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ब्यूरोक्रेटिक फैसले के राजनीतिक मायने और असर

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरह से अपने फ़ैसलों से पूरे देश को चौंकाते हैं, उसी तरीके से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्य सचिव के कार्यकाल के आखिरी दिन इकबाल सिंह बैंस को छह माह की सेवावृद्धि दिलाकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों को चौंकाया है। मध्यप्रदेश में अगले मुख्य सचिव को लेकर कई दिनों से मीडिया में कयासों का दौर चल रहा था। यहां तक कि वर्तमान मुख्य सचिव के कार्यकाल के आखिरी दिन भी बड़े मीडिया समूहों में ऐसी खबरें प्रकाशित हुई कि मुख्य सचिव सेवानिवृत्त हो रहे हैं। नए बनने वाले मुख्य सचिव के संभावित दावेदारों के नाम भी प्रकाशित किए गए..!

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विस्तार

भारत सरकार की ओर से इकबाल सिंह बैंस की सेवावृद्धि के जो आदेश जारी किए गए हैं, उसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा उनकी सेवावृद्धि के लिए केंद्र को भेजे गए अर्धशासकीय पत्र की तारीख 9 नवंबर 2022 बताई गई है। मुख्य सचिव की सेवानिवृति के तीन सप्ताह पहले सेवावृद्धि के भेजे गए प्रस्ताव को गोपनीय बनाए रखा गया और अंतिम दिन सेवावृद्धि का आदेश जारी हो सका है। 
 
प्रधानमंत्री की स्वीकृति के बिना यह आदेश जारी नहीं हो सकता और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रधानमंत्री से बातचीत के बिना यह प्रस्ताव भेजा नहीं जा सकता। इस प्रकार साफ है कि पीएम मोदी और सीएम शिवराज के बीच राजनीतिक कदमताल बेमिसाल है। राजनीतिक हलकों में मोदी और शिवराज के बीच रिश्तों को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जाते रहे हैं। अक्सर प्रदेश में राजनीतिक परिवर्तन के लिए नई-नई तारीख बताई जाती रहती हैं लेकिन हर बार शिवराज सिंह ने राजनीतिक अटकलों और कयासों को अपने काम से गलत साबित किया है। 

हिमाचल प्रदेश और गुजरात चुनाव परिणामों के बाद जिन राज्यों में चुनाव संभावित हैं, उनमें मध्यप्रदेश भी शामिल है। 2024 के लोकसभा चुनाव के पहले जिन राज्यों में चुनाव होना है उनमें बीजेपी आलाकमान की ओर से राजनीतिक परिवर्तन और जमावट की खबरें लगातार आ रही हैं। राजनीतिक हलकों में ऐसा माना जा रहा था कि बीजेपी मध्यप्रदेश में भी चुनाव के पहले नए समीकरण बनाने का प्रयास कर सकती है। मुख्य सचिव की सेवावृद्धि के ब्यूरोक्रेटिक फैसले के राजनीतिक मायने और असर भविष्य में होने के संकेत हैं। अब लगभग यह तय माना जा रहा है कि भाजपा आलाकमान की ओर से मध्यप्रदेश में अगला चुनाव शिवराज सिंह चौहान की लीडरशिप में ही लड़ा जाएगा। 

शिवराज सिंह चौहान को राजनीतिक जादूगर भी कहा जा सकता है। जब-जब यह राजनीतिक कयास लगाए जाते रहे कि शिवराज सिंह चौहान को राजनीतिक रूप से झटका लग सकता है तब-तब उन्हें नई ताकत मिलती रही है। नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय राजनीति में उभार और मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में शिवराज सिंह चौहान के कामकाज को लेकर शुरुआत से ही अटकलों का बाजार गर्म रहा है। 

शिवराज सिंह चौहान ने अपनी कार्यशैली से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किस सीमा तक प्रभावित किया है इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री मध्यप्रदेश में विभिन्न कार्यक्रमों में लगातार शामिल होते रहे हैं। पिछले दिनों महाकाललोक के लोकार्पण समारोह और पालपुर कूनो में प्रधानमंत्री आ चुके हैं। आगामी महीनों में इन्वेस्टर समिट और प्रवासी दिवस के कार्यक्रम में भी प्रधानमंत्री का आना तय हो चुका है। 

सरकारी सिस्टम में सेवावृद्धि के कई मायने निकाले जाते हैं। सिस्टम में व्यक्तिवाद को स्थान मिलना चाहिए या नहीं इस पर अलग-अलग राय है। जहां तक मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस का सवाल है, उनका करियर निश्चित रूप से उत्कृष्ट रहा है। पहले भी कई मुख्य सचिवों को कार्यकाल में सेवावृद्धि मिलती रही है। इस फैसले से शिवराज सिंह चौहान ने केंद्र में अपने महत्व को स्थापित किया है। इकबाल सिंह बैंस तब से शिवराज सिंह चौहान से प्रशासनिक संपर्क में है जब वे पहली बार मुख्यमंत्री बने थे।  
 
शिवराज सिंह चौहान ने बीजेपी में मुख्यमंत्री रहने का इतिहास रचा है। अभी 17 साल से वह मुख्यमंत्री के पद पर काम कर रहे हैं। बीजेपी गुजरात में 27 साल से शासन में हैं। वहां भी मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी 15 साल तक काम कर चुके हैं। अब शिवराज सिंह चौहान बीजेपी में सबसे अधिक कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री बन चुके हैं। उनके इस रिकॉर्ड को तोड़ना फिलहाल संभव नहीं लग रहा है। 

साल 2005 में शिवराज सिंह चौहान ने पहली बार मुख्यमंत्री का पद संभाला था। उसके बाद तीन चुनाव उनकी लीडरशिप में लड़े गए हैं। बीजेपी की तरफ से टीम के मुख्य कप्तान शिवराज सिंह अभी तक बने हुए हैं जबकि मुकाबले वाली टीम कांग्रेस में हर चुनावी मैच में कप्तान बदलते रहे हैं। 2008 के चुनाव के समय सुरेश पचौरी कांग्रेस अध्यक्ष थे। वहीं 2013 के चुनाव के समय कांतिलाल भूरिया फिर अरुण यादव और 2018 के चुनाव के समय कमलनाथ कांग्रेस के कप्तान थे। 

साल 2018 के चुनाव में जरूर शिवराज सिंह चौहान को जनादेश के कारण सत्ता छोड़नी पड़ी थी। कांग्रेस की टीम में बिखराव के बाद फिर से उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली है। अब प्रदेश में होने वाला अगला चुनाव शिवराज सिंह चौहान के राजनीतिक भविष्य के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण होगा। 

एंटी इनकंबेंसी सरकारों के लिए विपरीत स्थितियां पैदा करती रहती है। बीजेपी इस पर सतर्कता भी बरतती है। गुजरात में तो चुनाव के पहले मुख्यमंत्री सहित पूरी कैबिनेट को बदल दिया गया था। कर्नाटक में भी बीजेपी ने लीडरशिप चेंज की है। साल 2023 में जिन राज्यों में चुनाव होना है उनमें राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश शामिल हैं। मध्यप्रदेश अकेला राज्य है जहां बीजेपी की सरकार है। मुख्य सचिव को सेवावृद्धि देने के फैसले से केंद्रीय नेतृत्व की यह मंशा जाहिर हो रही है कि अगला चुनाव भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर हो लेकिन लीडरशिप शिवराज सिंह चौहान की ही रहेगी। 

प्रदेश के चुनाव में लगभग एक साल बचा है। प्रशासनिक जमावट के साथ ही जनता के बीच सत्ता विरोधी रुझान को नियंत्रित करने के लिए सतत प्रयासों की आवश्यकता है। शिवराज सिंह पब्लिक कनेक्ट के नेता हैं। निश्चित रूप से जनता की नब्ज पर उनका हाथ होगा। भारत जोड़ो यात्रा की सफलता के साथ कांग्रेस भी उत्साहित दिखाई पड़ रही है। 

बीजेपी में शामिल होने के बाद सिंधिया के प्रभाव वाले क्षेत्रों में मूल बीजेपी और सिंधिया के समर्थकों के बीच तालमेल पर सवाल उठते रहते हैं। इस ओर भी बीजेपी संगठन को ध्यान देने की जरूरत होगी। शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय नेतृत्व में अपनी अनडिस्प्यूटेड लीडरशिप को मान्यता का राजनीतिक संदेश देने में सफलता प्राप्त कर ली है। अब अगले चुनावों में जनादेश से बीजेपी की सत्ता को बनाए रखने की चुनौती उनके सामने है।