एमपी सरकार की कैबिनेट ने सरकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति जानने के लिए सीएम यंग इंटर्न फॉर गुड गवर्नेंस कार्यक्रम मंजूर किया है. इसके तहत तीन साल के लिए हर ब्लॉक में पंद्रह युवा चुने जाएंगे. इन युवाओं को माह में दस हज़ार मानदेय मिलेगा..!!
योजना की मंशा यह है कि यह युवा गुड गवर्नेंस के लिए जमीन से सरकार को फीडबैक देंगे यह फीडबैक विशेष पोर्ट ल पर दिया जाएगा. आइडिया अच्छा है नया नहीं है. इसके पहले के मुख्यमंत्री भी अलग-अलग नाम से कई बार ऐसी योजनाएं लांच कर चुके हैं. कभी आइडिया फॉर सीएम, कभी सीएम फेलोशिप, कभी मुख्यमंत्री मित्र योजना, सीखो कमाओ के नाम पर ईवेंट किए गए. अब फिर से नए नाम से युवाओं के लिए योजना आई है.
पहले भी ऐसी योजना अटल बिहारी वाजपेई सुशासन एवं नीति विश्लेषण स्कूल के माध्यम से लाई गई थी. अब नई योजना भी इन्हीं के द्वारा इंप्लीमेंट की जाएगी. युवाओं का चयन यही संस्थान करेगा. सरकार जो कुछ करती है, सोच- समझकर ही करती है. कोई भी प्रपोजल कैबिनेट में जाने के पहले विशेषज्ञों और सचिव, प्रमुख सचिव की कमेटियों से गुजरता है. इस स्तर पर किसी प्रस्ताव को फिजिविल और प्रैक्टिकल पाया जाता है तब कैबिनेट के समक्ष प्रस्ताव आता है.
फीडबैक पर ही शासन प्रणाली खड़ी हुई है. अगर इसे शासन प्रणाली की सांसें और चेतना कहा जाए तो गलत नहीं होगा. शासन में फीडबैक का अत्यधिक महत्व है. यह नागरिक केंद्रित, पारदर्शी और उत्तरदायी प्रशासन सुनिश्चित करता है. फीडबैक से ही नीति निर्माण, खामियों को पहचान कर उन्हें ठीक करने के साथ ही जनसेवाओं की गुणवत्ता की जवाबदेही सरकारें निभाती हैं. निर्वाचित जनप्रतिनिधि भी विधानसभाओं में जो सवाल और अलग-अलग तरह के प्रस्ताव प्रस्तुत करते हैं, वह भी एक तरीके का फीडबैक ही होता है.
मीडिया तो फीडबैक का सबसे बड़ा माध्यम कहा जा सकता है. सरकारी योजनाओं के संबंध में सरकार के दावों और जमीनी हकीकत पर अनेक बार मीडिया अपनी खबरों में तथ्य उजागर करता है. अगर मीडिया में आ रही खबरों के फीडबैक को ही शासन प्रणाली जवाबदेही से स्वीकार करे तो सुशासन में बड़ा बदलाव आ सकता है.
शासन प्रणाली फीडबैक पर ही चलती है. पंचायत से लगाकर राज्य की राजधानी तक निर्वाचित या प्रशासनिक जो भी व्यवस्था प्रभावशील है, उसमें अलग-अलग लेयर काम करते हैं. ग्राम स्तर का फीडबैक विकासखंड लेता है, तो उसके परफॉर्मेंस का फीडबैक जिले के पास जाता है. शासन के अगले क्रम में संभाग काम करते हैं. फिर मंत्रालय और कैबिनेट सर्वोपरि भूमिका निभाती है. विधानसभा की पूरी कार्यवाही भी फीडबैक का ही माध्यम है. जब पूरा शासन फीडबैक की चेतना पर ही काम करता है तो फिर योजनाओं के फीडबैक के लिए इस तरह के कार्यक्रम की उपयोगिता और सार्थकता दस हज़ार में तो साबित नहीं हो सकती.
विकास, निर्माण और योजनाओं के क्रियान्वयन में स्वतंत्र एजेंसी से इंस्पेक्शन और फीडबैक सुशासन की आधारशिला है. पीएम नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार की योजनाओं में स्वतंत्र मूल्यांकन की पद्धति को कुशलता से अपनाया है. इसी का परिणाम है कि उनकी योजनाओं के क्रियान्वयन का इंपैक्ट दिखाई पड़ता है. ऐसा पहली बार हुआ है, कि योजनाओं के हितग्राही किसी सरकार और उस पार्टी के समर्थक बन जाते हैं.
सीएम डॉक्टर मोहन यादव कॉन्सेप्ट के लेवल पर योजनाओं का स्वतंत्र फीडबैक लेने का सोच रहे हैं, तो यह बेहतर गवर्नेंस की मंशा ही लगती है. सवाल यह है कि जो योजना इसके लिए बनाई गई है क्या वह कोई प्रभाव साबित कर पाएगी. हर मुख्यमंत्री और हर सरकार फीडबैक के लिए लगभग हर साल एक अभियान चलाती है. मध्य प्रदेश में तो ग्राम संपर्क, नगर संपर्क अभियान भी चले हैं. विकास यात्राएं निकालकर भी फीडबैक लिए गए हैं. सेक्रेट्री और प्रिंसीपल सेकेट्री भी फीडबैक के लिए जिलों के प्रभारी बनाए गए. बाकायदा शासकीय योजनाओं की जमीनी हकीकत के सर्वे किए गए. ज़रुरत के मुताबिक डेवलपमेंट प्लान बनााए गए. इन सारे फीडबैक से शासन प्रणाली ही अवगत होती है. सरकार के अभियान की सफलता और असफलता का जनता के फीडबैक से तालमेल नहीं बन पाता.
जिस नौकरशाही ने इस योजना को तैयार किया है, वह ऐसा मानती है, कि दस हज़ार मानदेय पर युवा पोर्टल पर शासकीय योजना का फीडबैक दे देगा. जो लोग जमीन पर योजनाओं का क्रियान्वयन करते हैं, उनकी तनख्वाहें लाखों में हैं. उन कार्यालयों में जाकर कुछ जानना और अपनी बात पहुंचाना, अगर इतना आसान होता तो फिर इस तरह के किसी प्रयास की आवश्यकता नहीं होती. युवाओं को रोजगार चाहिए, लेकिन आज इतने मानदेय या वेतन में कौशल युक्त युवा का मिलना संभव नहीं है. डिलीवरी बॉय और ओला ऊबर के ड्राइवर भी इससे ज्यादा कमाते हैं. शासन स्वयं इससे अवगत है, कि अकुशल मजदूरों की भी कलेक्टर द्वारा निर्धारित मजदूरी मानदेय की राशि से ज्यादा है.
स्वतंत्र रूप से फीडबैक अनिवार्यता है. इसके लिए ऐसी व्यवस्था बनाने की आवश्यकता है, जो इंप्लीमेंटिंग सिस्टम से हायर ग्रेड में काम करे. फीडबैक विशेषज्ञता का काम है. इसके लिए विशेषज्ञ को हायर किया जाना चाहिए. रिटायर्ड एक्सपर्ट भी इसमें उपयोग किए जा सकते हैं. गवर्नेंस के सिस्टम को इस स्वतंत्र व्यवस्था की क्षमता और प्रभाव का भय होना चाहिए. हर विभाग में और हर शासकीय योजना में प्रचार-प्रसार के लिए बजट की व्यवस्था होती है, तो उसके क्रियान्वयन के फीडबैक का भी प्रावधान होता है.
सही सूचना गवर्नेंस की असली पावर है. सही सूचना और फीडबैक का सही और स्वतंत्र स्ट्रक्चर जरूरी है. सच सुनने और सुधारने की ईमानदारी के बिना कुछ भी बदलाव नहीं हो सकता . समाज और शासन प्रणाली में अगर गिरावट है, तो उसका सबसे बड़ा कारण कर्तव्य और जवाबदेही के प्रति बेरुखी है. डिजिटल गवर्नेंस ने इस पर थोड़ी लगाम लगाई है.
दिखावटी, सजावटी और बनावटी योजनाएं वांछित परिणाम नहीं दे सकतीं. शासन प्रणाली की जुगाली और आत्म प्रशंसा के लिए भले ही इनका कितना भी उपयोग हो.