प्राणपुर और पोचमपल्ली, ग्रामीण पर्यटन के दो बड़े केंद्र...


स्टोरी हाइलाइट्स

कई हजार वर्षों से भारत की पहचान कपड़ा बुनाई की वजह से है। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की सभ्यता के समय से भारत में कपास और कपड़े को बनाने का काम चल रहा है। 

भारत वास्तव में गांवों की धरती के रूप में विख्यात है। वास्तविक भारत की असल तस्वीर अगर देखनी है तो हमें गांवों को भीतर तक देखना होगा। वो भी 'ग्रामीण पर्यटन के जरिए। हमारे देश में कपड़ा बुनाई की परंपरा बहुत पुरानी है। प्राणपुर और पोचमपल्ली को पर्यटन के बनाकर इसी विरासत को सहेजा गया है।

कई हजार वर्षों से भारत की पहचान कपड़ा बुनाई की वजह से है। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की सभ्यता के समय से भारत में कपास और कपड़े को बनाने का काम चल रहा है। 

मिस्र के फ्रोस्त स्थित मकबरे में मिला कपड़ा गुजरात में बुने कपड़े का प्रतिरूप जान पड़ा है। इससे पता चलता है कि भारत और मिस्र के बीच कपड़े का व्यापार होता था। 

भारत में कृषि उद्योग के बाद कपड़ा बुनाई के काम से ही सबसे अधिक लोग जुड़े हुए हैं। यही वजह है की भारत में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। भारत के कपड़ा बुनाई स्थानों में सबसे पहले प्राणपुर और पोचमपल्ली के इक्कत कपड़ा बुनाई केंद्र का नाम आता है.

प्राणपुर (चंदेरी): बड़ा कपड़ा, बुनाई केंद्र..

मध्य प्रदेश का प्राणपुर और चंदेरी कपड़ा बुनाई के लिए जाना जाता है। बुंदेलखंड में बसा प्राणपुर चंदेरी से 3 किमी की दूरी पर है। माना जाता है कि सन् 1350 में कोसती समुदाय के बुनकर झांसी से यहां आकर बसे थे और मुगल शासन के समय चंदेरी में कपड़ा बुनाई चरम पर थी। 

सरकार ने प्राणपुर को ग्रामीण पर्यटन स्थल घोषित किया। जहां आप चंदेरी कपड़ा बुनाई सीख सकते हैं और ग्रामीण रहन-सहन भी समझ सकते हैं। प्राणपुर हरियाली भरा शांत गांव है। जहां आप विशाल बजलहरि बावड़ी, जैन धर्म के अनेक मंदिर और चंदेरी संग्रहालय देख सकते हैं। यहां के पहाड़ों पर ट्रैकिंग और बसी झील में नौकायन का मजा ले सकते हैं।

पोचमपल्ली: 'सिल्क सिटी ऑफ इंडिया'

भारत का दूसरा विशेष कपड़ा बुनाई स्थान है पोचमपल्ली, जो इक्कत बुनाई के लिए जाना जाता है। तेलंगाना के पोचमपल्ली को 'सिल्क सिटी ऑफ इंडिया' भी कहा जाता है। 

यहां के सभी 5000 परिवार इक्कत कपड़ा बुनाई से जुड़े हैं। पोचमपल्ली को यूनेस्को के विश्व धरोहरों में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है। यहां के हैंडलूम पार्क जरूर जाएं, जहां इक्कत के उत्पाद बेचे जाते हैं। 

रूरल टूरिज्म कॉम्प्लेक्स में बुनाई संग्रहालय है, जहां स्थानीय नाट्य कला का प्रदर्शन भी होता है। पोचमपल्ली की पाम वाइन और ताड़कल्पसम जो कि चावल के आटे, दूध और गुड़ से बना मिश्रण है, जरूर टेस्ट करें। यहां वेंकटेश्वर पद्मावती मंदि, दरवाजा हवेली और बसावलिंगेश्वर मंदिर भी देखने लायक।


 

पुराण डेस्क

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