एक ऐसा गांव जहां लोग कम और गुड्डे ज्यादा रहते हैं..


स्टोरी हाइलाइट्स

हम आपको जापान के ऐसे गांव में ले जा रहे हैं जो लोगों से खाली होता जा रहा है लेकिन गुड्डे गुड़ियों से भरता जा रहा है|

जैसा कि आप जानते हैं कि दुनिया के कई देश आबादी की कमी से जूझ रहे हैं| उन्हीं में से एक है जापान, जापान के कई गांव ऐसे हैं जो खाली हो चुके हैं| लोग अकेलेपन से ट्रस्ट हो गए हैं| ये अकेलापन दूर करने अनूठे तरीके इस्तेमाल कर रहे हैं| हम आपको जापान के ऐसे गांव में ले जा रहे हैं जो लोगों से खाली होता जा रहा है लेकिन गुड्डे गुड़ियों से भरता जा रहा है|

दुनिया अजीबो गरीब रहस्य रोमांच से भरी हुई है| दुनिया में अनेक प्रकार के लोग रहते हैं| इस दुनिया में अनोखे गांव भी हैं जहां की कहानियां सदियों से लोगों को गुदगुदाती रही है| 

आज हम आपको news पुराण के साथ ले चलेंगे एक ऐसे गांव जो है गुड्डों का गांव|

क्या आपने कभी गुड्डे-गुड्डियो का गांव देखा है...

वैसे तो गांव लोगों के रहने के लिए होता है लेकिन ऐसा भी एक गांव है जहां लोगों से ज्यादा गुड्डे गुड़िया रहते है|

नागोरो जापान के शिकोकू की घाटियों में स्थित एक धीरे-धीरे सिकुड़ता हुआ गांव है। गुड़ियों से आबाद यह गांव अजीबोगरीब है। इसके निवासियों ने इस गांव को गुड्डे गुड़ियों का गांव बना दिया है। ग्यारह साल पहले, सुकिमी अयानो नागोरो में घर लौट आई। अकेलेपन का सामना करते हुए, उसने गाँव को गुड़ियों से भर दिया, प्रत्येक doll एक पूर्व निवासी का प्रतिनिधित्व करती है। वर्तमान में गांव में लगभग 350 आदमकद गुड़िया हैं।

स्थानीय स्कूल अब गुड़ियों से भर गया है जो कक्षा शुरू होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। भूसे से बनी अजीबोगरीब डॉल्स को पुराने कपड़े पहनाए जाते हैं। एक बार बगीचे में काम करने के बाद, सुकिमी ने अपने पिता के जैसी पहली गुड़िया बनाई और फिर वह परिवार के अन्य सदस्यों के समान गुड़िया बनाई। 

10 साल बाद भी उसका काम जारी है। प्रत्येक गुड़िया उस स्थान पर स्थित होती है जहां पहले कोई वैसा ही रहता था। इसलिए गाँव में टहलते हुए, खेत में काम करते हुए, नदी में मछली पकड़ने या सड़क के किनारे बैठकर आपको निहारते हुए डॉल्स मिलेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जापान के भीतरी द्वीप में शिकोकू नाम का एक ये गांव है जहां ज्यादातर लोग जा चुके है। दरअसल ये गांव भी ऐसे कई गांवों में से एक है जिसे लोग किसी ना किसी कारण से खाली कर चुके है।

कहा जाता है कि अब शिकोकू में केवल 35 लोग बचे हैं। वहीं सुकीमी अयानो नाम की महिला गांव छोड़ चुके अपने रिश्तेदारों और गांव वालों की याद में गुड्डे-गुड्डीयां बनाती रहती है।

सुकीमी इन गुड्डे गुड़ियों को प्यार से ताउ तो किसी को चाचा कहती है। सुकीमी सालों पहले अपने पिता की देखरेख करने के लिए ओसाका से गांव वापस आई थी।

पिता की मृत्यु के बाद और धीरे-धीरे कम होती जनता के बीच उसने तय किया कि वो यहां से नहीं जाएगी और एक नये तरह का गांव तैयार करेंगी। वो हर दिन अपना सारा काम निबटाकर किसी ना किसी गांव वाले को सिलने बैठ जाती हैं।

काकाशी नो सातो, जिसे डॉल विलेज भी कहा जाता है, शिकोकू द्वीप पर मियोशी जिले में, समुद्र तल से 800 मीटर ऊपर, इया घाटी में गहरी स्थित है। आधिकारिक तौर पर नागोरो नाम के इस छोटे से जापानी गाँव में मानव निवासियों की तुलना में दस गुना अधिक गुड्डे हैं। इन गुड़ियों को अजीब माना जा सकता है, लेकिन ये गांव जापान में जनसंख्या की महत्वपूर्ण समस्या को चित्रित करता है।


 

पुराण डेस्क

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