नहीं माने महाराज, नाराजगी बरकरार, अब दिल्ली में फैसला: दिनेश निगम ‘त्यागी’

नहीं माने महाराज, नाराजगी बरकरार, अब दिल्ली में फैसला

दिनेश निगम ‘त्यागी’
dinesh NIGAM tyagiभाजपा की प्रदेश कार्यसमिति में समर्थकों को लेकर महाराज अर्थात ज्योतिरादित्य सिंधिया को संतुष्ट करने का दांव बेकार चला गया। वे नहीं माने। उनकी नाराजगी बरकरार है। लिहाजा, सिंधिया भोपाल का तूफानी दौरा कर चंबल-ग्वालियर अंचल के लिए निकल गए। भोपाल में उन्होंने निर्णय लेने में निर्णायक माने जाने वाले लगभग हर प्रमुख नेता से मुलाकात की। उनके साथ मैराथन बैठकें हुर्इं। बावजूद इसके सिंधिया संतुष्ट नहीं हुए। उनके आने से पहले की रात भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्यों की सूची जारी कर पार्टी नेतृत्व ने उन्हें संतुष्ट करने की कोशिश की थी। सिंधिया के ज्यादातर समर्थकों को इसमें जगह दी गई, लेकिन इतने में वे राजी नहीं। बैठकों में उन्होंने कहा कि हम सर्मथकों को कार्यसमिति सदस्य नहीं, संगठन में पदाधिकारी बनाने की मांग कर रहे थे। सरकार बनने के दौरान जो वायदे किए गए थे, उन पर अमल चाहते हैं। सिंधिया बता गए कि उप चुनाव हारे पूर्व मंत्रियों इमरती देवी, गिर्राज दंडोतिया एवं एंदल सिंह कंसाना के लिए सरकार में जगह चाहिए। जो कांग्रेस में पदाधिकारी थे, उन्हें संगठन में पद मिलना चाहिए। भाजपा में आए जो अन्य विधायक उप चुनाव हार गए हैं, उन्हें भी एडजस्ट किया जाना चाहिए। साफ है कि भाजपा और सिंधिया के बीच मसला सुलझा नहीं, अब भी फंसा है। अब केंद्रीय नेतृत्व को ही दखल देना होगा।

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वीडी के घर, सीएम हाउस में मुद्दों पर बात

ज्योतिरादित्य का एक दिवसीय दौरा बहुत व्यस्त था। उन्होंने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा के घर लंच लिया तो पीडब्ल्यूडी मंत्री गोपाल भार्गव के यहां रात का डिनर। वे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिले संघ कार्यालय जाकर दीपक विस्पुते से चर्चा की और नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह से भी। कोरोना से मृतकों के कुछ परिजनों से मिलने वे उनके घर भी गए लेकिन मुद्दों पर उनकी बात वीडी शर्मा के घर एवं सीएम हाउस में ही हुई। वीडी से उनके घर में उन्होंने प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत, सह संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा से चर्चा की और बाद में इनकी उपस्थिति में सीएम हाउस में शिवराज सिंह से मुद्दों पर बात हुई।

वादों पर अमल चाहते हैं सिंधिया

वीडी और शिवराज के निवास में चर्चा का नतीजा क्या निकला, यह जानकारी तो नहीं मिली, अलबत्ता सूत्रों ने बताया कि सिंधिया चाहते हैं कि सरकार बनाते समय जो वादे हुए थे, उन पर अमल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुझे कुछ मिले या न मिले लेकिन मेरे साथ आए समर्थकों का भरोसा नहीं टूटना चाहिए। सिंधिया का कहना था कि कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे तीन नेता इमरती देवी, गिर्राज दंडोतिया एवं एंदल सिंह कंसाना उप चुनाव हार गए। इसमें उनकी गलती नहीं। उन्हें बहुत पहले निगम-मंडलों में जगह दे दी जाना चाहिए थी, जिस तरह प्रद्युम्न सिंह लोधी एवं राहुल लोधी को दी गई थी। ज्योतिरादित्य मंत्रिमंडल में एक-दो विधायकों के लिए और जगह चाहते हैं।

आश्वासन दिया लेकिन निर्णय आसान नहीं

भाजपा नेतृत्व को उम्मीद नहीं थी कि प्रदेश कार्यसमिति में अधिकांश समर्थकों को जगह देने के बाद सिंधिया इस तरह दबाव बनाएंगे। फिर भी आश्वासन दिया गया कि उनके प्रस्तावों पर शीघ्र विचार कर निर्णय लिया जाएगा। संभव है, जल्दी ही कुछ सिंधिया समर्थकों को निगम - मंडलों में जगह देकर मंत्री पद का दर्जा दे दिया जाए। हालांकि यह इतना आसान नहीं रहा। केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप के बिना यह संभव नहीं लगता क्योंकि भाजपा के कई बड़े नेता सिंधिया समर्थकों को सरकार - संगठन में और ज्यादा हिस्सेदारी के खिलाफ हैं। इसी को लेकर पिछले दिनों इन बड़े नेताओं के बीच मेलमिलाप का दौर चला था। ये चाहते हैं कि अब पार्टी के निष्ठावान नेताओं को उपकृत होना चाहिए। ऐसे में अब सिंधिया की चलती है या भाजपा के नेता उन्हें रोक पाते हैं, यह आने वाला समय बताएगा।

Priyam Mishra



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