भोपाल: 1 लाख रुपये या इससे अधिक राशि की सायबर वित्तीय धोखाधड़ी संबंधी शिकायतें अब राष्ट्रीय सायबर अपराध रिपोर्टिंग प्रणाली अथवा हेल्पलाइन 1930 पर प्राप्त होने पर स्वत: सीसीटीएनएस (क्राइम एण्ड क्रिमिनल ट्रेकिंग नेटवर्क एण्ड सिस्टम) के माध्यम से भोपाल स्थित राज्य सायबर पुलिस थाने में ई-एफआईआर के रुप में दर्ज हो जायेंगी तथा परीक्षण उपरान्त इन्हें जिला पुलिस थाने में अग्रेषित किया जायेगा, जहां 3 दिन के अंदर शिकायतकर्ता को ई-एफआईआर पर हस्ताक्षर करने के लिये जाना होगा तथा न जाने पर उसे पुलिस थाने द्वारा नोटिस भेजा जयेगा लेकिन यदि 30 दिन के अंदर शिकायतकर्ता, संबंधित थाने में हस्ताक्षर करने नहीं पहुंचा तो यह ई-एफआईआर निरस्त कर दी जायेगी। यह ताजा निर्देश मय एसओपी के मप्र के डीजीपी कैलाश मकवाणा ने सभी पुलिस इकाईयों को जारी किये हैं।
निर्देश में बताया गया है कि राष्ट्रीय सायबर अपराध रिपोर्टिंंग पोर्टल पर वर्ष 2024 में लगभग 20 लाख शिकायतें तथा 22 हजार 849 करोड़ रुपये के नुकसान की रिपोर्ट दर्ज की गई जबकि मात्र 2.91 प्रतिशत मामलों में ही अपराध पंजीकृत हुये। इसलिये अब पीड़ित को तत्काल राहत देने के लिये ई-एफआईआर का प्रावघान किया गया है।
निर्देश में कहा गया है कि संबंधित जिला पुलिस थाना द्वारा ई-एफआईआर प्राप्त होने के तुरन्त बाद अन्वेषणीय कार्यवाही जैसे खाता फ्रीज कराना, सीडीआर/एसडीआर (कॉल डिटेल रिपोर्ट/सब्स्क्राइबर डिटेल रिकार्ड) प्राप्त करना, सीसीटीवी फुटेज एकत्र करना आदि शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर की प्रतीक्षा किये बिना प्रारंभ की जायेगी। पूर्व में 2 लाख रुपये या इससे अधिक की राशि के सायबर फ्राड के मामलों को राज्य सायबर पुलिस थाने में दर्ज करने का प्रावधान था जो अब निरस्त कर दिया गया है।
डॉ. नवीन आनंद जोशी