भोपाल: वन विभाग के इंदौर, उज्जैन और खंडवा सर्कल की शुक्रवार को वन मुख्यालय भोपाल में हुई। कार्यशाला में खराब और अधूरे प्रजेंटेशन को लेकर सीएफ इंदौर को पीसीसीएफ स्तर के अधिकारियों की नाराजगी का सामना करना पड़ा। यही नहीं, शीर्ष अफसरों ने सीसीएफ उज्जैन पर अपनी भड़ास निकाली। जबकि झाबुआ डीएफओ की बैठक में जमकर क्लास लगी। वरिष्ठ अधिकारियों ने झाबुआ डीएफओ को चेतावनी दी- ‘ऐसा लगता है वन मंडल बाबू चला रहे हैं, क्यों न आपको मुख्यालय बुला लिया जाए।’
वन भवन के 50 सीटर हॉल में आयोजित कार्यशाला में पीसीसीएफ (हॉफ) शुभरंजन सेन, पीसीसीएफ (वाइल्ड लाइफ) डॉ. समीता राजौरा, पीसीसीएफ (विकास) पुरषोतम धीमन सहित और अन्य अधिकारी शामिल हुए। बैठक में इंदौर, उज्जैन और खंडवा सर्कल के सीएफ मौजूद रहे, जबकि संबंधित डीएफओ और अन्य 13 सर्कलों के सीएफ ऑनलाइन जुड़े। शुरुआत इंदौर सर्किल से हुई।
इंदौर CF पीएन मिश्रा सभी पीसीसीएफ के निशाने पर रहे। पहले प्रस्तुतीकरण को लेकर सभी पीसीसीएफ ने उनकी क्लास ली और फिर पिछली कार्यशाला के एक्शन-टेकन रिपोर्ट में बार -बार "कार्यवाही की जा रही- कार्रवाई की जा रही", वाक्य को लेकर अफसर लाल-पीले हुए। एक पीसीसीएफ ने प्रतिप्रश्न किया कि इसका मतलब क्या है? उसके बाद वन धन केंद्र को लेकर जब सीएफ मिश्रा ने अत्याधुनिक गोडाउन और अन्य मसले पर पीसीसीएफ के समक्ष समस्याएं गिनाई तो उनका साथ डीएफओ अलीराजपुर ने नहीं दिया। उसके बाद बारी थी उज्जैन सीसीएफ अलोक पाठक की। न्यायलयीन प्रकरणों को लेकर शीर्ष अधिकारियों ने उन्हें भी आड़े हाथों लिया। सीएफ खंडवा बासु कनोजिया के साथ पीसीसीएफ अफसरों का रवैया विनम्रता भरा रहा। यह चर्चा का विषय रहा। पहले से तय था कि कार्यशाला की शुरुआत अल्फावेट से होगा पर इंदौर के बाद खंडवा की बारी थी किन्तु उज्जैन ccf को टारगेट कर दिया गया।
झाबुआ में वन मंडल बाबू चला रहे...!
झाबुआ डीएफओ भरत सोलंकीः इनका प्रजेंटेशन भी सवालों के घेरे में रहा। अधिकारियों ने प्रस्तुति को अधूरा और विसंगतियों से भरा बताया। वरिष्ठ अधिकारियों ने टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे किसी बाबू ने रिपोर्ट तैयार कर दी हो और डीएफओ ने उसे जांचने की जरूरत भी नहीं समझी। की टिप्पणी थी कि ऐसा लगता है कि वन मंडल बाबू चला रहे हैं। क्यों न आपको मुख्यालय बुला लिया जाय।
बाबू तो मुख्यालय भी चला रहे हैं..!
पीसीसीएफ जनों ने झाबुआ के संदर्भ में बोल दिया कि वन मंडल बाबू चला रहें हैं पर जब बात निकली तो मुख्यालय पर आकर टिक गई। मसलन, प्रशासन -2 में 25-25 साल से जमे बाबू राम जी शर्मा और सत्य नारायण सिंह डील कर रहें हैं। यहां तक कि वे रेंजरों और डिप्टी रेंजरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग तक में उनकी मर्जी चलती है। इसी प्रकार गोपाल शरण सक्सेना विजिलेंस में 35 साल से है। वह अपने मनमाफिक ही शिकायतों का निराकरण करता आ रहा। पूर्व में वन बल प्रमुख वीएन अम्बाड़े ने एक प्रकरण में सब कुछ रेंजर के पक्ष था तब भी अपनी सेवाकाल आदेश जारी नहीं करवा पाए। यानि विजिलेंस में कोई भी पीसीसीएफ अथवा एपीसीसीएफ रहे पर सक्सेना ही फाइलों का निराकरण करते आ रहें हैं। अनुसंधान एवं विस्तार और वित्त एवं बजट 20-20 साल से जमे कंप्यूटर ऑपरेटर दिल करते आ रहे हैं। विनीता विल्सन पहले मानव संसाधन एवं संरक्षण शाखा अपने हिसाब से संचालित करती थी और अब प्रोटेक्शन संचालित कर रही है। इनके ऊपर कई गंभीर आरोप भी लगे परंतु आज तक जांच नहीं। आईएफएस अफसर में सबसे तेज-तर्राट पीसीसीएफ मनोज अग्रवाल भी कैंपा शाखा में दो दशकों से जमे कंप्यूटर ऑपरेटर मोहन सिंह के इशारे पर काम कर रहें हैं। यानि कैंपा के बजट वितरण में मोहन सिंह का हस्तक्षेप रहता है।
गणेश पाण्डेय