बकस्वाहा जंगल बचाने के लिए पर्यावरण कार्यकार्ताओं ने प्रेसिडेंट और PM से लगे गुहार

बकस्वाहा जंगल बचाने के लिए पर्यावरण कार्यकार्ताओं ने प्रेसिडेंट और PM से लगे गुहार
मध्यप्रदेश(MP) के छतरपुर जिले के बकस्वाहा जंगल को हीरा खदान में बदलकर यहां दो लाख से ज्यादा हरे पेड़-पौधे काटे जाने की तैयारियों के विरोध में  पर्यावरण प्रेमियों ने मोर्चा खोल दिया है। 5 जून को पर्यावरण दिवस है इस अवसर पर पर्यावरण बचाओ अभियान के संस्थापक सदस्य,मार्गदर्शक एवं समाजसेवी बकस्वाहा जंगल बचाओ केम्पेन के समर्थन में बकस्वाहा जाएंगे। इस दिन बकस्वाहा पहुंचकर एक दिन का उपवास /जंगल भ्रमण/पेड़ों से चिपक कर बकस्वाहा जंगल बचाने के लिए चिपको आंदोलन का सांकेतिक शुरुवात/रक्षा सूत्र बांधकर बकस्वाहा जंगल बचाने का संकल्प लेंगे।



स्थानीय लोगों से भी संपर्क कर उन्हें पर्यावरण संरक्षण के हित में बकस्वाहा जंगल बचाने के लिए प्रेरित करेंगे । ग्रामवासियों के साथ पौधरोपण कर बकस्वाहा जंगल बचाने का संकल्प दिलवाएंगे।बकस्वाहा जंगल बचाने के लिए स्थानीय, सक्रिय और ईमानदार लोगों के नेतृत्व में हो रहे प्रयासों को "पर्यावरण बचाओ अभियान" द्वारा समर्थन, सहभागिता, सहयोग आदि किया जाएगा और सभी समूहों में एकता के लिए प्रयास किया जाएगा। इन्होने प्रधानमंत्री ,समस्त केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल,मुख्यमंत्री, सांसद,विधायक, मानव अधिकार आयोग और हरित न्यायाधिकरण से जंगल बचाने के लिए पत्र भी लिखा है| पत्र की प्रतिलिपि नीचे दी गयी है|



प्रति,
महामहिम राष्ट्रपति जी,
मान. प्रधानमंत्री जी,समस्त केंद्रीय मंत्री, महामहिम राज्यपाल,मुख्यमंत्री सांसद,विधायक, मानव अधिकार आयोग, हरित न्यायाधिकरण

विषय- बकस्वाहा जंगल बचाने बावत।

महोदय,
आप सभी से प्रार्थना है कि बकस्वाहा जंगल बचाने के लिए कुछ करने की कृपा करें .....

हमें हीरे नहीं हरियाली चाहिए!

कुदरत के और कहर का मत आव्हान करो
अपनी वसुंधरा का कुछ तो मान करो।

जंगल का शाप चाहिये या चाहिए वरदान!!!
आओ देने की जिद कर लें "बकस्वाहा" को जीवनदान।

ये केवल वन नहीं
हमारी श्वाशों का स्पंदन हैं
मत काटो इनको,
हमारे इष्ट हैं, नित इनको हमारा वंदन है।

जंगल का शाप चाहिये या चाहिए वरदान!!!

आओ देने की जिद कर लें "बकस्वाहा" को जीवनदान।

आप सभी भारत की व्यवस्था के महत्वपूर्ण अंग हैं इस कारण से आप लोगों की सुख सुविधाओं पर जनता के टैक्स की बहुत बड़ी राशि खर्च की जाती है ।इसके बदले आम जनता को आप सभी से अपेक्षा है कि अच्छा पर्यावरण, अच्छी शिक्षा, अच्छा स्वास्थ्य, अच्छी सुरक्षा, अच्छी न्याय व्यवस्था , सदभावना, नैतिक शिक्षा ,एकता आदि आमजन को दें परन्तु आज व्यवस्था बीमार है। गरीब की कहीं भी सुनवाई नहीं होती है, अतिपुंजीवाद के कारण से असमानता की खाई गहरी होती जा रही है ।देश में खुशहाली नहीं है। इसके मूल कारण गरीबी, भुखमरी, कुपोषण, भ्रष्टाचार, प्रदूषण, जातिवाद, सम्प्रदाय वाद, घृणा और नफरत हैं। देश के ही लोग एक दूसरे से ईर्ष्या करते हैं। यह हम सभी का दुर्भाग्य है।
देश में समस्याओं का अंबार लगा है परंतु हम इस पत्र में पर्यावरण के बारे में बात करेंगे।

भारत अपने आप में महान देश हैं जहां भीमबेटका, सिंधुघाटी सभ्यता, मौर्य साम्राज्य, गुप्तवंश आदि का गौरवशाली इतिहास रहा है। परंतु वर्तमान व्यवस्था के कारण से देश को शर्मिंदा होना पड़ रहा है।



कारण...

1.भारत कार्बन उत्सर्जन में दुनिया में तीसरा स्थान पर है पहला चीन और दूसरा अमेरिका है। यह पर्यावरण के लिहाज से विनाशकारी है।

2. दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित 30 शहरों में भारत के 21 शहर हैं । (वर्ष 2019 के आंकड़े)

3.वायु गुणवत्ता सूचकांक( Air Quality Index) में भारत तीसरे स्थान पर है ,पहला बांग्लादेश और दूसरा पाकिस्तान है। (वर्ष 2020 के आंकड़े)
2018 में भारत का AQI 123 है जो मध्य श्रेणी ( Moderate) का है । इससे हमारी उम्र कम होती है। ( 0-50 अच्छा, 51-100 संतोषजनक,101 से 200 मध्यश्रेणी ,201 से 300 सबसे खरनाक होता है।) 201 से 300 की श्रेणी में भारत के कई शहर आते हैं।

4.दुनिया की 10 सर्वाधिक प्रदूषित नदियाँ में गंगा और यमुना भी आती हैं।जबकि हम नदियों को माँ की उपाधी देते हैं।

ये आंकड़े भारत को शर्मसार कर रहे हैं। इसके जिम्मेदार हम भी हैं परंतु ज्यादा जिम्मेदार बीमार व्यवस्था है।
मप्र के छतरपुर जिले के बकस्वाहा जंगल में जमीन के नीचे 3.42 करोड़ कैरेट के हीरे मिलने की उम्मीद है जिसके लिए सरकारी आंकड़ों के अनुसार दो लाख पंद्रह हजार पेड़ काटना प्रस्तावित है। जो 382.131 हेक्टेयर जमीन में फैला हुआ है। इसे उजाड़ने की तैयारी चल रही है। इसमें कई प्रकार के पेड़ हैं, जंगली जानवरों, कीट, पतंगों, गांव, जलाशय, पशु ,पक्षी आदि का अस्तित्व हमेशा के लिए मिट जाएगा। अर्थात इस क्षेत्र की समस्त जैवविविधता की हत्या हो जाएगी।

दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज की भारी समस्या से झूझ रहे है। यदि हम इतने बड़े जंगलों को काट देंगे तो पर्यावरण को अपूरणीय क्षति होगी ।इससे मानव समाज ही खतरे में पड़ जाएगी। ये सरकारी आंकड़े हैं जबकि वास्तविकता अलग है, उस जंगल में सिर्फ बड़े बड़े पेड़ नही है बल्कि कई गुना छोटे पेड़ भी हैं ।उनकी गणना नहीं दर्शाया गया है।

बक्सवाहा के जंगल में आदि मानवों द्वारा उकेरे शैलचित्र भी हैं, जो करीब 25 हजार वर्ष पूर्व प्रागैतिहासिक काल के हैं। यहां के आदिवासी इसे अपनी स्थानीय भाषा में लाल पुतरियाँ कहते हैं। सुना है कि यह स्थान बियाबान जंगल में ढीमर कुंवा पर है।ये शैलचित्र भीम बेटका से भी प्राचीन काल की हैं।भीमबेटका मध्य पाषाण कालीन 10 हजार ईसा पूर्व की है। दुनिया के सामने इसे उजागर करने से वहाँ पर्यटक आएंगे जिससे देश का मान बढ़ेगा और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा।तथ्यों को छिपाकर हीरा निकालने के लिए प्रोजेक्ट को हरी झंडी दिखाई गई। हीरा निकालने के लिए एसेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड को काम मिला है।

हीरे की तुलना हरियाली से किया जाना मूर्खता है। हीरे बड़े पूंजीपतियों के शौक हैं जबकि देश में आज जिंदा रहना चुनौती बन गया है।आज देश जिंदगी और मौत से झूझ रहा है। स्थानीय लोगों को कंपनी द्वारा कुछ सुविधाएं देकर मुंह बंद करने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार के पक्ष में बात करने वाले बताते हैं कि 1 पेड़ के बदले कई गुना पेड़ लगाएंगे।हमारा मानना है कि ये जंगल प्रकृति की देन है।ऐसे जंगल बनने में सैकड़ों हजारों साल लग गए हैं।ऐसे जंगल निर्मित करना मानव के बस में नहीं है। नर्मदा किनारे कितने पेड़ लगाए थे और कितने पेड़ जिंदा हैं ?पहले पता कर लेना चाहिए। करोङो रुपये हर साल हरियाली बढ़ाने के नाम पर खर्च किया जाता है परंतु भ्रष्ट व्यवस्था के कारण से राशि का सदुपयोग नहीं हो पाता है।

देश की जनता की मांग है कि हीरे की खातिर प्रकृति को बर्बाद नहीं किया जाए। वैसे भी बुंदेलखंड क्षेत्र में सूखे की समस्या बनी रहती है। हीरे निकालकर नई त्रासदी को आमंत्रण ना दें। बक्सवाहा के जंगल में कई आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं । यदि देश में जल, जंगल, जमीन बचाना है तो आदिवासी समाज के पक्ष में संविधान की 5वी और 6वी अनुसूची को ईमानदारी से लागू करने की कृपा करें।आदिवासी समाज ही जंगलों में रहने की कला जानता है।

याचिका क्र.25047/2018 की सुनवाई के दौरान ज्ञात हुआ कि सुप्रीम कोर्ट की विशेष समिति ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि एक पेड़ की कीमत एक करोड़ रुपए से भी अधिक मूल्य का होता है।

आपको ज्ञात है कि कोरोना के कारण से और ऑक्सिजन , उचित दवा ,स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में लाखों लोग मर गए।जीवन के लिए ऑक्सिज कितना महत्व रखता है सभी को समझ आ गया है।

हमें शर्म आती है कि दुनिया में प्रदूषण फैलाने, ग्लोबल वार्मिंग बढ़ाने के लिए भारत का योगदान बहुत ज्यादा है। आज हीरे निकलवाने के लिए होड़ लगी है ।आप लोग देश का भला चाहते हैं तो कार्बन उत्सर्जन कम कीजिये, नदियों को साफ करवाइए, AQI अच्छा 0-50 करवाएं, शहरों को प्रदूषण से मुक्त करवाइए।इससे हमारे देश के लोग बीमार नहीं होंगे।और खुशहाली बढ़ेगी।

आप सभी से पुनः प्रार्थना है कि आमजन की भावना का कद्र करने की कृपा करें और बक्सवाहा जंगल बचाने के लिए कुछ कीजिये। यह आप सभी का कर्तव्य भी है। अच्छे पर्यावरण में रहना आमजन का अधिकार भी है।

हमें आशा है कि आप सभी जिम्मेदार हस्तियां इस मुद्दे को गंभीरता से लेंगे और पर्यावरण के पक्ष में निर्णय लेंगे।

धन्यवाद!

भवदीय

शरद सिंह कुमरे
संस्थापक
पर्यावरण बचाओ अभियान
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