सरकारों की आलोचना पर दंडात्मक कार्यवाही के लिए औपनिवेशिक काल के राजद्रोह का कानून समाप्त कर दिया गया है. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मजबूत करना इसका लक्ष्य है. अब राष्ट्र विरोधी कृत्य के लिए देशद्रोह भारतीय न्याय संहिता में अपराध बनाया गया है..!!
इसमें भारत की अखंडता, संप्रभुता या एकता को खतरा पैदा करने वाले अपराधों को दंडनीय बनाया गया है. इसमें हथियार उठाना विध्वंसक गतिविधियां या अलगाववादी भावनाएं भड़काने को देशद्रोह माना गया है. किसी भी नागरिक के लिए इससे बड़ा कोई अपराध नहीं हो सकता कि किसी भी नागरिक पर राजनीति के चलते देशद्रोह का आरोप नहीं लगाया जा सकता.
सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव किसी भी हद तक हो सकता है, लेकिन इसमें अगर नेता विपक्ष को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा राजनीतिक कारणों से बताया जाता है, तो इससे बड़ा लोकतांत्रिक अनर्थ नहीं हो सकता. केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को देश की सुरक्षा के लिए सबसे खतरनाक व्यक्ति करार दिया है. उनका आरोप है राहुल गांधी देश विरोधी तत्वों से जुड़े हुए हैं. वह नक्सलवादियों, उग्रवादियों से मिलते हैं. उन्होंने कहा भारत में कभी ऐसा विपक्ष का नेता नहीं देखा. वह विदेश में और देश में नक्सलियों उग्रवादियों और जॉर्ज सोरोस जैसे लोगों से मिलते हैं. इसी तरह के आरोपों के साथ भाजपा के एक सदस्य ने राहुल गांधी के खिलाफ लोकसभा में सब्सटेंटिव मोशन पेश किया है. सदन में उस पर चर्चा होगी कि नहीं अब तक स्पष्ट नहीं है.
सांसद निशिकांत दुबे ने यह मोशन पेश करते हुए सदन में जो तथ्य रखे हैं, वह सब भी राहुल गांधी के देश विरोधी आचरण को ही रेखांकित करते हैं.
भाजपा और कांग्रेस देश नहीं हैं. देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय हित राजनीतिक नजरिए से नहीं देखे जा सकते हैं. नेता विपक्ष या दूसरे किसी सांसद को सदन के भीतर तो विशेषाधिकार प्राप्त हो सकते हैं, लेकिन इसके बाहर उनको भी वही अधिकार प्राप्त हैं, जो भारत के प्रत्येक नागरिक के पास हैं. सदन के भीतर विशेषाधिकार का उपयोग कर किसी भी तरह का आरोप लगाना तब तक जायज नहीं है, जब तक उन आरोपों को सदन के बाहर प्रमाणित नहीं किया जा सके. राहुल गांधी भी ऐसा ही करते हैं. वह सदन में जो बात रखते हैं उनको अब तक सदन के बाहर भारत की संवैधानिक या न्यायिक प्रक्रिया में साबित नहीं कर सके हैं.
ऐसा लगता है कि राहुल गांधी को वाणी दोष है. वह जो भी बोलते हैं, वह या तो लोगों की अवमानना करता है, किसी की भावनाएं आहत करता है या राष्ट्रीय सम्मान को प्रभावित करता है. पिछले दिनों राहुल गांधी मानहानि के दो मुकदमों में न्यायालय में पेश हो चुके हैं. इसके पहले मानहानि के एक मुकदमे में उन्हें 2 साल की सजा हुई थी. सर्वोच्च अदालत से उन्हें राहत मिली. राहुल गांधी के लेवल के नेता पर इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि इतने सारे मानहानि के मुकदमे दर्ज किए गए हों.
विश्व की राजनीति में आज सभी देश एकदूसरे को प्रभावित कर रहे हैं. विदेशी ताकतें दूसरे देशों में राजनीतिक अस्थिरता पैदा कर अपने हित भी साधने में लगी हुई हैं। कई देशों में सरकारों के खिलाफ हुए आंदोलन के पीछे विदेशी ताकतों की भूमिका सामने आई है. पूरी दुनिया की शासन व्यवस्था आर्थिक और तकनीकी शक्तियों के इर्द-गिर्द घूमती है. जिस भी देश से दुनिया के किसी धनाढ्यों के हित नहीं सधते फिर वह उस देश में अस्थिरता के लिए अपना खजाना खोल देता है.
जॉर्ज सोरोस तो सार्वजनिक रूप से कह चुका है कि भारत में नरेंद्र मोदी की सरकार को उखाड़ फेंकना उसका लक्ष्य है. इस पर राजनीतिक वाद-विवाद तो चलते रहते हैं. जार्ज सोरोस और उससे जुड़ी संस्थाओं से गांधी परिवार के रिश्तों को लेकर पहले भी सवाल खड़े होते रहे हैं. लेकिन उसे राजनीतिक मानकर हमेशा नजरअंदाज किया जाता रहा है.
राहुल गांधी जब राजनीतिक आरोप लगाते हैं, तब वह यह चैलेंज करते हैं कि अगर सरकार में हिम्मत है तो वह उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करें. अब उनका यही चैलेंज उनके लिए खुला चैलेंज बन गया है कि वह संसदीय कार्य मंत्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करें. अगर वह कानूनी कार्रवाई नहीं करते तो सरकार द्वारा उन पर लगाया गया राजनीतिक आरोप भी उनकी छवि को खराब कर सकता है. अपराध विज्ञान में किसी भी अपराध के लिए किसी को दोषी साबित करने में उसके अतीत को भी ध्यान में रखा जाता है. राहुल गांधी के बयान, भाषण और बातें हमेशा ऐसी होती हैं, जो कालांतर में मिथ्या साबित हो जाती हैं. कई बार तो उन्हें इसके लिए न्यायालय में माफी भी मांगनी पड़ी.
सरकार के सामने भी यह चुनौती है कि वह राहुल गांधी पर लगाए गए अपने आरोपों को साबित करें. राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई दो राय नहीं हो सकते. राहुल गांधी सरकार से लड़ने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में नहीं डाल सकते. एक संसदविद का यही कौशल होता है, कि वह अपनी बात भी कह दे, अपने मतदाताओं को संदेश भी दे दे और राष्ट्रीय सुरक्षा पर आंच भी नहीं आए.
राहुल गांधी की OTT पॉलिटिक्स भारत से ज्यादा उन्हें पाकिस्तान और चीन में अगर पॉपुलर कर रही है तो यह भारत की सुरक्षा पर सवाल खड़े करने का आधार नहीं बन सकती है. विपक्ष के नेता के रूप में राहुल गांधी जो भी लड़ाई कर रहे हैं, उसका लक्ष्य तो भविष्य में कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाना ही होगा. क्या कांग्रेस को इस बात का आभास नहीं है कि ऐसे संदेश उसे लाभ से ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं.
विदेशी ताकतें हमेशा भारत की आंतरिक राजनीति में हस्तक्षेप करती रही हैं. सत्ता की चाहत के लिए छटपटाते विपक्षी नेता ऐसी विदेशी ताकतों के आसानी से टूल बन सकते हैं. राष्ट्र के लोग इतने विवेकशील हैं, कि सत्ता की चाहत के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाले किसी भी नेता को खत्म करने में देर नहीं करते.