ईश्वर का सीसीटीवी कैमरा, वो जगह बता दे जहाँ पर खुदा न हो -दिनेश मालवीय

ईश्वर का सीसीटीवी कैमरा

वो जगह बता दे जहाँ पर खुदा न हो

-दिनेश मालवीय
महान शायर मिर्ज़ा ग़ालिब का शेर है-“ज़ाहिद शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर. या वो जगह बता दे जहाँ पर ख़ुदा न हो. ग़ालिब एक ऋषितुल्य शायर थे. उनकी शायरी में जीवन के बहुत गहरे अर्थ छुपे हैं. और भी कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं में इस बात को बहुत ज़ोर देकर लिखा है कि श्रृष्टि में ऎसी कोई जगह नहीं है, जहाँ ईश्वर का वास न हो. संत तुलसीदास ने लिखा है कि-”प्रभु व्यापक सर्वत्र समाना, प्रेम तें प्रकट होई मैं जाना”. यानी, ईश्वर सब जगह उपस्थति हैं और प्रेम से प्रकट हो जाते हैं.वह वैसा ही है जैसे लकड़ी में अग्नि या दूध में मक्खन.

मुझ खाकसार ने भी एक शेर कहा है -

”ध्यान में एक पल कभी अनुभव करें तो
देखता हमको कोई आठों प्रहर है”.

कुल मिलाकर बात इतनी है कि जिसे हम ईश्वर, भगवान्, गॉड, खुदा या और अनेक नामों से पुकारते हैं, वह सूक्ष्म रूप से  श्रृष्टि के कण-कण में उपस्थित है. वह हमारे पल-पल किये जाने वाले हर काम को देख रहा है. हम चाहे कितने भी अकेले में कोई काम कर लें, वह उसकी नज़र में है. कोई उसे धोखा नहीं दे सकता.

आज हम लोग जगह-जगह पर लिखा देखते हैं कि,”आप सीसीटीवी कैमरे की नज़र में हैं”. यानी हर जगह ऐसे कैमरे लगे हुए हैं जिनमें उनके सामने होने वाली छोटी से छोटी गतिविधि कैद हो जाती है. इससे अपराधों को रोकने और अपराधियों को पकड़ने में काफी मदद मिली है. बहरहाल, इसकी अपनी कमियां भी हैं. कोई यदि इनके लेंस पर कपड़ा या कुछ और चीज़ डाल दे तो फिर वह किसी भी गतिविधि को रिकॉर्ड नहीं कर सकता. इसके अलावा, यदि कैमरे में कोई खराबी आ जाए या वह बंद हो तो कोई उसके सामने कुछ भी करता रहे, वह सूरदास ही बना रहेगा.

लेकिन ईश्वर का सीसीटीवी कैमरा इन सभी कमियों से मुक्त है. वह न कभी खराब होता,न कभी बंद होता और न उसमें कभी कोई उस  पर पर्दा डाल सकता. 
ऐसा इसलिए है कि हम बोलचाल में भले ही कहते हों कि ईश्वर श्रृष्टि के कण-कण में उपस्थित है, लेकिन सच पूछिए तो वह हमारे भीतर ही बहुत सूक्ष्म रूप से विराजमान है. भारतीय ग्रंथों में ईश्वर को सबके ह्रदय का प्रेरक, सबके ह्रदय का वासी और ज्योति रूप में हमारे शरीर में ही स्थित कहा गया है.”तुम हो एक अगोचर सबके प्राणपति”.

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इस बाबत कभी एक बड़ी रोचक बात पढने में आई थी.

कवि-लेखक तो कल्पनाशील और कुछ हद तक खब्ती भी होते ही हैं. किसी ऐसे ही खब्ती ने कहा कि ईश्वर पहले 24 x 7 आम पब्लिक को उपलब्ध था. लेकिन लोग उसे एक पल भी आराम नहीं करने देते थे. आधी-आधी रात तक उसके प्राण खाते रहते थे कि उनका यह काम नहीं हो रहा तो वह काम नहीं हो रहा; हमारा फलाना काम करा दो तो हमारा ढिकाना काम काम करा दो. ईश्वर इतना परेशान हो गया कि लोगों की इस तरह की बातों से कैसे पीछा छुड़ाया जाए. उनका एक कविनुमा सेवक था, जिससे उन्होंने सलाह ली. कवि ने कहा कि बहुत आसान काम है. आप  लोगों के ह्रदय में जाकर छुप जाओ. ढूँढने दो उन्हें दुनियाभर में. ईश्वर को यह सुझाव बहुत पसंद आया. तब से ही वह सबके मन में बैठा है.

ऐसी स्थिति में मनुष्य जहाँ भी जाएगा, तो उसके साथ उसका मन भी जाएगा ही. वह जो भी काम करेगा वह उसे देखेगा ही. कभी-कभी कुछ गलत करने से पहले परोक्ष रूप से टोंकेगा भी. इसीको लोग ज़मीर भी कहते हैं.

हमारे ऋषियों की समझ को बहुत दाद देनी होगी. वे इस बात को बहुत अच्छी तरह जानते थे कि कोई भी बात सीधी-सीधी कहने पर इंसान के भेजे में नहीं बैठती. उसे कुछ कथा-रूपक के ज़रिये समझा दिया जाये तो बात ठीक निशाने पर लगती है. इसलिए उन्होंने इस सम्बन्ध में अनेक कथाओं की रचना की है.

एक ऋषि के तीन शिष्य शिक्षा पूरी कर चुके थे. ऋषि ने उनके ज्ञान की परीक्षा लेने का निर्णय किया. उन्होंने तीनों शिष्यों को कोई चीज देकर कहा कि इसे ऐसी जगह छुपाकर आओ जहाँ कोई भी देखने वाला नहीं हो. तीनो शिष्य अलग-अलग दिशाओं में गए. फिर एक-एक कर लौटे. पहले शिष्य ने कहा कि गुरुजी मैंने उस वस्तु को एक ऐसी जगह छुपाया है जहाँ दूर-दूर तक कोई देखने वाला नहीं था. दूसरे ने कहा कि मैंने उसे ऎसी जगह छुपाया है जहाँ घोर अँधेरा था और हवा तक का प्रवेश नहीं था.

बहुत देर बाद तीसरा शिष्य मुँह लटकाये हुए आया. उसके हाथ में वह वस्तु रखी थी. गुरुजी के पूछने पर उसने बताया कि बहुत तलाश करने पर भी उसे कोई ऎसी जगह नहीं मिली जहाँ कोई देखने वाला नहीं हो. मुझे हमेशा ऐसा लगता रहा कि मुझे हर पल कोई देख रहा है.

गुरुजी ने उसकी पीठ थपथपाई और उसे उत्तीर्ण करने के साथ ही अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया. दरअसल उस शिष्य ने उसे अनुभव कर लिया था जिसे हम ज़मीर, ईश्वर, भगवान् या गॉड कहते हैं.

इस पूरी बात का लब्बोलुआब यही है कि हमें जीवन में हर काम बहुत सोच-समझकर करना चाहिए. हमारे हर काम को कोई हर पल देख रहा है. ऐसा करने पर हम कभी बुरा काम नहीं कर पाएँगे. हमें हमेशा ईश्वर के अचूक सीसीटीवी कैमरे का ख्याल बना रहेगा. इस प्रकार हम एक साफ-सुथरा जीवन जीते हुए अपने कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकेंगे.

dinesh


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