ग्वालियर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पति-पत्नी के बीच विवाद से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक संबंधों के दौरान पति-पत्नी के बीच बने यौन संबंधों को धारा 377 के तहत अपराध नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर पति के खिलाफ दर्ज एफआईआर को आंशिक रूप से निरस्त कर दिया गया, जबकि दहेज, मारपीट और प्रताड़ना से जुड़े आरोपों पर सुनवाई जारी रहेगी।
भिंड में 2023 में महिला ने अपने पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ महिला थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप था कि शादी के समय 4 लाख रुपए नकद, सोने के आभूषण और घरेलू सामान देने के बावजूद ससुराल पक्ष 10 लाख रुपए और बुलेट मोटरसाइकिल की मांग कर रहा था।
मांग पूरी नहीं होने पर महिला के साथ मारपीट और मानसिक प्रताड़ना की गई। शिकायत में महिला ने पति पर जबरन आप्राकृतिक यौन संबंध बनाने का आरोप भी लगाया था। साथ ही ससुर पर गलत व्यवहार और धमकी देने की बात कही गई थी।
अन्य आरोपों पर जारी रहेगा ट्रायल
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दहेज मांग, मारपीट और प्रताड़ना जैसे आरोपों की सुनवाई जारी रहेगी। इन धाराओं में दर्ज एफआईआर को निरस्त नहीं किया गया है। यह फैसला वैवाहिक संबंधों और आपराधिक कानून की व्याख्या को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें अदालत ने अलग-अलग धाराओं के दायरे को स्पष्ट किया है।
10 लाख रुपए और बुलेट की मांग
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि शादी के समय ससुराल वालों को 4 लाख रुपए कैश, सोने के गहने और घरेलू सामान दिए गए थे। इसके बावजूद ससुराल वाले 10 लाख रुपए और बुलेट की मांग करते रहे। मांग पूरी नहीं करने पर प्रताड़ित किया गया। मारपीट की गई।
शिकायत में महिला ने अपने पति पर जबरन आप्राकृतिक यौन संबंध बनाने का आरोप भी लगाया। उसका कहना था कि दहेज की मांग पूरी न होने पर पति उसके साथ जबरदस्ती करता था, जिससे उसे शारीरिक और मानसिक परेशानी होती थी। ससुर पर भी गलत व्यवहार और धमकी देने के आरोप लगाए गए थे।
पुराण डेस्क