भारत में कॉकरोच अगेंस्ट इंडिया मूवमेंट शुरु हो रहा है. कॉकरोच जनता पार्टी बनाने वाले अभिजीत दीपके अमेरिका से डिपोर्ट कर दिए गए हैं. दिल्ली पहुंचते ही आंदोलन की शुरुआत कर रहे हैं..!!
उनके प्रवक्ता बन गए हैं, जो भी चेहरे अभी सामने हैं वह सब आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं. अरविंद केजरीवाल के वालेंटियर दिखाई पड़ रहे हैं. प्रॉब्लम के सोल्यूशन के लिए आंदोलन डेमोक्रेसी की बुनियाद है, लेकिन आंदोलन के नाम पर प्रायोजित राजनीति इसका दुरुपयोग है.
कॉकरोच जनता पार्टी वर्चुअल वर्ल्ड से निकलकर मूवमेंट में उतर रही है. उसका पूरा टूल किट आम आदमी पार्टी से मिला हुआ लगता है. वक्त के साथ यह साबित भी होगा. पंजाब में अगले साल चुनाव हैं. दिल्ली की तो केजरीवाल के हाथ से सत्ता फिसल गई. पंजाब में चुनाव जीतने के लिए माहौल बनाने की शुरुआत हो गई है. अब उनकी सरकारों का जो परफॉर्मेंस रहा है, उसके बाद तो करप्शन अगेंस्ट इंडिया मूवमेंट चलाने की हिम्मत करना उनके बूते की बात नहीं है.
जिस मूवमेंट से केजरीवाल को पावर मिला, राज्यों में सरकारें बनीं, जिस अन्ना हजारे का उनको सहारा मिला, वह तो सब छूट गए हैं. करप्शन के आरोप में खुद केजरीवाल को जेल जाना पड़ा. अब मूवमेंट के टूल किट से करप्शन अगेंस्ट इंडिया की आवाज नहीं आ रही है. अब उसने कॉकरोच जनता पार्टी का नया चेहरा बना लिया है. जिसने सोशल मीडिया पर यह पार्टी बनाई उसने पहले दिन से ही कानून के विरुद्ध काम किया.
अभिजीत दीपके अमेरिका स्टूडेंट वीजा पर गए हुए थे. इसमें किसी भी राजनीतिक एक्टिविटी में कोई भी शामिल नहीं हो सकता. उनके इस इल्लीगल काम के लिए अमेरिकी एडमिनिस्ट्रेशन ने डिपोर्ट कर दिया है. जो रूल्स वायलेट करने का आदी है, वह युवाओं के लिए रूल्स फॉलो करने के आंदोलन की बात करता है. चलिए फिर भी ठीक है,उनकी नीयत पर हम शक नहीं करते हैं. वह अपने हर वीडियो में कह रहे हैं, कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री से त्यागपत्र लेना उनके आंदोलन का एजेंडा है. युवाओं के लिए जो भी समस्याएं हैं उसका समाधान उनका एजेंडा नहीं है. उनका एजेंडा राजनीतिक है.
नीट, सीबीएसई या दूसरी परीक्षाओं को लेकर जो भी सवाल हैं, उन पर सरकार ना केवल संवेदनशील दिख रही है बल्कि व्यवस्था में सुधार की तरफ भी कदम उठा रही है. नीट की आगामी परीक्षा के लिए वायु सेवा तक का उपयोग करने की बात हो रही है.
अभिजीत दीपके यह नहीं बताते हैं, कि उनकी फंडिंग कहां से हो रही है. कुछ छुपेगा नहीं सब पता लग जाएगा. करप्शन अगेंस्ट इंडिया मूवमेंट का जिस तरह से लाभ उठाया गया, राजनीतिक सत्ता बनाई गई और उसके बाद करप्शन का रिकॉर्ड बनाया गया, ऐसा ही मोटिव कॉकरोच मूवमेंट का भी लग रहा है. यह मूवमेंट युवाओं के वेलफेयर के लिए नहीं बल्कि एंटी इंडिया लगता है.
डेमोक्रेटिक स्ट्रक्चर में किसी भी सरकार को मिले जनादेश से ज्यादा उसके विरोध में ओपिनियन होता है. यह डेमोक्रेसी की एक कमजोरी है. अभी तो जो पॉलीटिकल सिचुएशन है उसमें बीजेपी वर्सेस अदर्स हो गया है. बीजेपी के विरोध में हर दल खड़ा हुआ है. विचारधारा के लेवल पर बीजेपी का विरोध है. नीतियों का कोई विरोध नहीं है. ऐसा इसलिए कहना पड़ रहा है क्योंकि नीतियों को लेकर कोई भी विकल्प किसी भी दल के नेता के द्वारा नहीं रखा गया है.
चुनावी राजनीति में सभी दल राज्य दर राज्य मात खा रहे हैं. इसलिए अब बीजेपी सरकार को अपदस्थ करने का उन्हें कोई रास्ता दिखाई नहीं पड़ रहा है. बांग्लादेश और नेपाल में Gen Z की घटनाओं से हुए बदलाव में उनको एक आशा दिखाई पड़ती है. जो इसमें अपने लिए उम्मीद देख रहे हैं, वह शायद यह भूल रहे हैं कि इन दोनों देशों में सबसे ज्यादा हमला विपक्षी राजनीति के नेताओं पर हुआ है. बीजेपी की सरकार तो एक दशक से है. जो दल कई दशकों तक देश में सरकार चलाने के लिए जिम्मेदार है. बीजेपी का केंद्र में आना ही साबित कर रहा है कि जनादेश में बाकी दलों के खिलाफ़ आक्रोश है. इसको भड़काने के लिए कोशिश की जाएगी तो उसका पहला खामियाजा उन्हीं नेताओं को भुगतना पड़ेगा जो इसको भड़काने में लगे हुए हैं.
अरविंद केजरीवाल ही नहीं कॉकरोच जनता पार्टी से बहुत सारी उम्मीदें राहुल गांधी ने भी पाल रखी हैं. उनका यह बयान भी उन्हीं भावनाओं को भड़काने का प्रयास है कि देश में आर्थिक सुनामी आने वाली है. मोदी के खिलाफ इंस्टिट्यूशनल रिवोल्ट हो रहा है. एक साल में मोदी प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे. यह सब उसी टूलकिट का हिस्सा है कि कॉकरोच जनता पार्टी युवाओं को एकत्रित कर बड़ा मूवमेंट खड़ा करेगी. फिर बांग्लादेश और नेपाल जैसा भारत में भी हो जाएगा. कॉकरोच जनता पार्टी की नीयत देश हित में नहीं दिखती. इसीलिए इसका हश्र भी वैसा ही होगा, जैसा चौकीदार चोर है, हिडेनबर्ग रिपोर्ट और वोट चोरी के अभियानों का हुआ है. सोशल मीडिया और देश की जमीनी राजनीति में कोई तालमेल नहीं है.
ऐसा कहा जा रहा है, कि सोनम वांगचुक का समर्थन भी कॉकरोच जनता पार्टी के मूवमेंट को मिल गया है. शाहीन बाग भी ऐसा ही एक मूवमेंट था. सरकार ने पूरा धैर्य दिखाया और फिर धीरे-धीरे जब सब कुछ एक्सपोज़ हुआ तब अपने आप आंदोलन समाप्त हो गया.
युवाओं की समस्याओं का समाधान जरूरी है. पेपर लीक की घटनाओं का रुकना भी बेहद आवश्यक है. पेपर लीक तो देश एक बार झेल भी सकता है, लेकिन अगर इसके बहाने कोई एंटी इंडिया मूवमेंट करना चाहता है, तो वह बर्दाश्त नहीं हो सकता. मुगल आक्रांता जो नहीं कर पाए, अंग्रेजों ने भी बहुत कोशिश की लेकिन भारत को नहीं डिगा पाए.
बीजेपी से लड़ना है तो राजनीतिक रूप से लड़ना होगा. युवाओं के कंधे पर सोशल मीडिया के वर्चुअल वर्ल्ड का उपयोग कर एंटी इंडिया मूवमेंट कभी सफल नहीं हो पाएगा. देश का यूथ सब जानता है.