मध्य प्रदेश की लाइफलाइन मानी जाने वाली नर्मदा नदी अब पॉल्यूशन का शिकार और लोगों की जान से खिलवाड़कर बीमारियों को आमंत्रण देने की तरफ जा रही है। कारण नर्मदा में हर दिन लगभग 98 मिलियन लीटर बिना ट्रीटमेंट वाला सीवेज डाला जा रहा है। एक पिटीशन पर सुनवाई करते हुए जबलपुर हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार और संबंधित डिपार्टमेंट को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कांग्रेस पार्टी अब इस मुद्दे पर राज्य सरकार पर हमला बोल रही है।
विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने इसे BJP सरकार की बड़ी लापरवाही बताया है। उन्होंने इसे एनवायरनमेंटल क्राइम और पब्लिक हेल्थ से छेड़छाड़ बताया और कहा कि BJP को एनवायरनमेंट या पब्लिक हेल्थ की कोई चिंता नहीं है। उन्होंने मांग की है कि सरकार नर्मदा नदी को पॉल्यूशन से फ्री करने के लिए ठोस और समय पर कदम उठाए।
जबलपुर हाई कोर्ट ने बुधवार 4 फरवरी को मध्य प्रदेश सरकार और संबंधित डिपार्टमेंट को नोटिस जारी कर हर दिन नर्मदा नदी में लगभग 98 मिलियन लीटर बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज का पानी छोड़े जाने पर जवाब मांगा है। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला देते हुए एनवायरनमेंटल और पब्लिक हेल्थ के मुद्दों पर एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन फाइल की गई है। पिटीशन में कहा गया है कि नर्मदा नदी में फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए हैं, जो इंसानी हेल्थ के लिए बेहद खतरनाक हैं। इसकी वजह से हैजा और डायरिया जैसी पानी से होने वाली बीमारियां फैल रही हैं। मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी को पवित्र माना जाता है और लाखों लोग इसका पानी इस्तेमाल करते हैं।
उमंग सिंह ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, "BJP सरकार की बड़ी लापरवाही अब कोर्ट की जानकारी में है।" इसे एनवायरनमेंटल क्राइम और पब्लिक हेल्थ का मज़ाक बताते हुए, विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि BJP को एनवायरनमेंट या पब्लिक हेल्थ की कोई परवाह नहीं है। उन्होंने कहा कि "सबका साथ, सबका विकास" सिर्फ़ एक नारा बनकर रह गया है। कांग्रेस नेता ने मांग की कि सरकार नर्मदा नदी को प्रदूषण-मुक्त बनाने के लिए ठोस और समय पर कदम उठाए।
पुराण डेस्क