मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद धार की भोजशाला एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गई है। अदालत ने एएसआई की सर्वे रिपोर्ट और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर माना है। कोर्ट ने यह भी कहा कि मुस्लिम पक्ष चाहे तो मस्जिद के लिए सरकार से अलग जमीन की मांग कर सकता है। इस फैसले के बाद अब अयोध्या की तरह काशी, मथुरा और देशभर के अन्य मंदिर-मस्जिद विवादों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। अब सवाल उठने लगा है कि क्या अयोध्या और भोजशाला के बाद काशी और मथुरा के मंदिरों पर भी फैसला आएगा? क्या पूरे भारत में जिन 299 मंदिरों को तोड़कर उन पर मस्जिद बनाने का दावा किया जाता है, उन मामलों में भी अब मुस्लिम पक्ष को चुनौती दी जाएगी? मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर मुस्लिम पक्ष का कहना है कि उसे ये फैसला स्वीकार नहीं है और वो सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती देगा।
कुल 10 केस, यूपी में सबसे ज्यादा
दरअसल, इस वक्त मस्जिद-मंदिर से जुड़े कुल 10 ऐसे मामले हैं, जो अदालतों में जा चुके हैं. इनमें उत्तर प्रदेश के सबसे ज्यादा 6 मामले हैं, जहां अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं और इसके बाद मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और कर्नाटक का एक-एक मामला है, जहां हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद और दरगाह प्राचीन मंदिरों को तोड़कर बनाई गई हैं।
अयोध्या की तरह संवेदनशील
बता दें कि भोजशाला का मामला अयोध्या मामले की तरह काफी संवेदनशील रहा है, जहां दो से ज्यादा बार हिंदू-मुसलमानों के दंगे हुए. इन दंगों की वजह यही थी कि मुस्लिम पक्ष भोजशाला परिसर को मस्जिद बताता है और हिन्दू पक्ष इसे देवी वाग्देवी यानी देवी सरस्वती का मंदिर कहता है और ऐतिहासिक साक्ष्य, दस्तावेज, पुस्तकें और शिलालेख भी यही दावा करते हैं।
पुराण डेस्क