नया फरमान: अब विनीयर उद्योग की स्थापना हेतु डीएफओ को एनओसी देनी ही होगी


Image Credit : X

स्टोरी हाइलाइट्स

विनीयर उद्योग (फर्नीचर, प्लाईवुड और लैमिनेटेड विनियर लंबर यानि एलवीएल जैसे बीम, हेडर, फर्श और छत के फ्रेम, ट्रस के हिस्से एवं फॉर्मवर्क बनाने, दीवारों पर पैनलिंग बनाने और प्राकृतिक लकड़ी की बनावट और सुंदरता प्रदान करने के लिए डेकेरेटिव आइटम बनाने वाले उद्योग) की स्थापना हेतु डीएफओ को एनओसी देनी ही होगी..!!

भोपाल: राज्य के वन विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णमाल ने सभी क्षेत्रीय वनमण्डलाधिकारियों को निर्देश जारी कर कहा है कि विनीयर उद्योग (फर्नीचर, प्लाईवुड और लैमिनेटेड विनियर लंबर यानि एलवीएल जैसे बीम, हेडर, फर्श और छत के फ्रेम, ट्रस के हिस्से एवं फॉर्मवर्क बनाने, दीवारों पर पैनलिंग बनाने और प्राकृतिक लकड़ी की बनावट और सुंदरता प्रदान करने के लिए डेकेरेटिव आइटम बनाने वाले उद्योग) की स्थापना हेतु डीएफओ को एनओसी देनी ही होगी। 

निर्देश में कहा गया है कि मप्र काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम, 1984 में प्रावधान है कि ऐसे उद्योग या प्रसंस्करण संयंत्र, जो घरेलू मूल की लकड़ी के गोल लठ्ठों का प्रयोग नहीं करते हैं या जो तीस सेन्टीमीटर व्यास या अधिक के बैंड आरा, री-सों या चक्रीय आरा के बिना प्रचालन करते हैं, के लिए प्रतिबंधित क्षेत्रों से भिन्न क्षेत्रों में अनुज्ञप्ति अपेक्षित नहीं होगी, परन्तु ऐसे उद्योग या प्रसंस्करण संयंत्र, जो-चीरी हुई इमारती लकड़ी, बैत, बांस, नरकट, प्लाईवुड, विनीयर या आयातित लकड़ी, ब्लेक बोर्ड, मीडियम डेनसिटी फाइबर-बोर्ड या इसी प्रकार के काष्ठ आधारित उत्पाद और राज्य में कटाई तथा पारगमन व्यवस्था के अधिकार क्षेत्र में छूट प्राप्त प्रजातियों से प्राप्त गोल  इमारती लकड़ी का उपयोग करते हैं, के लिए अनुज्ञप्ति अपेक्षित नहीं होगी। 

इसलिये यदि विनीयर उद्योग की स्थापना करने हेतु आवेदक वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण-पत्र की मांग करते हैं, तो संबंधित वनमण्डलाधिकारी अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी करेंगे। उल्लेखनीय है कि ये निर्देश पहले वन बल प्रमुख को जारी करने थे परन्तु उनके द्वारा हीला-हवाली करने पर अब एसीएस बर्णमाल को जारी करने पड़े हैं।