भोपाल: राज्य सरकार ने नगर पालिकाओं एवं नगर परिषद के अध्यक्षों का चुनाव सीधे जनता द्वारा करने का नया स्थाई कानून प्रभावशील कर दिया है। दरअसल, इस संबंध में 9 सितम्बर 2025 को अध्यादेश जारी किया गया था परन्तु यह छह माह तक ही प्रभावशील रहता, इसलिये इसे स्थाई कानून बनाने के लिये 2 दिसम्बर 2025 को विधानसभा के शीतकालीन सत्र में विधेयक पारित किया गया जिसे अब राज्यपाल द्वारा स्वीकृति देने से यह स्थाई कानून बन गया है।
नये स्थाइ कानून में कहा गया है कि नगर पालिका एवं नगर परिषद में पार्षदों द्वारा अध्यक्ष का चुनाव करने से अध्यक्ष पार्षदों के प्रति जवाबदार रहता है जबकि वार्ड पार्षदों का निवाचन स्थानीय मुद्दों पर आधारित रहता है जबकि प्रत्यक्ष पध्दति से चुनाव कराने पर अध्यक्ष जनता के प्रति जवाबदार रहता है और वह स्थानीय निकाय के सम्पूर्ण क्षेत्र के विषयों की जानकारी रखता है।
इसके अलावा, स्थाई कानून में यह भी प्रावधान किया गया है कि उक्त नगरीय निकायों के अध्यक्ष को वापस बुलाने की शक्ति का उपयोग तीन साल के बाद ही किया जा सकेगा जिसमें तीन चौथाई निर्वाचित पार्षदों द्वारा अध्यक्ष को वापस बुलाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किये जायेंगे तथा कलेक्टर द्वारा उपचुनाव कराने पर कुल मतदाताओं के आधे से अधिक लोगों द्वारा मतदान करना होगा।
डॉ. नवीन आनंद जोशी