भारत का ह्रदय प्रदेश मध्यप्रदेश अप्रतिम सौंदर्य से समृद्ध प्रदेश है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि मध्यप्रदेश सर्वाधिक सम्मोहित करने वाला राज्य है। इसके कण-कण में सौंदर्य है। जो एक बार आता है यहां की स्मृतियों के सम्मोहन में बंधकर बार-बार आता है। मध्यप्रदेश में हर आयु के पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता है।
पर्यटन के संबंध में दशकों पहले की अवधारणाएं अब समाप्त हो गई हैं। मध्यप्रदेश के पर्यटन ने अब उद्योग का रूप ले लिया है। हमारी नीतियों और दूरदर्शी निर्णयों से पर्यटन क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है। यह सर्वमान्य तथ्य है कि अर्थव्यवस्था में पर्यटन सर्वाधिक रोजगार उत्पन्न करने वाला सेक्टर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अतुल्य भारत का वैश्विक स्तर पर मान-सम्मान बढ़ा है। इसका सकारात्मक प्रभाव सभी राज्यों के पर्यटन उद्योग पर पड़ा है। देश का घरेलू पर्यटन बढ़ने से मध्यप्रदेश जैसे तेजी से बढ़ते राज्य को सीधा लाभ हुआ है।
मध्यप्रदेश के शांतिप्रिय नागरिकों के लिये सबसे ज्यादा खुशी की बात है कि मध्यप्रदेश अब वैश्चिक पर्यटन नक्शे पर ध्रुव तारे जैसा चमक रहा है। हमारे पर्यटन की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह अत्यंत समृद्ध और विविधता से सम्पन्न है। साथ ही जिम्मेदार और सुरक्षित भी।
प्रदेश में पर्यटन की नई-नई शाखाएं उभरी है। प्राकृतिक पर्यटन हो या सांस्कृतिक पर्यटन, आध्यात्मिक पर्यटन हो या वन्यजीव पर्यटन, ग्रामीण पर्यटन हो या रोमांचकारी पर्यटन, कृषि पर्यटन हो या फिल्म पर्यटन या नया उभरता हुआ चिकित्सा पर्यटन। इन सभी नये स्वरूपों के साथ मध्यप्रदेश की पहचान बहुआयामी पर्यटन प्रदेश के रूप में हो रही है।
प्रदेश में अब पर्यटकों की संख्या हर वर्ष बढ़ती जा रही है। गत वर्ष देश में सर्वाधिक पर्यटक मध्यप्रदेश में आए। नैसर्गिक सौंदर्य, वन्य प्राणी, धार्मिक स्थल, आकर्षक ऐतिहासिक विरासतें और हरे-भरे वन हमारी विशेषता है। हमारे वन जीवत है। देश में सर्वाधिक बाघ मध्यप्रदेश में हैं। चंबल सबसे साफ नदी है जिसमें घड़ियालों का संरक्षण हो रहा है। नर्मदा मैया के दर्शन करने हजारों श्रद्धालु दूर-दूर से आते है।
पीएम नरेन्द्र मोदी की दूरदृष्टि से मध्यप्रदेश अब देश का एकमात्र चौता प्रदेश बन गया है। चितों का परिवार पालपुर कूनो में फल फूल रहा है। सांची, खजुराहो और भीमबेटका जैसी विश्वविख्यात धरोहर हमारी वैश्विक सांस्कृतिक पहचान है। अब यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में ग्वालियर किला, बुरहानपुर का खूनी भंडारा, चंबल के पत्थर कला स्थल, भोजेश्वरा महादेव मंदिर भोजपुर, रामनगर मंडला के गाँड स्मारक और मंदसौर का धमनार भी जुड़ने की तैयारी में हैं। इसके अलावा नर्मदा परिक्रमा, गौड चित्रकला और भगोरिया उत्सव भी पर्यटन के नक्शे पर प्रमुखता से उभरे हैं। मध्यप्रदेश ऐसा अग्रणी राज्य चल गया है. जिसने सबसे ज्यादा 18 स्थलों को विश्व विरासत सूची में शामिल करने की पहल की है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार के सहयोग से मध्यप्रदेश के पर्यटन को नई दिशा मिली है। केन्द्र का भरपूर सहयोग मिल रहा है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जहां इको सेंसिटिव जोनल मास्टर प्लान बनाने का काम शुरू किया गया और 27 राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों में से सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान और बोरी वन्य जीव अभ्यारण्य में पूरा हो गया। हैरिटेज पर्यटन की कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं।
प्रदेश में अधोसंरचना मजबूत होने, सड़क संपर्क में निरंतर सुधार होने और केन्द्र सरकार के सहयोग से रेल सुविधाओं के बढ़ने से पर्यटन क्षेत्र और उदयोग को लाभ मिला है। इस क्षेत्र में निवेश निरंतर बढ़ रहा है। हाल में रीवा पर्यटन कॉन्क्लेव में तीन हजार करोड के निवेश प्रस्ताव मिले। पर्यटन स्थलों सुविधाएं निरंतर बढ़ाई जा रही हैं। पीएमपर्यटन वायु सेवा की शुरुआत हुई है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, सतना और सिगरौली के मध्य वायु सेवा का संचालन हो रहा है।
मध्यप्रदेश सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण के दौर से गुजर रहा है। इसी समय आध्यात्मिक पर्यटन भी निरंतर विस्तार ले रहा है। भगवान श्रीमहाकाल की नगरी उज्जैन और यहां श्रीमहाकाल लोक विश्व विख्यात हैं। पिछले साल सात करोड़ श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। प्रदेश की जीडीपी में पर्यटन क्षेत्र के योगदान में आध्यात्मिक पर्यटन भागीदारी को और ज्यादा सशक्त बनाने की तैयारी चल रही है।
ओरछा में भगवान श्रीराम का मंदिर है। यह विश्व का एकमात्र मंदिर है जहां भगवान को राजा के रूप में गार्ड ओफ आनर दिया जाता है। यह अभूतपूर्व आध्यात्मिक घटनाक्रम है। यहां भगवान श्रीराम राजा की सरकार स्थापित है। ग्वालियर के ऐतिहासिक भव्य किले के संबंध में उल्लेख मिलता है कि भारत में पहली बार जीरो का लिखित इस्तेमाल कहां हुआ।
ग्वालियर किले में नीं शताब्दी के इस चतुर्भुज मंदिर में शूल्य का सबसे शुरुआती शिलालेख पर उकेरा हुआ प्रमाण मिलता है। इस मंदिर को दुनिया में टैपल ऑफ जीरो के नाम से भी पहचाना जाता है। धार्मिक आयोजनों को नया स्वरूप दिया जा रहा है। बाबा श्रीमहाकाल की दिव्य सवारी को भव्य रूप दिया गया। रक्षा बंधन के त्यौहार और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को सार्वजनिक रूप से प्रदेश के कोने-कोने में मनाया गया।
धार्मिक महत्व के स्थलों में धार्मिक और सांस्कृतिक लोगों और स्मारकों का निर्माण अध्यात्मिक पर्यटन को नया आयाम देगा। संत रविदास लोक सागर, रानी दुर्गावती स्मारक जबलपुर देवी लोक सलकनपुर सीहोर रामराजा लोक ओरछा, जाम सांवली हनुमान लोक पांढुर्ना, पशुपतिनाथ लोक मंदसौर, परशुराम लोक जानापाव महू, महाराणा प्रताप लोक भोपाल, भादवा माता लोक नीमच, रानी अवंतीबाई स्मारक जबलपुर, मा नर्मदा महालोक अमरकंटक अनूपपुर देवी अहिल्या लॉक खरगौन और नागलवाडी लोक बड़वानी में किया जा रहा है।
एक और जहां आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन समृद्ध हो रहा है वहीं दूसरी ओर फिल्म पर्यटन भी तेजी से बढ़ रहा है। फिल्म निर्माताओं को मध्यप्रदेश में आकर्षक सुविधाएं मिल रही है। कई प्रसिद्ध फिल्मों की शूटिंग मध्यप्रदेश में हुई है। इससे स्थानीय कलाकारों को फिल्मो में काम मिला। फिल्म यूनिट के सदस्यों को होम स्टे की सुविधाओं का लाभ मिला।
होम स्टे की संख्या निरंतर बढ़ते जा रही है। प्रदेश की ग्रामीण संस्कृति को देखने-समझने में होम स्टे अच्छी भूमिका निभा रहे हैं। फिलहाल 100 पर्यटन ग्राम विकसित किए गए हैं, जिसमें से 63 पर्यटन याम विकसित हो चुके हैं। इनमें 470 से ज्यादा होम स्टे हैं। देश के पहले हैंडलूम गाव प्राणपुर को वैश्विक पहचान मिली है। गॉड, भील पेंटिंग और मांडना आर्ट जैसी जनजातीय कलाओं से पर्यटक परचित हुए हैं।
हमारा लक्ष्य है कि पर्यटन उदयोग का निरंतर विस्तार हो ताकि पर्यटन की संभावनाओ पूरी तरह रोजगार सृजन के लिये उपयोग किया जा सके। वर्ष 2024 में 13 करोड़ 41 लाख से ज्यादा पर्यटक प्रदेश में आये. जो एक रैकार्ड है।
विदेशी पर्यटकों की संख्या भी बढ़ रही है। बांधवगढ़, कान्हा, पन्ना और पेंच में आवागमन बढ़ा है। जिस प्रकार मध्यप्रदेश ने आर्थिक निवेश के द्वार खोले है पर्यटन क्षेत्र पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा है। स्थानीय समुदाय की भागीदारी, उदयोग समूहों के सहयोग और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता से पर्यटन का क्षेत्र मध्यप्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा।