मप्र में अब भारतीय भाषाओं को सीखने के पाठ्यक्रम प्रारंभ होंगे


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स्टोरी हाइलाइट्स

संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भारतीय भाषाओं को मान्यता दी गई है, जिनमें हिंदी भी शामिल है और इनके अपने-अपने राज्य और क्षेत्र हैं, 22 भाषाओं में शामिल हैं : असमिया, बंगाली, बोडो, डोगरी, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, उडिय़ाा, पंजाबी, संस्कृत, संथाली, सिंधी, तमिल, तेलुगु एवं उर्दू..!!

भोपाल।मप्र में अब भारतीय भाषाओं को सीखने के पाठ्यक्रम प्रारंभ होंगे। इसके निर्देश राज्य के उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाहा ने जारी कर दिये हैं। ज्ञातव्य है कि संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भारतीय भाषाओं को मान्यता दी गई है, जिनमें हिंदी भी शामिल है और इनके अपने-अपने राज्य और क्षेत्र हैं। 22 भाषाओं में शामिल हैं : असमिया, बंगाली, बोडो, डोगरी, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, उडिय़ाा, पंजाबी, संस्कृत, संथाली, सिंधी, तमिल, तेलुगु एवं उर्दू।

निर्देश में भारतीय भाषाओं के पाठ्यक्रम तैयार करने, उन्हें संचालित करने, परीक्षा आयोजित करने तथा प्रमाण पत्र देने हेतु की प्रक्रिया भी निर्धारित कर दी गई है। निर्देश में कहा गया है कि शासकीय स्वशासी महाविद्यालयों को भारतीय भाषाएं आवंटित की जाएं एवं ये स्वशासी महाविद्यालय, आंवटित भारतीय भाषाओं का पाठ्यक्रम किसी मानक संस्था द्वारा संचालित पाठ्यक्रम के आधार पर निर्मित करेंगे। इसके लिये विशेषज्ञ समिति गठित की जाए। यह समिति आवंटित भारतीय भाषा का पाठ्यक्रम तैयार करेगी।  

प्रत्येक प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम 4 क्रेडिट, 60 घंटों का अर्थात् 1 घंटे प्रति दिवस के आधार पर 60 कार्य दिवस का होगा। 6 महीने के अंदर सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया पूर्ण करनी होगी। इन पाठ्यक्रमों का अध्ययन-अध्यापन ऑनलाइन पद्धति से किया जाएगा तथा संबंधित महाविद्यालय आवश्यकतानुसार संपर्क कक्षाएं भी आयोजित कर सकेंगे। 

नोडल स्वशासी महाविद्यालयों द्वारा तैयार किए गए पाठ्यक्रम अन्य प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस/स्वशासी महाविद्यालय लागू कर सकेंगे। इस पाठ्यक्रम के लिए किसी प्रकार की छात्रवृति देय नहीं होगी। विद्यार्थियों से इस भाषा के अध्ययन, परीक्षा व प्रमाण-पत्र हेतु प्रति विद्यार्थी 500 रुपये. का शुल्क लिया जायेगा। यदि कोई विद्यार्थी एक बार में सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम पूर्ण नहीं कर पाता है, तो सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम पूर्ण करने हेतु विद्यार्थी को एक और अवसर प्रदान किया जा सकेगा।