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संविधान बचाने का नहीं जगमगाने का वक्त

सार

लोकतंत्र के महापर्व के बीच आस्था का महापर्व रामनवमी अयोध्या में भव्य राम मंदिर में मनाई जा रही है. सूर्य तिलक से आस्था का राजतिलक भारत के सिंहासन पर लोकतंत्र और संविधान का राजतिलक कर रहा है..!!

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विस्तार

    राम मंदिर में भव्य रामनवमी लोकतंत्र की जागी कुंडलिनी का सुफल है. कुंडलिनी जब जगती है, तो चमत्कार होते हैं. भारत के लोकतंत्र में आज जो चमत्कार हो रहे हैं, वह लोकतंत्र की कुंडलिनी जागरण से ही, संभव हुआ है. 500 साल बाद भगवान राम अपने भव्य मंदिर में, रामनवमी मना रहे हैं. भ्रष्टाचार के आरोपी मुख्यमंत्री जेल जा रहे हैं. कश्मीर में 370 हटने के बाद, भारत का तिरंगा चारो तरफ़ लहरा रहा है. 

    राजनीतिक दलों के खातों के हिसाब हो रहे हैं. जो परिवार राजनीति के मसीहा हुआ करते थे, लोकतंत्र आज उन्हें सड़कों पर दौड़ा रहा है. गांव, गरीब, जाति, धर्म जो कभी वोट बैंक हुआ करते थे, वह लोकतंत्र के नायक की भूमिका निभा रहे हैं. भारत की स्वदेशी संसद लोकतंत्र के हिमालय के रूप में खड़ी है. संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण समानता की लोकतंत्र की खूबसूरती को चार चांद लगा रहा है.

    लोकसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग दो दिन बाद हो जाएगी. यह रामनवमी भारत में जागी लोकतंत्र की कुंडलिनी को नई शक्ति और मजबूती प्रदान करेगी. जब कुंडलिनी जागती है, तो भीतर का कूड़ा-करकट, कंकड़-पत्थर हट जाता है. चुनाव में जो प्रमाद और उन्माद दिखाई पड़ रहा है, वही कूड़ा-करकट है, जो कुंडलिनी जगाने के कारण तड़फड़ा रहा है. 

    चुनाव में यह भी डर फैलाया जा रहा है, कि अगर नरेंद्र मोदी 400 पार कर जाएंगे तो फिर भारत में भविष्य में चुनाव नहीं होंगे. संविधान खतरे में आ जाएगा. लोकतंत्र पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं. भारत और पाकिस्तान एक साथ आजाद हुए थे. भारत आज कहां खड़ा है और पाकिस्तान कहां पहुंच गया है. पीएम नरेंद्र मोदी चुनावी सभाओं में, भारत के संविधान की पवित्रता की बात करते हैं.वह कहते हैं, कि जो पाकिस्तान कभी भारत को आंख दिखाया करता था, वह आज कटोरा लेकर घूम रहा है. 

    भारत के संविधान में अब तक 106 बदलाव हो चुके हैं. आखिरी बदलाव नारी वंदन विधेयक के रूप में किया गया है. लोकतंत्र की मंशा और लोगों की जरूरत के हिसाब से, संविधान में परिवर्तन सरकारों का दायित्व है, लेकिन लोकतंत्र समाप्त होने का डर दिखाकर संविधान की रक्षा करने की, जो राजनीतिक दल बातें कर रहे हैं, वह दिवा स्वप्न देख रहे हैं. भारत के संविधान के मूल ढांचे को कोई ताकत अब बदल नहीं सकती है.

    पीएम मोदी की इस बात पर भरोसा किया जाना चाहिए, कि भारत के संविधान का मूल ढांचा अब तो डॉक्टर अंबेडकर स्वयं आकर बदल नहीं सकते. संविधान की पवित्रता सियासी अपवित्रता से बहुत ऊपर है. सियासी लाभ के लिए लोकतंत्र और संविधान को लेकर भय पैदा करना, हारी हुई मानसिकता का ही प्रमाण हो सकता है.

    भारत का संविधान ना होता तो लोकतांत्रिक सत्ता परिवर्तन मोदी महान तक न आ पाता. यह भारत का संविधान ही है, कि परिवारवाद और जातिवाद को पीछे छोड़कर गांव गरीब की झोपड़ी से निकलकर आम व्यक्ति, प्रधानमंत्री की कुर्सी पर आसीन हो जाता है. भारत का वर्तमान लोकतांत्रिक परिदृश्य खुशियां मनाने का है. आनंद मनाने का है. संविधान के जगमगाने का है. राष्ट्र की गरिमा और महिमा को गुनगुनाने का है.

    ख़तरे में ना लोकतंत्र है और ना ही ख़तरे में संविधान है. ख़तरे में है संविधान के नाम पर की जाने वाली सियासी लूट. संविधान की शपथ लेकर भ्रष्टाचार करने वाले हाथ ख़तरे में हैं. ख़तरे में परिवारवाद है. ख़तरे में जातिवाद है. ख़तरे मे अल्पसंख्यकवाद और बहुसंख्यकवाद है. ख़तरे में विभाजन की सोच है. सर्वधर्म समभाव पर आधारित बीजेपी सरकार की योजनाएं लोकतंत्र की गरिमा बढ़ा रही हैं. तुष्टिकरण की बातें राजनीतिक दलों की मजबूरी है. पढ़ाई-लिखाई दवाई और मकान की योजनाओं में जाति और धर्म का कोई भेद नहीं होना लोकतंत्र का डंका बजा रहा है.

    भारत की आस्था-संस्कृति और लोकतंत्र साथ-साथ चल रहे हैं. प्रगति में कोई भेदभाव नहीं है. लोकतंत्र में गरीबों की हिस्सेदारी बढ़ी है. किसी भी राजनीतिक दल का फेल्योर लोकतंत्र का फेल्योर नहीं हो सकता. हम जीते तो लोकतंत्र पास और दूसरा जीते तो लोकतंत्र फेल. ऐसा प्रायोजित लोकतंत्र भारत में नहीं चल पाएगा. जहां जीते वहां बल्ले-बल्ले और जहां हारे वहां  EVM का रोना यह दोगलापन अलोकतांत्रिक है.

    सब आएंगे सब जाएंगे लेकिन संविधान और लोकतंत्र हमेशा रहेगा भारत की संस्कृति और धर्म जैसे शास्वत और सनातन हैं वैसे अब लोकतंत्र भी सनातन ही रहेगा. लोकतंत्र भारत की आत्मा है. जिनमें भारत बसता है, उनमें लोकतंत्र के ख़तरे का विचार उत्पन्न नहीं हो सकता. इमरजेंसी लगी थी, तब भी लोकतंत्र बाधित हुआ था. लेकिन फिर लोकतंत्र खड़ा हुआ और तेज गति से आगे बढ़ता गया. 

    रामनवमी का यह पर्व भारत के अतीत और भविष्य की बुनियाद बनने जा रहा है. इसके लिए अतीत के संघर्ष भविष्य के बुलंद इरादे के रूप में हमारे सामने हैं. भगवान राम की प्रतिमा पर रामनवमी के दिन सूर्य तिलक की तैयारी आस्था के अभिषेक के साथ ही आधुनिकता और भारत की प्रगति का उदाहरण पेश कर रहा है. भगवान राम की प्रतिमा पर सूर्य की आभा भारत में लोकतंत्र की आभा बिखेरेगी. इसमें किसी को भी संदेह नहीं होना चाहिए.