फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित यूरोप के प्रतिष्ठित मेले 'फोयर डे पेरिस' (Foire de Paris) का 12 मई को भव्य समापन हुआ। 30 अप्रैल से शुरू हुए इस 12 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय महाकुंभ में मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर 'बाग प्रिंट' वैश्विक आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी रही। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय की ओर से अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिल्पकार मोहम्मद बिलाल खत्री ने इस मंच पर देश का सफल प्रतिनिधित्व किया।
इस प्रदर्शनी का सबसे भावुक क्षण वह था, जब श्री फुलियाहू नामक एक फ्रांसीसी नागरिक बिलाल खत्री के स्टॉल पर पहुँचे। उन्होंने वर्ष 1971 में भारत के 'बाग' गाँव की अपनी यात्रा को याद करते हुए बताया कि कैसे 55 साल पहले उन्होंने बिलाल के दादा, स्व. इस्माइल सुलेमानजी खत्री से इस कला के जनक थे बिलाल ने उनसे कला को सीखा था। पेरिस के आधुनिक परिवेश में तीन पीढ़ियों के इस कलात्मक जुड़ाव ने आगंतुकों को भावुक कर दिया।
प्रदर्शनी के दौरान बिलाल खत्री द्वारा किए गए 'लाइव डेमोंस्ट्रेशन' ने विदेशी मेहमानों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सागवान की लकड़ी के ब्लॉकों और प्राकृतिक रंगों के तालमेल से कपड़े पर उकेरती आकृतियों को देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी। भारतीय दूतावास की सेक्रेटरी सुश्री वर्धा खान और श्री माधव आर. सल्फुले ने भी शिल्पकार के कौशल की सराहना करते हुए उन्हें भारत का 'सांस्कृतिक दूत' बताया।
अपनी यात्रा के अनुभव साझा करते हुए बिलाल खत्री ने कहा कि पेरिस की वास्तुकला और स्थापत्य कला ने उन्हें नई प्रेरणा दी है। उन्होंने बताया कि पेरिस की आधुनिकता और वहां के संरक्षित इतिहास के बीच का संतुलन उन्हें अपनी प्राचीन कला को नए वैश्विक स्वरूप में ढालने की ऊर्जा दे गया है। 47 देशों के 1,400 प्रदर्शकों के बीच मध्य प्रदेश के 'बाग प्रिंट' ने न केवल अपनी अमूल्य साख स्थापित की, बल्कि यह भी सिद्ध कर दिया कि भारतीय हस्तशिल्प अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी महक बिखेरने के लिए पूरी तरह तैयार है।
डॉ. नवीन आनंद जोशी