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पटाखों में सियासत नहीं, बैक्टीरिया मारक ताकत! - डॉ. भुवनेश्वर गर्ग

सार

क्या कभी किसी ने सोचा कि, दीवाली के दूसरे दिन, मक्खी मच्छरों की संख्या एकदम कैसे कम हो जाती है?

janmat

विस्तार

दीवाली करीब है और पटाखे फिर मुद्दा हैं। हालांकियह पटाखे तमाम कायदों को धता बताते हुए नए साल, चुनावी रैलियों, पाकिस्तान की हिन्दुस्तान पर जीत पर तो बिंदास फटते हैं, लेकिन सनातनियों की आस्था के त्यौहार यानि श्रीराम की विजय पर इसके लाभ या हानि की चर्चा छिड़ जाती है।

इसकी व्याख्या करने और इसका कारण जानने हेतु कई संस्थाओं ने दीवाली के पहले और दिवाली के दूसरे दिन, वातावरण में मौजूद कीटाणुओं की संख्या जांचने का बीड़ा उठाया और परिणाम चौंकाने वाला था। चेन्नई में पंद्रह स्थानों से सेम्पल इकट्ठे किये गये और और इनके आंकड़े प्रकाशित किये, एस भुवनेश्वर, एस सुरेश, बी संपथ, के गौथम, एन श्रीप्रिया, उदयकुमार ने। यूनिवर्सिटी ऑफ वेल्स और फ्लोरिडा की रिसर्च के आंकड़ों में आँखे खोल देने वाले परिणाम सामने आये। दीवाली के तीन दिन पहले लिए गए सेम्पल्स और दीवाली के बाद लिए गए सेम्पल्स में, वातावरण में मौजूद बैक्टीरिया की संख्या में 53.23 फीसदी गिरावट देखी गई।


तो क्या इसका अर्थ यह माना जाए कि पटाखे चलाने दिए जाना चाहिए? 


यकीनन हा! लेकिन कुछ सावधानियों के साथ, जैसे

 

• लाखों लोगों को रोजगार देने वाले, आस्था और रोशनी के विजय पर्व को मनाने हेतु, घी या खाद्य तेल के दीप भरपूर जलाएं, जिनसे वातावरण शुद्ध होता है, लेकिन मोमबत्ती या हाइड्रो कार्बन्स छोड़ने वाले वेक्स और पेट्रो पदार्थ वाले कतई नहीं जलाएं!


• सतह पर चलाए जाने वाले पटाखे, फुलझड़ी, अनार, कम आवाज वाले बम आदि हर्षोल्लास वाले ग्रीन पटाखे भरपूर चलाए जाने चाहिए, लेकिन पूरी सावधानी और आग लगने या जलने की संभावनाओं को खत्म करने के प्रयासों के साथ। परन्तु वातावरण की ऊंचाई वाली जगह यानी आसमान में हवा में फटने वाले पटाखे, राकेट आदि पर रोक हो।


• कानफोड देने वाले, बेहद खतरनाक फटाखों बमों पर रोक होनी चाहिये, विषैले तत्व छोड़ने वाले किसी भी तरह के पटाखों पर रोक होनी चाहिए।


• वैसे रोक तो सड़कों पर उड़ती धूल, बहते सीवेज पर होना चाहिए, जगह-जगह कचरे के ढेर और उन्हें जलाने से वातावरण प्रदूषित करने वाली हरकतों पर होनी चाहिए कचरा और पराली जलाने पर पूरी तरह से रोक हो। 


बेजुबां जानवरों की त्यौहार के नाम होने वाली हत्या पर रोक लगे, जिनके सड़ते अंगों से हवा और पानी में सबसे ज्यादा संक्रमण फैलता है। पुरानी खटारा गाड़ियों से निकलते जहरीले धुएं पर रोक लगे, और रोक लगे वातावरण के सबसे खतरनाक पॉल्यूशन कर्ता, एयरकंडीशनर्स पर भी !