ओशो की जीवन यात्रा : रजनीश की लाइफ के बारे में वो सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं |

दुनिया के सबसे विवादित गुरु भगवान रजनीश का जन्म भोपाल के नजदीक हुआ था ,11 दिसंबर, 1931 को मध्य प्रदेश के रायसेन शहर के कुचवाड़ा गांव में ओशो का जन्म हुआ था. जन्म के वक्त उनका नाम चंद्रमोहन जैन था.

ओशो के पिता का नाम बाबूलाल जैन और माता का नाम सरस्वती जैन था जो तारणपंथी दिगंबर जैन थे

7 वर्ष की उम्र तक वे अपने ननिहाल में रहे, ओशो के स्वयं के अनुसार उनके विकास में इसका प्रमुख योगदान रहा क्योंकि उनकी नानी ने उन्हें संपूर्ण स्वतंत्रता, उन्मुक्तता तथा रुढ़िवादी शिक्षाओं से दूर रखा। जब वे 7 वर्ष के थे तब उनके नाना का निधन हो गया और वे गाडरवारा अपने माता पिता के साथ रहने चले गए।

वे शासकीय आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पढा करते थे, स्कूल में ओशो  एक परम बौधिक और विद्रोही छात्र के रूप में सामने आये जो दो राष्ट्रीय संघटनों इंडियन नेशनल आर्मी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए थे लेकिन कुछ दिनों में ही उन्होंने इनकी सदस्यता त्याग दी |

1953 में 21 वर्ष की आयु में ओशो को मौलश्री वृक्ष के नीचे प्रबोध प्राप्त हुआ, उन्होंने सागर विश्वविद्यालय से दर्शन में स्नातक और स्नातकोत्तर की उपाधि ली, उसके बाद वो रामपुर संस्कृत कॉलेज और जबलपुर विश्वविद्यालय में दर्शन शास्त्र पढ़ाने लगे | इसी दौरान उन्होंने पुरे देश का भ्रमण किया और गांधी व् समाजवाद पर भाषण दिया, और वह आचार्य रजनीश के नाम से अपनी पहचान स्थापित कर चुके थे।

1962 में उनका पहला ध्यान शिविर आयोजित हुआ, दो वर्ष बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और ध्यान के मार्ग पर चल दिए|Image result for osho

जून 1964 में पहली बार ओशो के प्रवचनों को रिकॉर्ड किया गया और किताब में भी छापा गया जिसका नाम “Path to Self-Realization” था वे दर्शनशास्त्र के अध्यापक थे। उनके द्वारा समाजवाद, महात्मा गाँधी की विचारधारा तथा संस्थागत धर्म पर की गई अलोचनाओं ने उन्हें विवादास्पद बना दिया। वे मानव कामुकता के प्रति स्वतंत्र दृष्टिकोण के भी हिमायती थे जिसकी वजह से उन्हें कई भारतीय और फिर विदेशी पत्रिकाओ में “सेक्स गुरु” के नाम से भी संबोधित किया गया

1969 में  ओशो के शिष्यों ने मुंबई में उनके नाम पर एक फाउंडेशन बनाया | बाद में उसे पुणे के कोरेगांव पार्क में स्थानांतरित कर दिया गया | वह स्थान “OSHO International Meditation Resort ” के नाम से जाना जाता है | 1971 में उन्हें भगवान श्री रजनीश  कहा जाने लगा था |

1971 से 1974 तक उन्होंने अपना जीवन पुणे आश्रम  में बिताया जहा ओशो प्रत्येक सुबह 90 मिनट का प्रवचन देते थे|
पुणे आने के बाद  ओशो के आश्रम में  विदेशियों की संख्या बढ़ने लगी,  तत्कालीन जनता पार्टी सरकार के साथ मतभेद के बाद 1980 में ओशो “अमेरिका” चले गए और वहां ओरेगॉन, संयुक्त राज्य की वास्को काउंटी में रजनीशपुरम की स्थापना की।

1985 में इस आश्रम में मास फ़ूड पॉइज़निंग की घटना के बाद उन्हें संयुक्त राज्य से निर्वासित कर दिया गया. अन्य देशों से ठुकराया जाने के बाद वे वापस भारत लौटे और पुणे के अपने आश्रम में अपने जीवन के अंतिम दिन बिताये।


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वर्ष की आयु में वो इस दुनिया से चले गये | पुणे स्थित उनकी समाधि पर लिखी इस बात से ओशो की अहमियत का अंदाजा लगाया जा सकता है, “Never Born -Never Died-Only Visited This Planet Earth Between -11 December 1931 – 19 January 1990 ” “ना जन्म हुआ और ना म्रत्यु हुयी केवल 11 दिसम्बर 1931 से 19 जनवरी 1990 तक पृथ्वी पर भ्रमण किया|

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