सालके आखिर तक भारत बना सकता है कोरोना वेक्सीन-क्या ठीक हो चुका व्यक्ति फिर संक्रमित हो -दिनेश मालवीयसकत है?

सालके आखिर तक भारत बना सकता है कोरोना वेक्सीन

क्या ठीक हो चुका व्यक्ति फिर संक्रमित हो सकत है?

-दिनेश मालवीय

पूरी दुनिया को हलकान करने वाले कोरोना वायरस की वेक्सीन को लेकर बड़ी अनिश्चितता की स्थिति बनी हुयी है. हम आशा और निराशा के झूले में झूल रहे हैं. अनेक तरह की खबरों के बीच एक तथ्य यह भी उभर कर सामने आया है कि भारत इस साल के आखिर या अगले साल की शुरुआत तक वेक्सीन बनाने में कामयाब हो सकता है.

भारतीय चिकित्सा अनुसन्धान परिषद के महानिदेशक बलराम भार्गव ने ‘इकनोमिक टाइम्स’ को हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा की इस महामारी से निपटने के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिक और चिकित्सा विशेषज्ञ रात-दिन एक किये हुए हैं. भारत की विशेषज्ञ भी इसमें पीछे नहीं हैं. उनके अनुसार भारत यह वेक्सीन बना ही लेगा और अनेक देश इसके वितरण के लिए भारत के साथ संपर्क बनाए हुए हैं.

भार्गव का कहना है कि महामारी की भीषणता को देखते हुए कोशिश यह है कि वेक्सीन जल्दी से जल्दी बन जाए, लेकिन हम जल्द्बाजी और इसके संभावित परिणामों को लेकर कोई जोखिम नहीं ले रहे. भारत में दो देशी कैंडीडेट वेक्सीन क्लीनिकल ट्रायल स्टेज में हैं. जानवरों की टोक्सिक स्टडी में ये खरी उतरी हैं. हमें उम्मीद है कि इस साल के आखिर तक या अगले साल के शुरूआत में  हम वेक्सीन बना लेंगे. हमारे ट्रायल्स वैश्विकरूप से स्वीकृत मानकों के अनुसार किये जा रहे हैं. हम जल्दी से जल्दी कामयाब होना चाहते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भारत के चिकित्सा प्रोफेशनल्स और वैज्ञानिकों को किसी भी लिहाज से दोयममाना जाए. वे दुनिया में किसी से पीछे नहीं हैं.

एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि प्लाज्मा थेरेपी पर अध्ययन प्रगति पर हैं और इनके परिणाम ट्रायल्स और उनके विश्लेषण के बाद घोषित कर दिए जाएँगे. Modarna vaccine केबारे में उनका कहना है कि यह अब भी ट्रायलफेज में हैं]. भारत में भी दो देशी वेक्सीन कैंडिडेट्स हैं. भारत दुनिया की फार्मेसी है और इसे वेक्सीन सप्लाई के मामले में बड़ाप्लेयर माना जाता है. अगर कोई दूसरा देश हमसे पहले वेक्सीन बनाने में कामयाब हो भी जाए, तो इसे स्केल अप करने का काम भारत या चीन को ही करना होगा.

भार्गव का मानना है कि फिलहाल एक्टिव प्रकरणों की सबसे ज्यादा संख्या महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश और कर्नाटक में सीमित है. अनेक अन्य राज्यों में यह कुछ जिलों तक ही सीमित है. प्रकरणों की संख्या में बढ़ोत्तरी की वजह यह है कि अब पूरे देश में टेस्टिंग अधिक हो रही है. अब शुरूआती अवस्था में ही मरीजों की पहचान हो रही है, लिहाजा आने वाले दिनों में हालत में सुधार होना निश्चित है. रिकवरी रेट और अधिक बढेगा.

उन्होंने कहा कि अभी संक्रमणों के बढ़ने या कम होने के बारे में कुछ निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह नया संक्रमण है और इसकी epidemmiology यानी इसके रोग विज्ञान को अभी तक पूरी तरह समझने की कोशिशें चल रही हैं. बहरहाल, भारतने इतनी बड़ी जनसंख्या होने के बावजूद इसमामले में बहुत अच्छा काम किया है.

यह पूछे जाने पर कि क्याइस रोग से ठीकहो चुके लोगोंको यह फिर से होसकता है, उन्होंने कहा कि यह सही नहीं है. कहीं कहीं इस तरह के छिटपुट प्रकरण सामने आये हैं.यहसंभव है कि जो लोग ठीक हो चुके हैं, उनमें पर्याप्त एंटीबोडिज का निर्माण न हो पाए तो वह फिर से संक्रमित हो सकता है. फिर भी इस सम्बन्ध में अभी अनेक तरह की बातें प्रचालन में हैं और अभी शोध कार्य चल रहा है. कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है.

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