भोपाल: राज्य के पुलिस थानों को अब बिना एफआईआर दर्ज किये इस बात की जांच करने के लिये शिकायत संज्ञेय अपराध है या नहीं, 14 दिन में प्रारंभिक जांच पूर्ण करना होगी तथा ये शिकायतें वे होंगी जिनमें 3 वर्ष से लेकर 7 वर्ष की सजा का प्रावधान है। इसके लिये पुलिस मुख्यालय ने अपनी सभी पुलिस इकाईयों के प्रमुखों को नवीन निर्देश जारी किये हैं।
निर्देश में कहा गया है कि पुलिस इकाईयों द्वारा संज्ञेय अपराध से संबंधित शिकायत के प्राप्त होने पर एफआईआर दर्ज न करके उसे जांच में रख लिया जाता है और यह जांच महिनों तक तथा कतिपय मामलों में वर्षों तक चलती रहती है। कुछ अनावेदकों द्वारा इन शिकायतों की जांच के दौरान उनसे अवैध धन मांग करने की भी शिकायतें की गई हैं। विगत दिनों एक प्रकरण में जिला पुलिस द्वारा बगैर एफआईआर दर्ज किये विवेचना प्रारंभ करने की घटना पर एमपी हाईकोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई है।
भ्रष्टाचार के मामलों में, अनुसूचित जाति/जनजाति के सदस्य न होते हुये भी जाति प्रमाण-पत्र बनवाकर उसके आधार पर शासकीय सेवा आदि का लाभ लेने, पारिवारिक विवाद के मामलों में, वाणिज्यिक प्रकृति के मामलों में प्रारंभिक जांच करने की अनुमति है। महिलाओं के विरुध्द लैंगिक अपराधों की सूचना पर यदि पुलिस अधिकारी एफआईआर दर्ज नहीं करता है, तो विधि में उस पुलिस अधिकारी के विरुध्द दण्डात्मक कार्यवाही करने का प्रावधान है। असंज्ञेय अपराध की सूचना प्राप्त होने पर शिकायत जांच प्रारंभ करना उचित नहीं है तथा नॉन काग्निजिबिल रिपोर्ट जारी करना चाहिये जिसमें शिकायतकर्ता को सीधे कोर्ट जाने के लिये कहा जाता है।
डॉ. नवीन आनंद जोशी