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क्या सभी को जन्म से ही मिलना चाहिए “यूनिवर्सल बेसिक वेल्थ- अतुल विनोद 

अतुल विनोद अतुल विनोद
Updated Sat , 23 May

सार

ईश्वर के नियमानुसार पैदा होने वाला हर व्यक्ति, रहने के लिए घर, भोजन की व्यवस्था और अपनी बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए धन का हकदार है|

janmat

विस्तार

यूनिवर्सल बेसिक वेल्थ:

यह विचार अब तेजी से फैल रहा है कि जो भी व्यक्ति इस धरती पर जन्म ले उसे कम से कम 3 सामाजिक उपहार मिलें|

आईआईएम बेंगलौर के प्रोफेसर प्रतीक राज कहते हैं कि हर व्यक्ति को ये3 बुनियादी उपहार मिलना उसका हक है| ये तीन उपहार हैं- 

1- एक घर जिसमें बुनियादी जगह और सुविधाएं हों|

2- जीवन की बुनियादी ज़रूरतों के लिए राष्ट्रिय फंड| 

3- इमरजेंसी ज़रूरतों के लिए पैसा| 

1- A basic house/apartment, gifted to them by society/state, unconditionally.

2- access to individual savings that were made on their behalf while they were growing up, collectively by society/state in a National Childhood Fund.  

3- unconditional emergency funding, especially that arise for emergency and rare disease healthcare needs

अब सवाल उठता है कि असमानता की बुनियाद पर टिके समाज में समानता की बात कैसे हो?

ईश्वर के नियमानुसार पैदा होने वाला हर व्यक्ति, रहने के लिए घर, भोजन की व्यवस्था और अपनी बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए धन का हकदार है|

इस दुनिया में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति जो भी कुछ लेता है इसी धारा से लेता है| कोई व्यक्ति किसी संपन्न घर में पैदा होता है तो इसका मतलब यह नहीं कि वह 10 या 100 लोगों के बराबर लोगों का घर या इतने ही लोगों की आमदनी और मूलभूत सुविधाओं का एकमात्र हकदार हो गया|

दुनिया में असमानता इस कदर हावी है कि आज एक व्यक्ति सौ सौ घरों का जन्मजात मालिक हो जाता है तो किसी को सोने की छत तक नसीब नहीं होती| 

जब सब ईश्वर की संतान है और समरस समाज में पैदा हो रहे हैं तो क्यों नहीं हर व्यक्ति को बेसिक वेल्थ यानी आर्थिक स्वतंत्रता उपलब्ध कराई जाती|

यह दुनिया कार्य और कारण के सिद्धांत पर चलती है, कार्य तो सभी करते हैं, लेकिन उपहार बहुत कम लोगों को मिलता है|

होता यह है कि जो लोग कुछ नहीं करते वह भी बहुत ज्यादा के मालिक हो जाते हैं| 

वो बच्चे जो संपन्न घर में पैदा होते हैं उन्हें जन्म से ही बहुत कुछ मिल जाता है और जो गरीबी में पैदा होते हैं वह बुनियादी चीजों से भी महरूम रहते हैं|

कोई देश बहुत अमीर है और कोई बहुत गरीब| असमानता हर जगह दिखाई देती है|

काम ना करने के बाद भी देने का सिद्धांत जायज नहीं कहा जाएगा लेकिन फिर भी हर व्यक्ति कम से कम जीने की बुनियादी जरूरतों का जन्म से ही अधिकारी है, भले ही वह कुछ करें या ना करे| 

आज जरूरत एक सार्वभौमिक व्यवस्था की है जिसमें इस दुनिया में खासतौर पर इस पृथ्वी पर पैदा होने वाले प्रत्येक नागरिक को एक जरूरी व्यवस्था जन्म से ही दी जाए| इसे सुनिश्चित करना उस सार्वभौमिक सरकार का धर्म हो|

मूलभूत संपत्ति का विचार आज चर्चा का विषय बना हुआ है| धीरे-धीरे पूरे विश्व तक पहुंचेगा और हो सकता है कि आने वाले समय में हम एक ऐसे समाज की कल्पना कर सके ऐसी व्यवस्था को देख सकें जिसमें हर व्यक्ति कुछ मूलभूत उपहारों के साथ पैदा हो|