दोगुना बढ़ा बच्चों का स्क्रीन टाइम – अभिभावक हो जाएँ सावधान : मनोरोगी बन सकता है बच्चा

हाल ही में हुए एक सर्व मैं 3 से 5 साल के बच्चे के स्क्रीन के सामने ज्यादा समय बिताना उनकी मानसिक विकास में बाधा बनता है , डब्ल्यूएचओ ने चिंता जताते हुए इस विषय पर गाइडलाइन जारी की है | पिछले 4 सालों में स्क्रीन पर गुजारे जाने वाले बच्चों के समय...

यदि आपका बच्चा टीवी और मोबाइल देखता है तो सावधान हो जाएँ  3 से 5 साल के बच्चे के स्क्रीन के सामने ज्यादा समय बिताना उनकी मानसिक विकास में बाधा बनता है,डब्ल्यूएचओ ने चिंता जताते हुए इस विषय पर गाइडलाइन जारी की है |

पिछले 4 सालों में स्क्रीन पर गुजारे जाने वाले बच्चों के समय में दोगुना इजाफा हुआ है, 8 से 12 साल के बीच के बच्चे रोजाना औसतन 4 घंटे 44 मिनट स्क्रीनपर रहते हैं, वही टीनएजर्स की बात की जाए तो 13 से 18 साल तक के बच्चे लगभग  7 घंटे 22 मिनट स्क्रीन पर गुजारते हैं , इनमें ज्यादातर बच्चे स्क्रीन पर वीडियो देखते हैं, स्कूल के होमवर्क के बाद से उनका समय स्क्रीन पर ही गुजरता है |

कॉमन सेंस मीडिया की ओर से यह  सर्वे रिपोर्ट जारी की गई  है | 11 साल की उम्र तक 53% बच्चों का अपना मोबाइल होता है 12 साल की उम्र में यह प्रतिशत, 69% तक पहुंच जाता है, हालांकि यह सर्व अमेरिकी बच्चों पर किया गया है,

इस बात पर बाकायदा गाइडलाइन जारी हुई है,  वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन ने साफ शब्दों में कहा है कि 1 साल की उम्र तक बच्चों को पलभर के लिए भी स्क्रीन के सामने नहीं आने दे, 1 साल से 2 साल की उम्र तक कुछ मिनटों के लिए बच्चे टीवी मोबाइल देख सकते हैं, 3 से 4 साल तक के
बच्चे 1 घंटे तक टीवी देख सकते हैं, संस्था ने बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी  बढ़ाने  की वकालत की और कहा कि 5
साल से कम और उनके बच्चे स्क्रीन पर अधिक समय गुजारते हैं तो उनका फिजिकल एक्टिविटी लेवल कम हो जाता है , और उन्हें कई तरह के रोगों की आशंका होती है |

न्यूज़ पुराण कि सलाह

अगर आप अपने बच्चों को इन मुसीबतों से दूर रखना चाहते हैं, तो इन 8 तरीकों को अपनाकर आप उन्हें टीवी, मोबाइल से दूर रख सकते हैं।

बच्चों को सबसे ज्यादा मां-बाप के प्यार और देखभाल की जरूरत होती है। ऐसे में जरूरी है कि आप बच्चे के साथ अधिक से अधिक समय बिताएं, इससे आपका बच्चा मोबाइल का इस्तेमाल धीरे-धीरे बंद कर देगा।

खाली समय में बच्चे की कैपिसिटी के अनुसार घरेलू कामों में उसका सहयोग लें, इससे बच्चा आत्मनिर्भर बनेगा और कुछ व्यवहारिक चीजें भी सीखेगा।

शौक के हिसाब से बच्चे को पेंटिंग, डांस, म्यूजिक व अन्य क्लासेज जॉइन करा सकते हैं।

बच्चे को नेचर की तरफ आकर्षित करें और उन्हें आउटडोर गेम्स के लिए भी प्रोत्साहित कर सकते हैं।

अपने बच्चे को ऐसा टास्क देते रहें, जिससे उसकी रचनात्मक क्षमता का विकास हो।

बच्चे को मोबाइल की जगह कोई पालतू पशु लाकर दें, इससे बच्चे आपस में बातचीत करना और इमोशंस को जाहिर करना सीख सकते हैं।

अगर आपका बच्चा बहुत जिद्दी है और आसानी से नहीं मान रहा, तो आप एक ऐप की मदद से भी उसकी मोबाइल की लत छुड़ा सकते हैं। गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद Cracked Screen Pranked  नाम का ऐप डाउनलोड करें। इस ऐप में स्क्रीन क्रैक्ड की टाइमिंग सेट कर दें। इससे आपके मोबाइल की स्क्रीन क्रैक्ड नजर आएगी और बच्चा उसे छोड़ देगा।

इसके अलावा आप भी बच्चों के सामने ज्यादा मोबाइल यूज न करें। दरअसल बच्चे जब देखते हैं कि अधिकतर समय मेरे पैरंट्स मोबाइल में उलझे रहते हैं, तो उन्हें लगता है कि शायद मोबाइल मनोरंजन का सबसे बड़ा साधन है, इसलिए वह भी मोबाइल में खोने लगते हैं।

न करें ये गलती

अक्सर देखने में आता है कि मां-बाप अपने बच्चों से कहते हैं कि अगर तुम जल्दी से अपना होमवर्क (या कुछ अन्य काम) कर लोगे तो तुम्हें मोबाइल देंगे। इससे बच्चा सारा ध्यान मोबाइल पर लगा देता है। वह मोबाइल के लालच में काम जल्दी जल्दी कर लेता है, लेकिन बाद में मोबाइल न मिले तो बच्चे में मां-बाप के प्रति नकारात्मक भावना का विकास होने लगता है। इसलिए ऐसी बातों से बचें।

NEWS PURAN DESK

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