भोपाल. किसी भी सेवा का प्रशासनिक ढांचा पिरामिड आकार का होना बेहतर माना गया है. मप्र में आईएफएस कैडर का प्रशासनिक ढांचा चरमराया गया है. चिंताजनक पहलू यह है कि अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक और मुख्य वन संरक्षक के पद रिक्त पड़े हैं और सेवा आर्हता नहीं होने से एपीसीसीएफ और सीसीएफ के पदों पर प्रमोशन तक नहीं हो पा रहे हैं. 2018 और 2023 में कैडर रिव्यू होना था पर टल गया। अब अगले माह के अंत तक कैडर रिव्यू की संभावना जताई जा रही है।
जंगल महकमे में स्थिति ऐसी बन गई है कि कैडर में एपीसीसीएफ के 25 पद हैं पर एपीसीसीएफ सिंह परियोजना उत्तम शर्मा मात्र 6 अफसर ही कार्य रहें हैं. इसी प्रकार सीसीएफ के 50 पद स्वीकृत है और वर्तमान में 10 सीसीएफ ही कार्यरत है. एपीसीसीएफ स्तर के अफसर नहीं होने की वजह से एक-एक अधिकारी के पास 3 से 4 शाखाओं का अतिरिक्त प्रभार है। ऐसे ही सीसीएफ स्तर के आईएफएस नहीं होने की वजह से सर्किल में सीएफ की पोस्टिंग करना पड़ रही है.
2002 में आईएफएस कैडर में पीसीसीएफ का एक तथा एक्स कैडर के दो और एपीसीसीएफ 4 पद कैडर में और इतने ही पद एक्स कैडर में थे. 2008 में हुई कैडर रिव्यू में एपीसीसीएफ के 10 पद कैडर में और एक्स कैडर में भी 10 पद स्वीकृत हुए. 2015 में हुए कैडर रिव्यू में एपीसीसीएफ के 21 पद स्वीकृत किए गए और उसके विरुद्ध 42 पद काम करने लगे.
इसके बाद एक्स कैडर सहित एपीसीसीएफ के पदों की संख्या बढ़कर 50 कर दी गई. आज की स्थिति यह है कि कैडर के ही एपीसीसीएफ के 9 पद रिक्त है. इसी प्रकार कैडर में सीसीएफ के 50 पद है, जिसमें से केवल 13 सीसीएफ ही कार्यरत है. यानी नौबत यह बन गई है कि अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक और मुख्य वन संरक्षक के पद पर प्रमोशन पाने के लिए कोई भी आईएफएस अधिकारी सेवा आर्हता पूरा नहीं कर पा रहा है.
वन विभाग के जिम्मेदारों द्वारा प्रशासनिक ढांचे को सुधारने की दिशा में कोई पहल भी नहीं की जा रही है. कैडर रिव्यू के प्रस्ताव को केंद्रीय कार्मिक विभाग ने 2023 में संशोधन के लिए एमपी को लौटा दिया है। इसके वाद मप्र के जिम्मेदार अफसरों को कैडर के सुधार हेतु प्रशासनिक एक्सरसाइज करने की फुर्सत नहीं है. अगले माह के अंत तक कैडर रिव्यू की संभावना जताई जा रही है।
जनवरी में ये होंगे पदोन्नत..
यूं तो एपीपीसीसीएफ के पद सालों से खाली है किन्तु सेवा आर्हता पूरा न होने की वजह से 2001 बैच की पदम् प्रिया और अमित दुबे एपीसीसीएफ के पद पर 1 जनवरी 26 में प्रमोट होंगे। यह भी उल्लेख करना उचित होगा कि 2008 बैच के एक प्रभावशाली आईएफएस ने डॉ मोहन सरकार के महिला सशक्तिकरण वर्ष में आईएफएस कैडर में 2001 बैच की इकलौती महिला अफसर पदम् प्रिया को सीसीएफ इंदौर सर्किल के पद पर पदस्थापना नहीं होने दी। जबकि इंदौर सर्किल महीनों प्रभार में संचालित होता रहा।
इस दौरान अपनी पदस्थापना के लिए अपनी दावेदारी भी एसीएस और वन बल प्रमुख के समक्ष पेश कर चुकीं हैं। वर्तमान में इंदौर सीमा से जुड़े खंडवा सर्किल रिक्त है पर वहां भी पोस्टिंग के लिए प्रस्तावित सूची में स्वच्छ छवि की महिला अफसर का नाम नहीं है। जनवरी 26 में ही 2012 बैच के बृजेन्द्र श्रीवास्तव, क्षितिज कुमार, प्रियांशी सिंह, संजय चौहान, लवित भारती और महेंद्र प्रताप सिंह वन संरक्षक के पर पदोन्नत होंगे।
अनावश्यक शाखाएं समाप्त हो..
कैडर मैनेजमेंट सुधारने के लिए पूर्व वन बल प्रमुख का सुझाव है कि एपीसीसीएफ के कुछ पद तत्काल समाप्त करने होंगे. यानि एपीसीसीएफ उत्पादन, एपीसीसीएफ निगरानी एवं मूल्यांकन, एपीसीसीएफ एचआरडी जैसे पदों का औचित्य नहीं है. उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि सर्किल में जिस तरीके से वन संरक्षक स्तर के आईएफएस अधिकारियों की पदस्थापना करने की परंपरा शुरू हो गई है. ठीक उसी प्रकार अनुसंधान एवं विस्तार ( सामाजिक वानिकी ) के मुख्य वन संरक्षक के पद समाप्त कर इन पदों पर वन संरक्षक स्तर के अधिकारियों की पदस्थापना की जानी चाहिए.
कैडर में थी खामियां..
कैडर में खामियां है. यही वजह है कि विभाग ने केंद्रीय कार्मिक विभाग में लंबित कैडर प्रस्ताव में एपीसीसीएफ और सीसीएफ के पद कम किए हैं. दरअसल, 1978, 1979 एवं 1980 बैच में 90 आईएफएस रहे. इन अधिकारियों को सेवानिवृत्ति से पहले पदोन्नति दिए जाने के कारण ऐसे हालात बने हैं. उन अधिकारियों को पदोन्नत करने के लिए केंद्र सरकार से अस्थाई मंजूरी ली गई थी. ऐसे 13 पद थे, जो समय पूरा होने के बाद भी समाप्त नहीं किए गए.
अब ऐसे हालात बन गए हैं कि 24 साल की सेवा पूरी करने वाले सीसीएफ नहीं मिले रहें हैं जो कि एपीसीसीएफ बन सके. कमोबेश यही स्थिति मुख्य वन संरक्षक पद के लिए प्रमोट होने वाले सीएफ की है. वर्ष 2024 से पहले कोई भी वन संरक्षक, मुख्य वन संरक्षक पद पर प्रमोट होने के लिए 18 वर्ष की सेवा पूरा नहीं कर पा रहे है.
ऐसी स्थिति क्यों बनी..
आईएफएस कैडर का प्रशासनिक ढांचा चरमराने की मुख्य वजह रही कि भारत सरकार ने अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों की परीक्षा एक साथ कराना है. एक साथ परीक्षा होने की वजह से अंकगणित, आर्ट्स और सोशल साइंस के परीक्षार्थी मेरिट में अब्बल आ जाते हैं. बॉटनी सब्जेक्ट के परीक्षार्थी पीछे रह जाते हैं.
इसके कारण आईएफएस इंडक्शन में बामुश्किल पांच से सात अभ्यार्थी आते हैं. कैडर मैनेजमेंट को लेकर वर्ष 2010 से लगातार भारत सरकार को पत्र लिखते रहे हैं कि मप्र को आईएफएस इंडक्शन में कम से कम 10 से 12 अभ्यार्थी प्रति वर्ष दिया जाए पर कोई सुनवाई नहीं हुई. आईएफएस कैडर में इंडक्शन कम होने की वजह से ही आज प्रशासनिक ढांचा लगभग ढह सा हो गया है.
केंद्रीय कार्मिक विभाग में लंबित प्रस्ताव
पद वर्तमान प्रस्तावित
हॉफ (वन बल प्रमुख ) 01 -- 0
एपीसीसीएफ 25 - 18
सीसीएफ 50 33
सीएफ 40 30
(ये बदलाव सिर्फ सीनियर पद के लिए है)