भोपाल: प्रदेश में बाघों की बढ़ती मौतों और शिकार की घटनाओं को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट जबलपुर ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक को विस्तृत स्थिति रिपोर्ट 25 फरवरी को दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने विशेष रूप से अप्राकृतिक मौतों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा।
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने कहा, “बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक को निर्देशित किया जाता है कि वे बाघों की रिपोर्ट की गई मौतों के संबंध में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करें तथा जहां-जहां अप्राकृतिक मौतें हुई हैं। उन मामलों में की गई कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत करें। साथ ही यह भी बताया जाए कि दोषी पाए गए व्यक्तियों के खिलाफ अभियोजन चलाने और उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई।”
वर्ष 2025 में 54 टाइगर्स की मौत
प्रदेश हाईकोर्ट ने साफ़ किया यह जनहित याचिका पर्यावरण कार्यकर्ता अजय दुबे द्वारा दायर की गई, जो प्रयत्न नामक पर्यावरण समूह के संस्थापक सदस्य और सचिव हैं। याचिका में कहा गया कि राज्य में कुल 785 बाघों में से वर्ष 2025 में ही 54 बाघों की मौत हो चुकी है, जो गंभीर चिंता का विषय है। याचिका में मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि कई बाघ संदिग्ध और रहस्यमय परिस्थितियों में मारे जा रहे हैं, जिससे संरक्षण, निगरानी और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के आधिकारिक आंकड़ों का उल्लेख करते हुए याचिका में कहा गया कि करीब 57 प्रतिशत बाघों की मौतें अप्राकृतिक कारणों से हुई हैं, जिनमें शिकार, करंट लगना या अन्य संदिग्ध परिस्थितियां शामिल हैं। हालिया सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट आदित्य सांघी ने अदालत को बताया कि 20 जनवरी, 2026 की पिछली सुनवाई के बाद भी बाघों की और मौतें सामने आई हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाइकोर्ट ने उपरोक्त निर्देश जारी किए और मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी 26 को निर्धारित की।
गणेश पाण्डेय