कहाँ है “श्री कृष्ण का ह्रदय” जो आज भी धड़क रहा है ? Discovery Of Lord Krishna’s Heart – Mythology Behind Of Lord Jagannath idol

कहाँ है "श्री कृष्ण का ह्रदय" जो आज भी धड़क रहा है ?
Discovery Of Lord Krishna’s Heart - Mythology Behind Of Lord Jagannath idol
क्या आज भी एक मूर्ति में सुरक्षित है श्रीकृष्ण का दिल …
भगवान श्री कृष्ण,  16 कलाओं से युक्त ईश्वर के पूर्ण अवतार,  यूं तो श्रीकृष्ण सर्वत्र व्याप्त हैं|  लेकिन  क्या आप जानते हैं कि श्री कृष्ण के  अवतारी शरीर का ह्रदय आज भी धड़क रहा है|

कहते हैं श्रीकृष्ण ने जब देह त्याग की तब उनका  अंतिम संस्कार किया गया,  अंतिम संस्कार में  श्री कृष्ण  की पूरी देह पंचतत्व में विलीन हो गई लेकिन ह्रदय  जस का तस रहा|  अग्नि दाह में  उनका हार्ट नष्ट  नहीं हुआ वह एक जीवित व्यक्ति की तरह धड़क रहा था|



कहते हैं श्रीकृष्ण की मृत्यु के बाद पांडवों ने उनके शरीर का अंतिम संस्कार किया  लेकिन कृष्ण का ह्रदय नही जला परंपरा के  आदेशानुसार पिंड को जल में प्रवाहित कर दिया गया जनश्रुति के अनुसार उस पिंड ने लट्ठे का रूप ले लिया। भगवान जगन्नाथ के भक्त राजा इन्द्रद्युम्नको ये लट्ठा मिला, उन्होंने इस लट्ठे को जगन्नाथ की मूर्ति के भीतर स्थापित कर दिया।

बताया जाता है कि श्री कृष्ण का ह्रदय आज भी जस का तस है और वह भगवान जगन्नाथ की काट की मूर्ति के अंदर  स्थापित है|



भगवान जगन्नाथ कर रहस्य अब तो कोई नहीं जान पाया|  जगन्नाथ स्वामी  की मूर्ति को हर 12 साल में बदला जाता है|  इस दौरान पूर्व शहर  की रोशनी बंद होती है| बिजली बंद करने के बाद  मंदिर के परिसर को  घेर लिया जाता है|  सीआरपीएफ की सेना  के प्रोटेक्शन में आने के बाद मंदिर में कोई नहीं प्रवेश कर सकता| 

पुजारी के आंखों पर पट्टी बांधी जाती है हाथ में दास्ताने होते हैं मंदिर के अंदर घोर घने अंधकार के बीच पुजारी मूर्ति से उस रजाई को बाहर निकालता है और नई मूर्ति में प्रतिस्थापित कर देता है| 

इस कृष्ण ह्रदय को  ब्रह्म पदार्थ कहते हैं|

हालांकि इस ब्रह्म पदार्थ के रहस्य को अभी भी लोग नहीं जान पाए हैं| बस से सैकड़ों सालों से एक मूर्ति से दूसरी मूर्ति में हस्तांतरित किया जाता रहा है|

बात यह है कि ब्रह्म पदार्थ को बदलने वाला पुजारी भी यह नहीं जानता कि वह किस चीज को हस्तांतरित कर रहा है क्योंकि उसके हाथ में दास्ताने होते हैं और आंख में पट्टी| 

हालांकि पुजारी यह जरूर कहते हैं कि जिस पदार्थ को बदलते हैं वह खरगोश के जैसे उछलता है|

भगवान जगन्नाथ का मंदिर  और भी कई रहस्यों से भरा हुआ है जिस समुद्र की लहरें मंदिर के बाहर जोर-जोर से सुनाई देती है अंदर प्रवेश करते ही सारा शोर थम जाता है|

जगन्नाथ मंदिर के शिखर से कोई पक्षी नहीं गुजरता है यह भी एक आश्चर्यजनक बात है क्योंकि सभी मंदिरों  के शिखरों पर पक्षी देखे जाते हैं| 

इस मंदिर का झंडा हमेशा हवा की उलटी दिशा में लहराता है|

एक और खास बात है कि किसी भी समय भगवान जगन्नाथ के मंदिर के मुख्य शेखर की परछाई नहीं देखी जाती|

जगन्नाथ मंदिर के शिखर का झंडा रोज बदला जाता है ऐसा कहा जाता है कि झंडा यदि एक भी दिन नहीं बदला गया तो मंदिर 18 साल तक बंद हो जाएगा|

भगवान जगन्नाथ टेम्पल के शिखर पर एक सुदर्शन चक्र है, जो हर दिशा से देखने पर आपके मुंह की तरफ दिखता है।

भगवान जगन्नाथ प्रसाद पकाने के लिए मंदिर की रसोई में मिट्टी के 7 बर्तन एक-दूसरे के ऊपर रखे जाते हैं, प्रसाद को लकड़ी की आग से ही पकाया जाता है, आश्चर्य है कि सबसे ऊपर रखे बर्तन का पकवान पहले पकता है।

हर दिन बनने वाला प्रसाद भगवान जगन्नाथ मंदिर में भक्तों के लिए कभी कम नहीं पड़ता, लेकिन हैरत में डालने वाली बात ये है कि जैसे ही मंदिर के पट बंद होते हैं वैसे ही प्रसाद भी खत्म हो जाता है।



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