भोपाल। वन मुख्यालय में पीसीसीएफ और एपीसीसीएफ के बीच एक पत्र विवादों की सुर्खियों में है। यह पत्र इसलिए विवादों में है क्योंकि पीपीसीएफ कैंपा मनोज अग्रवाल ने अपने स्टेनो के बताने पर ही पीसीसीएफ अनुसंधान एवं विस्तार को दिशा-निर्देश भेज दिया। इस पत्र को प्रोटोकॉल और स्थापित परंपरा के विपरीत माना जा रहा है।
हालांकि पत्र 15 दिन पुराना है पर मुख्यालय में पदस्थ लंच टाइम में पीसीसीएफ और एपीसीसीएफ के बीच पीसीसीएफ मनोज अग्रवाल के पत्र पर टीका-टिप्पणी आज भी जारी है। टी क्लब में चर्चा इस बात पर हो रही है कि अग्रवाल को हो क्या गया.... कि स्टेनो के बताने पर अपने सीनियर 1992 बैच के पीसीसीएफ को पत्र लिख दिया...! शीर्ष अफसरों में चर्चा इस बात हो रही है कि क्या कैम्पा का स्टेनो नितिन माथुर शासकीय दौरे पर डिंडोरी गया था? जिसने अपने पीसीसीएफ अग्रवाल को बताया कि डिंडोरी रोपणी में सुधारात्मक कार्य की आवश्यकता है। स्टेनो के बताने पर ही मनोज अग्रवाल ने पुष्टि किए बिना ही सीधे पीसीसीएफ अनुसंधान विस्तार को पत्र लिख दिया।
1993 बैच के आईएफएस मनोज अग्रवाल को लेकर बिरादरी में या अवधारणा बन गई है कि वे जिस शाखा में पदस्थ होते है उसे बाकी शाखाओं पर विशेष रूचि लेते है। इसके पहले उन्होंने पीसीसीएफ संरक्षण को पत्र लिखा था। जब उनके इस पत्र को संरक्षण शाखा से उन्हीं की भाषा में जवाब दिया तो इसकी शिकायत एसीएस तक पहुंच गई थी। वर्तमान में पीसीसीएफ मनोज अग्रवाल के पास कैम्पा और कार्य योजना जैसे महत्वपूर्ण काम है। कैंपा शाखा में बीती गड़बड़ियों और वनीकरण क्षतिपूर्ति घोटाले की सबसे अधिक शिकायतें हैं। उन शिकायतों का निराकरण करने के बजाय वे अनुसंधान विस्तार, संरक्षण और अन्य शाखाओं की कार्यशैली पर अधिक ध्यान देते हैं। दिलचस्प पहलू यह है कि प्रदेश में सबसे अधिक अवैध कटाई तब हुई जब अग्रवाल के पास संरक्षण शाखा का प्रभार था। होशंगाबाद वन मंडल के छिपी खापा बीच में ढाई करोड़ की कटाई का मामला इन्हीं के कार्यकाल में प्रकाश में आया था।
इनका कहना
इस संबंध में मुझे जानकारी नहीं हैं। मैं चर्चा नहीं कर करूंगा।
विभाष ठाकुर, पीसीसीएफ अनुसंधान एवं विस्तार
गणेश पाण्डेय