प्रदेश में बाघों की मृत्यु रोकने टाइगर सेल की बैठक हुई


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स्टोरी हाइलाइट्स

बैठक में बाघों के अलावा, तेंदुआ, हाथी एवं अन्य वन्यजीवों को उत्पन्न संकट पर भी चर्चा की गयी..!!

भोपाल:भोपाल स्थित वन भवन में बुधवार को राज्य में बाघों की मृत्यु रोकने के संबंध में टाइगर सेल की बैठक विशेष पुलिस महानिदेशक एसटीएफ की अध्यक्षता एवं एपीसीसीएफ (वन्यजीव) की सहअध्यक्षता में हुई। बैठक में विभिन्न कानून प्रवर्तन संस्थाओं जैसे वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, संचालनालय लोक अभियोजन, रेल्वे सुरक्षा बल, शासकीय रेल पुलिस, सायबर पुलिस, डीआरआई, सीबीआई, कस्टम, इंटेलिजेन्स ब्यूरो, वाइल्ड लाईफ फॉरेन्सिक एवं हेल्थ, एनएफएसयू, एनटीसीए, स्टेट फॉरेन्सिक साइन्स लेबोरेटरी भोपाल व सागर, प्रवर्तन निर्देशालय, राज्य विधुत वितरण कंपनी, समस्त टाइगर रिजर्व मध्यप्रदेश व स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्यप्रदेश के प्रतिनिधि उपस्थित हुये। बैठक में बाघों के अलावा, तेंदुआ, हाथी एवं अन्य वन्यजीवों को उत्पन्न संकट पर भी चर्चा की गयी। 

विगत वर्षों में बाघ, तेंदुआ की संख्या में बढ़ोतरी एवं विभिन्न प्रकार की दुर्घटनाओं (शिकार, सडक़ दुर्घटना, रेल दुर्घटना एवं बिजली के करंट से मृत्यु) में इनकी मृत्यु की जानकारी साझा की गयी। इन घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने हेतु सभी संबंधित विभागों ने सहमति दी। बैठक में राज्य स्तरीय, संभागीय एवं जिला स्तर पर स्टेट टाइगर सेल को प्रभावी बनाने एवं पुनर्गठन हेतु राजस्व विभाग को भी शामिल किये जाने पर चर्चा की गई। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में मप्र में 55 बाघों की मृत्यु हुई। इनमें प्राकृतिक कारणों से 38 बाघों की मृत्य हुई, जो कुल मौतों का 69 प्रतिशत है। इनमें आपसी संघर्ष, बीमारी, वृद्धावस्था, दुर्घटनाएं, रेल और सडक़ हादसे शामिल हैं। शिकार से 11 बाघों की मृत्यु हुई है, जो कुल मृत्यु संख्या का 20 प्रतिशत है। इनमें से अधिकांश मामलों में विद्युत करंट के उपयोग की पुष्टि हुई।