वनों में सर्वेक्षण एवं अन्वेषण में डीएफओ अब एक बार से अधिक आपत्ति नहीं ले सकेंगे


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स्टोरी हाइलाइट्स

राज्य शासन के वन विभाग ने आदेश जारी कर दिया है..!

भोपाल। प्रदेश के वन क्षेत्रों में सर्वेक्षण एवं अन्वेषण कार्य जैसे खनन एवं सडक़, रेलवे, जल विद्युत आदि की विकासात्मक परियोजनाओं हेतु अनुमति देने हेतु अये आवेदन पर अब डीएफओ एक बार से अधिक आपत्ति नहीं ले पायेंगे तथा ऐसा करना पाया जाने पर माना जायेगा कि अनुमति देने में जानबूझकर विलम्ब किया जा रहा है तथा ऐसी स्थिति में डीएफओ के विरुध्द अनुशासनात्मक कार्रवाई की जायेगी। इस संबंध में राज्य शासन के वन विभाग ने आदेश जारी कर दिया है।

आदेश में वन क्षेत्रों में सर्वेक्षण एवं अन्वेषण हेतु प्रति दस वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अनुमति की प्रक्रिया भी तय कर दी गई है। तांबा, सीसा, जस्ता और यूरेनियम जैसे डिपाजिटों हेतु 6 इंच व्यास तक के अधिकतम 62 बोरहोल ड्रीलिंग के जरिये करने की अनुमति तथा लेंस के आकार के खनिज डिपाजिट जिन्हें लेटिक्युलर अयस्क निकाय कहा जाता है, हेतु 6 इंच व्यास तक के अधिकतम 80 बोरहोल की अनुमति डीएफओ आवेदन प्राप्ति के 15 दिवस के अंदर देंगे परन्तु प्रति वर्ग किमी अधिकतम 25 बोरहोल करने की ही अनुमति रहेगी। 

आदेश में यह भी कहा गया है कि डीएफओ आवेदन प्राप्त होने पर उसका परीक्षण 2 दिवस के भीतर पूर्ण करेंगे तथा परीक्षण के दौरान आवेदन के प्रस्ताव में कोई कमी पाई जाती है तो समस्त कमियों को एक ही बार में अंकित कर 3 दिवस के भीतर आवेदक संस्था से पूर्ण कराई जायेगी।

सर्वेक्षण एवं अन्वेषण में यदि वृक्षों की कटाई शामिल है, तो नेट प्रेजेन्ट वेल्यु, प्रचलित दरों के अनुसार 0.1 हैक्टेयर प्रति बोरहोल की दर से ली जायेगी। यदि नेट प्रेजेन्ट वेल्यु आवेदक संस्था द्वारा डिमांड नोट जारी होने के 15 दिवस के भीतर राज्य कैम्पा मद में जमा नहीं की जाती है तो देय राशि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देना होगी। पिटिंग एवं ट्रेचिंग जैसी गतिविधियां भी सर्वेक्षण का हिस्सा मानी जायेंगी लेकिन इसकी अनुमति बिना किसी नेट प्रेजेन्ट वेल्यु शुल्क के दी जायेगी।