मध्यप्रदेश कांग्रेस में संगठन सृजन को लेकर अब तक की गई तैयारियों को परखने के लिए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी जून महीने में प्रदेश के दौरे पर आ सकते हैं। राहुल गांधी का यह दौरा मुख्य रूप से संगठन की मजबूती पर केंद्रित रहने की संभावना है। वे बूथ लेवल एजेंट से लेकर जिला अध्यक्षों तक से सीधा संवाद कर सकते हैं।
राहुल गांधी के इस संभावित दौरे की सुगबुगाहट ने प्रदेश कांग्रेस के गलियारों में हलचल तेज कर दी है। वे संगठन के ढांचे को कसने आ रहे हैं। वे यह देखना चाहते हैं कि कागजों पर बना संगठन जमीन पर कितना सक्रिय है। ऐसा माना जा रहा है कि राहुल गांधी यह दौरा तय करेगा कि पिछले कुछ समय में प्रदेश में संगठन विस्तार के जो दावे किए गए हैं, उनमें कितनी सच्चाई है। जून में प्रस्तावित यह दौरा प्रदेश कांग्रेस के लिए एक परफॉर्मेंस ऑडिट की तरह भी देखा जा रहा है, जिसमें एक-एक पदाधिकारियों की कार्यक्षमता की भी परीक्षा होगी।
राहुल के आने की खबर लगते ही प्रदेश संगठन पूरी तरह सक्रिय मोड में आ गया है। किसी भी तरह की असहज स्थिति से बचने के लिए पार्टी ने दोनों संभागों के सभी जिलों में ट्रेनिंग आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस कवायद का मुख्य उद्देश्य कार्यकर्ताओं को उनकी जिम्मेदारियों के प्रति अपडेट करना है। ट्रेनिंग प्रोग्राम में संगठन के हर स्तर को कवर किया जा जाएंगा। जिसमें जिला स्तर पर जिला अध्यक्ष एवं जिला कार्यकारिणी। ब्लॉक स्तर पर ब्लॉक अध्यक्ष एवं उनकी कार्यकारिणी।
इनके साथ ही मण्डलम अध्यक्ष, कार्यकारिणी, पंचायत कमेटियां और सबसे महत्वपूर्ण बीएलए और पार्टी के विभिन्न विभाग और प्रकोष्ठों की टीमें, प्रशिक्षण में शामिल रहेगी। ट्रेनिंग प्रोग्राम जल्द बनने की संभावना है।
कार्ययोजना पर सवाल
पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस पूरी कवायद के पीछे सबसे बड़ी वजह राहुल गांधी का संवाद करने का तरीका है। ऐसे में संगठन चाहता है कि यदि राहुल गांधी किसी कार्यकर्ता से उसकी जिम्मेदारी या उसके क्षेत्र की कार्ययोजना के बारे में पूछें, तो वह बेबाकी और स्पष्टता के साथ जवाब दे सके। ट्रेनिंग में कार्यकर्ताओं को यह विस्तार से बताया जा रहा है कि उनके पास क्या शक्तियां हैं, क्या और कितनी जिम्मेदारी हैं और बूथ स्तर पर उन्हें किस तरह की चुनौतियों का सामना करना है।
पुराण डेस्क