष्टाचार एक ऐसा सिस्टम है जिसमें अपने मातहत को बचाना परम 
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धर्म है, यही रीति है|

भ्रष्टाचारियों को बचाना कोई बड़ी बात नहीं है|  जब सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का| आपके हाथ में भ्रष्टाचार का पैसा भी है तब भी आप कह सकते हैं कि जबरन रखा गया|

कई बार सरकार 50% वेतन और गुजारा भत्ता देने की बजाय उस अधिकारी का उपयोग करने में भी रुचि दिखाती है यह भी एक तर्क होता है कि बैठाकर तनख्वाह देने से अच्छा है कुछ जिम्मेदारी दी जाए और उस अधिकारी का उपयोग किया जाए|

नैसर्गिक न्याय का सिद्धांत ये कहता है कि ऐसे अधिकारियों के मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो|  निर्दोष को फसाया ना जाए लेकिन दोषी को बख्शा ना जाए|

 

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