रावण (ravan) में भी थे अनेक गुण

रावण(ravan) में भी थे अनेक गुण

रावण

रावण(ravan) के गुण :-

रावण(ravan) को चारों वेदों का ज्ञाता कहा गया है। संगीत के क्षेत्र में भी रावण(ravan) की विद्वता अपने समय में अद्वितीय मानी जाती है। वीणा बजाने में रावण(ravan) सिद्धहस्त था। उसने एक वाद्य बनाया भी था जिसे जो आज के बेला या वायलिन का ही मूल और प्रारम्भिक रूप है जिसे अब रावण हत्था कहा जाता है।रामकथा में रावण(ravan) ऐसा पात्र है, जो राम के उज्ज्वल चरित्र को उभारने काम करता है। रावण में अनेक गुण भी थे।
वह एक कुशल राजनीतिज्ञ , महापराक्रमी , अत्यन्त बलशाली , अनेकों शास्त्रों का ज्ञाता प्रकान्ड विद्वान पंडित एवं महाज्ञानी था। रावण(ravan) के शासन काल में लंका का वैभव अपने चरम पर था इसलिये उसकी लंकानगरी को सोने की लंका अथवा सोने की नगरी भी कहा जाता है। रावण एक कुशल राजनीतिज्ञ, सेनापति और वास्तुकला का मर्मज्ञ होने के साथ-साथ ब्रह्मज्ञानी तथा बहु-विद्याओं का जानकार था। उसे मायावी इसलिए कहा जाता था कि वह इंद्रजाल, तंत्र, सम्मोहन और तरह-तरह के जादू जानता था। उसके पास एक ऐसा विमान था, जो अन्य किसी के पास नहीं था। इन सभी के कारण सभी उससे भयभीत रहते थे। ब्रह्माजी के पुत्र पुलस्त्य ऋषि हुए। उनका पुत्र विश्रवा हुआ। विश्रवा की पहली पत्नी भारद्वाज की पुत्री देवांगना थी जिसका पुत्र कुबेर था। विश्रवा की दूसरी पत्नी दैत्यराज सुमाली की पुत्री कैकसी थी जिसकी संतानें रावण, कुंभकर्ण और विभीषण थीं।
रावण (ravan)बुरा बना तो सचमुच में ही प्रभु श्रीराम की इच्‍छा से। होइए वही जो राम रचि राखा। एक बुराई उसकी सारी अच्छाइयों पर पानी फेर देती है । विद्वान और प्रकांड पंडित होने से अच्छे साबित नहीं हो जाते। अच्छा होने के लिए नैतिक बल का होना जरूरी है। कर्मों का शुद्ध होना जरूरी है। शिव का परम भक्त, यम और सूर्य तक को अपना प्रताप झेलने के लिए विवश कर देने वाला, प्रकांड विद्वान, सभी जातियों को समान मानते हुए भेदभावरहित रक्ष समाज की स्थापना करने वाला रावण आज बुराई का प्रतीक माना जाता है इसलिए कि उसने दूसरे की स्त्री का हरण किया था।

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राधेश्याम द्विवेदी


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