“हनी” “मनी” ने कर दिया निर्वस्त्र, आदमी की नैसर्गिक होने की प्यास या पागलपन..अतुल विनोद

“हनी” “मनी” ने कर दिया निर्वस्त्र, आदमी की नैसर्गिक होने की प्यास या पागलपन..अतुल विनोद
                                             नग्नता या रुग्णता 

चाहे पुलिस अधिकारी हो या राजनेता “हनी” चीज़ ही ऐसी है की वस्त्र उतरवा देती है| पुरुष “हनी” के कारण वस्त्र उतार रहे हैं तो स्त्री “मनी” के कारण| हालाकि बबाल तब खड़ा होता है जब ये “अनावरण” वायरल हो जाता है|

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हमारे देश में “वस्त्र” उतारने की परम्परा नई नहीं है| वस्त्र उतारना तो मानव की प्रवृत्ति है मूल रूप से तो वो नग्न ही है? नग्नता व्यक्ति में है या उसे देखने वाले में? काम भाव कहाँ है? मन में या तन में? 

अब तन को देखना, उद्वेलित नहीं करेगा| क्योंकि “तन” अब वायरल है| जीवन के अंतरंग पहलुओं से बच्चे भी रूबरू हैं| एक्ट्रेस के टॉपलेस, बेकलेस होने को अब मीडिया में फ्रंट पेज पर स्थान मिलता है| सारी टॉप मीडिया वेबसाइटस के फ्रंट पेज पर ऐसी मॉडल्स और एक्ट्रेस ख़ास तौर से प्रस्तुत हैं जिनके उप्स मूमेन्ट्स केमरे में रिकॉर्ड हो जाते हैं| वैसे जानबूझ कर ऐसा किया जाता है| लगभग सभी एक्ट्रेस/मॉडल्स वस्त्र उतारने को उतावले हैं| 

नेट पर “सेक्स” शब्द सबसे ज्यादा सर्च होता है| मॉडल और एक्ट्रेस को नग्न देखने की चाहत सर्च इंजन सर्च बताते हैं| 70 फीसदी सर्च इसी के लिए होते हैं| आखिर ऐसे लोगों की प्यास क्यों नहीं बुझा दी जाये? नग्नता को वैध कर इन्हें तृप्त कर दिया जाएँ? अन्तरंग video तो पल भर में वायरल हो जाते हैं| 

नेता, मंत्री, अफसर, पत्रकार ऐसा कौन है जो कैमरे में ट्रैप नहीं है| जब सब नग्नता के दीवाने हैं तब क्यों न नग्नता को स्वीकार कर लिया जाए? क्यों नहीं मनुष्य की नग्न होने की आकांक्षा को पंख दे दिए जाएँ| नग्नता को छिपाने के लिए कितना कुछ हो रहा है? नग्नता को उजागर करने के लिए भी क्या नहीं हो रहा? कितने लोग नग्न हो ट्रैप हुए पड़े हैं| कितने लोगों को ब्लैकमेल किया जा रहा है?

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मनुष्य की नग्न होने कि चाह इतनी प्रबल है कि वो पागल होते ही कपड़े उतार फेंकता है, आनंद के क्षण में, जीत की ख़ुशी में कपड़े उतार मैदान पर दौड़ पड़ता है| इस कपड़े ने कितना बखेड़ा खडा किया है| तालिबानी संस्कृति ने औरत को इस कपड़े में जकड़ा है तो पाश्चत्य संस्कृति में कपड़ों को फेंक खुलेपन का चरम पकड़ा है| 

समय तेजी से बदल रहा है| आज नहीं तो कल कपड़े की अहमियत शीलता और सभ्यता के लिए तन ढकने के लिए नहीं सिर्फ मौसम की मार से बचने तक सीमित हो जाएगी| 

सर्व सुलभ Video ग्राफी और इंटरनेट ने इंसान का वैसे भी चीरहरण कर लिया है| कोने कोने में कैमरे हैं| कोई कैसे अपने तन को बचाए रख सकता है| फिर कुलांचे मारती काम-नाएँ हैं, इसे पंख देती अर्ध-वस्त्र नवयौवनायें हैं| 

राजस्थान में शादीशुदा DSP साहब कांस्टेबल लेडी के प्रेम में फसे थे, “हनी” महोदया ने “मनी” के लिए DSP साहब के 50 से ज्यादा डर्टी video बना रखे थे| साहब स्विमिंग पूल में कांस्टेबल लेडी के साथ नग्न हो नहा रहे थे मोहतरमा के मोबाइल video बना रहे थे| तकनीक के इस दौर में राज़ को राज़ रखना कठिन है, मोहतरमा से एक क्षण की गलती हुयी और video पूरे संसार में चला गया| 



मध्यप्रदेश में इस “हनी” के चक्कर में न जाने कितने ब्लेकमेल हुए| सरकारी “मनी” को लाज बचाने के लिए “हनी” पर लुटाया जाता रहा| कहते हैं हमाम में सब नंगे हैं तो फिर नंगेपन पर इतना पहरा क्यूँ और कब तक? आदमी पर पागलपन का भूत सवार है| पागल जब तक पूरा नग्न ना हो जाये तब तक नहीं मानता| 

अब व्यक्ति बहुत दिनों तक ढका-टुपा नहीं रह पायेगा| जब चरों तरफ नग्नता है तो कोई अकेला कैंसे बच पायेगा? वर्जनाएं टूट रही हैं| videos की गोली धनाधन छूट रही है| अब मुश्किल है| इसलिए बेहतरी इसी में है कि आदमी को उसका नैसार्गिग अधिकार दे दिया जाये| या तो सब कुछ ही बैन कर दिया जाए या कुछ भी ना छुपाया जाए|

थोड़ा सा दिखाने पर मॉडल्स की सनसनी इसीलिए है क्यूंकि ज्यादा देखने की चाह है| हालांकि मन का भ्रम है ये कि ज्यादा देखने से संतुष्टि मिलेगी| लेकिन कब तक कितना देखेगा आदमी| कभी तो दिल भरेगा| तब तन देखकर भी मन कुलांचे नहीं भरेगा| फिर उसमे और जानवर में कोई अंतर नहीं रहेगा| 

gahana vashishthनग्नतावादियों का तो मानना है कि कामुकता वस्त्रों के कारण ही बढ़ी है| या तो व्यक्ति ढंग के कपड़े पहने, या फिर पूरा ही निर्वस्त्र हो जाए| इनका कहना है कपड़ों के कारण ही मानव देखने योग्य है| निर्वस्त्र व्यक्ति कतई आकर्षक नहीं| 

मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि यदि नग्नता स्वीकार्य हो जाए तो कामुकता का कोई स्थान नहीं रहेगा लेकिन इससे एक खतरा भी है| मनुष्यजाति खत्म होने का क्यूंकि यदि आकर्षण न रहा तो विवाह जैंसी संस्थाओं का अस्तित्व खत्म हो जायेगा, संसार को बढाने की इच्छा खत्म हो जाएगी और आबादी तेजी से कम होने लगेगी| 

नग्नता को स्वीकार कर लिया गया तो उन लोगों का क्या होगा जो एक्सपोज़ करके अपनी दुकान चलाते हैं| थोड़ा दिखाते हैं थोड़ा छिपाते हैं और मानव मन की प्यास जगाकर अपना काम बनाते हैं| 

नग्नता से जुड़े कई पहलु हैं जो देखे जाने बाकी है| हालाकि भारत आने वाले कई दशको तक न तो कामुकता से मुक्त नग्नता की तरफ आगे बढ़ पायेगा न ही खुलेपन के इस दौर में लोगों की कामुक प्रवत्ति पर लगाम संभव है| 



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