इच्छाएँ और आवश्यकताएँ-Desires and Needs

इच्छाएँ और आवश्यकताएँ

आप यथासम्भव अपनी सांसारिक इच्छाओं पर अंकुश लगाएं और व्यक्तिगत आवश्यकताओं को कम कर दें। इच्छाओं बढ़ती रहती हैं। तथा अनेक गुनी हो जाती हैं। जीवन के अन्त तक इच्छाओं का अन्त नहीं होता। इच्छाएं सदा विस्तृत होनेवाला एक जाल होती है। बुद्धिमान् पुरुष अपनी स्वार्थपूर्ण लालसाओं को समाप्त कर देते हैं तथा व्यक्तिगत आवश्यकताओं को कम कर देते हैं। व्यक्तिगत ऐश्वर्य और वैभवपूर्ण जीवन की इच्छाओं का परित्याग उच्चतर उद्देश्यों की
पूर्ति के लिए कर दिया जाना चाहिए। वास्तव में भौतिक समृद्धि निन्दनीय नहीं है, क्योंकि उसका जीवन में अपना महत्त्व है, बल्कि गन्दे तरीकों से धन और सत्ता को हड़पना और उनका दुरुपयोग करना निन्दनीय है। सत्ता और धन मानव के अस्तित्व का लक्ष्य नहीं हो सकते।

Desires and Needs

Curb your worldly desires and curtail your personal needs as far as you possibly can. Desires grow and multiply and never come to an end up to the close of life.

They are an ever-widening snare. Wise men eschew their selfish cravings and reduce their personal needs. Desires of personal aggrandizement and luxurious living have to be renounced for fulfilling higher purposes. In fact, it is not the material prosperity which is to blame since it has its own relevance in life, but it is the grab of wealth and power with foul means and for foul pur
poses and their misuse which have to be condemned.

Power and riches cannot be the be-all and end-all of human existence.

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