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देश की अर्थव्यवस्था का सीना चीरते “बैंकफ्रॉड”, बेबस तन्त्र, असहाय जनता और मौज करते घोटालेबाज़, लोकतंत्र के रक्षकों को कब आएगी लाज?सरयूसुत मिश्र

सार

बैंकों पर विश्वास डगमगाने लगा है, “फ्रॉड” अब जिंदगियां तबाह करने लगा है |  भारतीय अर्थव्यवस्था की धुरी बैंकों से आम लोगों का भरोसा कब और कैसे लौटेगा? बैंकों में अपनी गाढ़ी कमाई जमा करने वाले कितने लोगों को बैंक घोटाले का दर्द झेलना पड़ा है? कितनी शादियां टूटी हैं? कितने लोगों ने घबराहट में जान गवाई है?

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विस्तार

आम लोग जहां बैंकों के शिकार हुए हैं| वही अमीर एवं धोखेबाज लोगों ने बैंकों को शिकार बनाया है| बैंकों में इतने बड़े-बड़े घोटाले उजागर हो रहे हैं कि आम लोगों को बैंकों से डर लगने लगा है| एक दिन में बैंकों से जुड़ी दो खबरें पढ़ने को मिली| एक खबर शिपयार्ड कंपनी द्वारा बैंकों से 23 हजार  करोड़ ठगने  के फ्रॉड की है| दूसरी खबर गोल्ड लोन लेकर ऋण नहीं चुका पाने वाले एक लाख लोगों के गिरवी गोल्ड की नीलामी की है| नीरव मोदी, विजय माल्या और शिपयार्ड कंपनी के कर्ताधर्ता वो   घोटालेबाज हैं जो अरबों रुपए का बैंक फ्रॉड कर विदेशों में जाकर लग्जरी लाइफ गुजार रहे हैं|

हमारी कानूनी कमजोरी है कि हम उन्हें सजा दिलाने में सफल नहीं हो पा रहे हैं| बैंक घोटालों के लिए एक सरकार दूसरे सरकार पर आरोप लगा रही है कि घोटालेबाजों को लोन यूपीए सरकार के दौर में दिया था, दूसरी एनडीए पर आरोप लगा रही है| लोन किसी ने भी दिया था लेकिन बैंकों को लूटा तो गया है| पंजाब व महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक में भी  एक बड़ा घोटाला सामने आया था| साल 2019 में पीएमसी बैंक में 4 हजार 355 करोड़ रुपये का बैंक घोटाला हुआ था|

आम आदमी की जमा पूंजी लाखों जमा होने के बाद भी वे ₹50 हजार तक ही निकाल पा रहे थे| जिस विश्वास के साथ बैंक में लोगों ने पैसा जमा किया था| बैंक घोटाले के कारण न केवल विश्वास टूटा है बल्कि कईयों के तो जीवन बर्बाद हुए हैं| “गोल्ड गिरवी रखकर कर्ज लेना भारत की बहुत पुरानी परिपाटी रही है” जीने के लिए जब कोई रास्ता नहीं बचता तभी आदमी गोल्ड गिरवी रखता है| डूबते हुए घर परिवार को बचाने के लिए जब कोई विकल्प नहीं होता, तभी इंसान गोल्ड गिरवी रखता है, केवल गोल्ड नहीं, व्यक्ति अपना आत्मसम्मान भी गिरवी रखता है|

भारतीय बैंकिंग प्रणाली में जितनी गिरावट आई है उसका बड़ा कारण बैंकिंग स्कैम और फ्रॉड को माना जा सकता है| बैंक एक आम आदमी को लोन देने के लिए उसका क्रेडिट स्कोर देखते हैं| कम क्रेडिट स्कोर पर लोन नहीं दिया जाता| फिर अरबों रुपए के इतने बड़े बड़े लोन घोटाले कैसे हो गए? बिना बैंकिंग मिलीभगत के क्या ऐसी धोखाधड़ी या घोटाला हो सकता है? ये नीरव मोदी, विजय माल्या और ऋषि कमलेश अग्रवाल के द्वारा  बैंकिंग सिस्टम के अंदर घुस कर सिस्टम के साथ मिलकर खेला गया खेल है| भारत में किसी भी बैंक की कोई भी ब्रांच ऐसी नहीं होगी जहां घोटाले की कहानी नहीं हो| इन कहानियों के किरदार समाज के इज्जतदार लोग हैं| कोई “गरीब” बैंकों की मदद से आगे बढ़ा हो ऐसा सोचना केवल दिवास्वप्न है|

बैंक आज घोटाले और फ्रॉड के सेप्टिक टैंक बन गए हैं| जहां डालो वहीं से फ्रॉड निकलता है| फ्रॉड अब बैंकों के साथ-साथ चलता है| अब तो साइबर फ्रॉड उसमें और जुड़ गया है| ऑनलाइन और मोबाइल बैंकिंग से जहां सुविधा बढ़ी है वहीँ  फ्रॉड भी बढ़े हैं| बैंक अकाउंट डिटेल्स, अपना पिन, पासवर्ड, ओटीपी किसी को नहीं बताने का  जागरूकता अभियान, बैंकों का रोज का काम हो गया है, लेकिन फिर भी साइबर फ्रॉड रोज का किस्सा है|

सुरक्षित और  फ्रॉडलेस बैंकिंग प्रणाली बैंकों पर खोए विश्वास को बहाल कर सकती है| बैंक कभी राजनीतिक दखलंदाजी से दूर होते थे, लेकिन बैंकिंग सेक्टर में हाई लेवल पर नियुक्तियों के कारण, राजनीति बैंकिंग में भी घुस गई| सभी राजनीतिक दल, बैंकिंग घोटाले और फ्रॉड के लिए एक दूसरे पर आरोप लगाते हैं| बैंकों का डूबना मतलब जनता का डूबना है| बैंक घोटालों के कारण जिनकी खुशियां बर्बाद हुई हैं, जिनके सपने मरे हैं, उनसे पूछिए, यह बैंक कैसे उनके बेटे बेटियों के अरमानों और ईमानो को लील गए हैं|  पहले समाज में किसी भी सरकारी और सार्वजनिक सिस्टम पर भ्रष्ट होने का आरोप लगाया जाता था| लेकिन बैंकों पर कोई भी सवाल नहीं उठाता था| आज बिल्कुल उल्टा हो गया है| गली चौराहों पर बैंक घोटाले की चर्चा आम है| चुनावी चौपालों पर  बैंक फ्रॉड का मुद्दा सिस्टम के खिलाफ गरमाया रहता है|

केंद्र सरकार ने नोटबंदी की थी, तब पुराने नोटों के बदलने में बैंकों द्वारा की गई कमीशनबाजी घर घर तक पहुंच गई थी| नोटबंदी का भरपूर लाभ बैंकों ने  उठाया था| जितने नोट छपे थे, लगभग सब बदल दिए गए हैं| आज फिर उतने ही नोट घर-घर में जमा हो गए हैं| यह सब बैंकों की बेईमानी के बिना कैसे संभव है? बैंकों के बड़े बड़े अफसर पकड़े भी गए और जेल भी गए हैं| लोन में घोटाला “प्रस्ताव” में आभासी वृद्धि के साथ शुरू होता है| जो भी संपत्तियां लोन के लिए गिरवी रखी जाती हैं, उनका मूल्यांकन बढ़ा चढ़ाकर करने की मिलीभगत, खातों के एनपीए होने पर डूबने के अलावा कोई रास्ता नहीं छोड़ती| केंद्र सरकार ने NPA खातों के लिए बैड बैंक की स्थापना की है| यह बैंक एनपीए खातों को दूसरे बैंकों से लेगा और संपत्तियों का विक्रय करेगा| एनपीए खातों के लिए जिम्मेदार “BAD” अफसरों बैड उद्योगपतियों का हिसाब कौन करेगा? बैड बैंकिंग सिस्टम को बेनकाब कैसे किया जाएगा?

बैंकों को नहीं सुधारा गया तो देश को बैकफुट पर जाना होगा| देश के आर्थिक अपराधियों को बेनकाब करना होगा| आर्थिक अपराधी यानी राष्ट्र का अपराधी| पहले तो बैंकों की पहुंच आम आदमी तक कम ही होती थी| जनधन खातों के बाद यह पहुंच बढ़ी है| लेकिन बैंकों में रखें जनधन को धोखे से लूटने वालों की तादाद भी बढ़ी है| गोल्ड गिरवी रखकर लोन लेने वाले मजबूरों के आत्मसम्मान को बचाने की जरूरत है| गोल्ड लोन के लिए गिरवी रखे गोल्ड की नीलामी भारतीय समाज पर दाग होगी| डूबते को बचाने में भारतीय संस्कृति और समाज का कोई जवाब नहीं है|

कोरोना महामारी के अल्प प्रलय काल में जीवन के लिए सब कुछ गंवाने वालों के मूंछ और सिर की नीलामी रुकना चाहिए| गोल्ड लोन वालों को लोन जमा करने के लिए समय मिलना चाहिए| जब अरबों के घोटाले बाज बचे हुए हैं तो इन गरीबों का बचाना तो हमारा राजधर्म है| बैंक से धोखा कर लोग इज्जतदार हो गए, ईमानदार और कर्मवीर कर्जदार हो गए, घोटालेबाज़ चैन से सो रहे हैं और ईमानदार लोग बेचैन घूम रहे हैं|  बिल्लियां दूध की पहरेदार बनी हुई हैं, ईमानदार गरीब आदमी ₹2 उधार लेकर खुद से नजर नहीं मिला पाता और वह कैसे लोग हैं जो करोड़ों खाकर डकार  तक नहीं लेते| बैंक फ्रॉड की सजा इतनी सख्त होना चाहिए कि लोगों को फ्रॉड करते समय फांसी की सजा का भय रहे और लोग घोटाले करने से डरें|