भोपाल: राज्य विधानसभा में मंगलवार को पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल द्वारा दिए गए सवाल जवाब में बड़ा ही चौकाने वाला तथ्य उभर कर प्रकाश में आया कि पिछले पांच वर्षो में 1 प्रतिशत मजदूरों को भी पुरे 100 दिन का रोजगार नहीं मिल पाया है। यही नहीं, मनरेगा अंतर्गत वन अधिकार पट्टा धारकों को वर्ष में 150 दिन रोजगार देने का प्रावधान है पर 24 जिलों में मजदूरों का आंकड़ा शून्य रहा है।
यह तस्वीर कांग्रेस विधायक प्रताप सिंह ग्रेवाल द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में दी गई जानकारी से उभरी है। दिलचस्प पहलू यह भी है कि मनरेगा के तहत वर्ष 2020-21 में व्यय राशि 9338.68 करोड़ से घटकर 2024-25 में 6731.57 करोड़ हो गई तथा इस अवधि में केंद्रांश 8453.2 करोड़ से घटकर 6226.49 करोड़ हो गई।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने बताया कि वर्ष 2021 में एक करोड़ 70 लाख 19 हजार 681 मजदूर पंजीकृत है। जिसमें से 1 लाख 23 हजार 624 परिवारों को ही पूरे 100 दिवस का रोजगार मिला। इसी प्रकार वर्ष 2022 में 1 करोड़ 81 लाख 42 हजार 207 मजदूर पंजीकृत है और 63 हजार 898 परिवारों को ही पुरे 100 दिवस का रोजगार मिला। वर्ष 2023 में 1 करोड़ 69 लाख 7 हजार 207 पंजीकृत मजदूरों में से 40 हजार 588 और वर्ष 2024 में 1 करोड़ 70 लाख 42 हजार 207 मजदूरों में से 30 हजार 420 परिवारों को ही 100 दिवस का रोजगार मिला। वर्ष 2025 में 1 करोड़ 86 लाख 57 हजार 80 मजदूर पंजीकृत है जिसमे से 32 हजार 560 परिवारों को ही पूरे 100 दिवस का रोजगार मिला है।
| मनरेगा के पोर्टल पर वर्ष जॉबकार्ड धारी की संख्या |
| वित्तीय वर्ष जॉबधारी की संख्या |
| 2021 -2022 8665149 |
| 2022 -2023 8989804 |
| 2023 -2024 8812205 |
| 2024 -2025 9520454 |
| 2025 -2026 9815101 |
आदिवासी मजदूरों को भी नहीं मिली मजदूरी
कांग्रेस विधायक ग्रेवाल के प्रश्न के उत्तर में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री पटेल ने बताया कि मनरेगा अंतर्गत रजिस्टर्ड मजदूरों में 33.72 प्रतिशत आदिवासी मजदूर है। लकिन वर्ष 2025 - 2026 में 24 जिलों में एक भी आदिवासी मजदूर को 150 दिन का रोजगार नहीं दिया। 4 आदिवासी जिलों में मात्र एक परिवार को ही 150 दिन का रोजगार मिला। आदिवासी जिला झाबुआ में 150 दिन रोजगार का आंकड़ा शून्य न्य रहा। सबसे ज्यादा अलीराजपुर में 112 परिवारों, छिंदवाड़ा में 28 , धार में 21, मंडला में 17, दमोह में 16 आदिवासी परिवारों को मजदूरी मिलीl
सरकार ने मनरेगा को बर्बाद कर दिया : ग्रेवाल
प्रताप ग्रेवाल ने बताया की मनरेगा योजना बनाने का उद्देश्य गांव के अंदर व्याप्त बेरोजगारी को खत्म करना था। लेकिन बीजेपी सरकार ने मनरेगा को बर्बाद कर दिया और मनरेगा सहित पूरे पंचायत सिस्टम को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया। उनका कहना है कि विगत कई वर्षो से लगातार मजदूरी की मांग बढ़ रही है। लेकिन सरकार गांव के अंदर रोजगार नहीं दे पा रही है। मजदूर पलायन करने को मजबूर है।
| साल-दर-साल रोजगार मांगने वाले श्रमिकों की संख्या |
| वर्ष श्रमिको की संख्या |
| 2021 -2022 12,195,233 |
| 2022 -2023 9,299,519 |
| 2023 -2024 7,631,549 |
| 2024 -2025 6,986,086 |
| 2025 -2026 6,547,787 |
कोविड के समय वर्ष 2021 में सर्वाधिक जाबकार्ड से नाम काटे
विधायक ग्रेवाल ने आरोप लगाया कि कोविड के समय जब रोजगार की सर्वाधिक जरुरत थी, उस समय सरकार ने सर्वाधिक नाम जॉब कार्ड से हटा दिए। इसके कारण प्रदेश में लगातार बेरोजगारी बड़ी और ग्रामीण मजदूरों को मजबूरन प्रदेश से पलायन करना पड़ा।
| वर्ष नाम कटने वाले श्रमिक की संख्या |
| 2021 4,343,378 |
| 2022 771,730 |
| 2023 2,024,552 |
| 2024 191,183 |
| 2025 123,524 |
गणेश पाण्डेय