भूल और पछतावा (Mistakes and Repentance)

भूल और पछतावा

जो मनुष्य कर्म करता है, वह भूल भी करता है। जो मनुष्य कुछ कर्म ही नहीं करता, वह भूल भी नहीं करता। भूल करना और पछतावा भी करना मानव-स्वभाव है वास्तव में, भूल को स्वीकार करना ही उसका अन्त होता है। एक बुद्धिमान् मनुष्य विगत भूलों अथवा दुष्कर्मों पर चिरकाल तक सोच-विचार नहीं करता रहता और अत्यधिक पछतावे को मूर्खता मानकर त्याग देता है। वास्तव में, प्रत्येक मनुष्य वर्तमान में ही जीवित रहता है तथा अतीत से संबंध बनाए रखने में कुछ समझदारी नहीं होती, क्योंकि अतीत का अस्तित्व ही नहीं होता। अतीत तो अतीत है तथा वर्तमान में अतीत के कष्टों की अत्यधिक भावात्मक प्रतिक्रिया नहीं होनी चाहिए, क्योंकि वह वर्तमान को दूषित कर देगी। अतीत की छाया लम्बी और गहरी होती है, किन्तु वह मात्र छाया ही होती है। इसे तो अमान्य नहीं किया जा सकता कि पश्चात्ताप का मन पर निर्मलकारक प्रभाव होता है, किन्तु यदि देर तक चलता रहे तो वह नकारात्मक, अवरोधात्मक और विध्वंसात्मक हो जाता है। अवश्य ही आप विगत भूलों से शिक्षा ले सकते हैं तथा त्रुटिपूर्ण पगों को दृढता से वापस ले सकते हैं। काल को एक ऐसा मनुष्य कहा गया है, जिसके सिर का पीछे का भाग गंजा है तथा जिसे सामने के बालों से पकड़ा जा सकता है।

Mistakes and Repentance

None of us is infallible. He who acts commits mistakes also. He who does not act commits no mistakes. It is human to err and it is also human to repent over the error.
In fact, the realization of a mistake should mean the end of it. A wise man does not brood over the past mistakes and misdeeds and shakes off all remorse as silly. Everyone actually lives in the present and there is no sense in belonging to the past since it does not exist.
Past is past and done with and there should be no emotional reaction to the painful events of the past in the present as that would only man in. The shadow of the Past is long and deep but it is only a shadow. There is no denying that repentance has a purifying effect on the mind but if it is allowed to linger on, it becomes negative, obstructive and destructive. You have, of course, to take adequate lessons from the past mistakes and retract wrong steps with a strong will. Time is said to be like a person who is bald at the hind and can be caught by the forelock

PURAN DESK



हमारे बारे में

न्‍यूज़ पुराण (PURAN MEDIA GROUP)एक कोशिश है सत्‍य को तथ्‍य के साथ रखने की | आपके जीवन में ज्ञान ,विज्ञान, प्रेरणा , धर्म और आध्‍यात्‍म के प्रकाश के विस्‍तार की |
News Puran is a humble attempt to present the truth with facts. To spread the light of knowledge, promote scientific temper, inspiration, religion and spirituality in your life.


संपर्क करें

0755-3550446 / 9685590481



नवीनतम पोस्ट



समाचार पत्रिका


श्रेणियाँ