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अमित शाह का मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री जैसा स्वागत- सरयूसुत मिश्र

सार

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का भोपाल में मेगा शो कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा है. अमित शाह का भोपाल में प्रधानमंत्री जैसा स्वागत किया गया. अमूमन जिस तरह की तैयारियां प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों के लिए की जाती है. ठीक उसी तरह की तैयारियां केंद्रीय गृह मंत्री के कार्यक्रम के लिए की गयी.!

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विस्तार

मध्य प्रदेश सरकार और पार्टी ने अमित शाह को देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के समकक्ष लौह पुरुष के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया|  जो भी प्रचार उनके स्वागत के लिए  किया गया, उसमें जम्मू कश्मीर में धारा 370 समाप्त कर इतिहास रचने को केंद्र में रखा गया, कुछ प्रचार सामग्री में यह लिखा गया कि “भारत मां का लाल, शेर आ रहा है भोपाल”,पोस्टर्स में जम्मू कश्मीर में आतंकवाद के खात्मे का श्रेय अमित शाह को दिया गया| 


 
केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में ऐसा रुतबा और मेगा शो अभी तक देश में किसी भी नेता को हासिल नहीं हुआ था| भारतीय जनता पार्टी की सरकार में एनडीए के दौरान लालकृष्ण आडवाणी गृहमंत्री थे, मोदी की सरकार में पहले कार्यकाल में राजनाथ सिंह गृह मंत्री रहे हैं|

2019 के बाद मोदी के दूसरे कार्यकाल में अमित शाह देश के गृह मंत्री बने| देश के गृह मंत्री रहते हुए भाजपा और कांग्रेस के नेता मध्य प्रदेश के दौरे पर आते रहे हैं| लेकिन ऐसा स्वागत, अभिनंदन और मेगा शो किसी भी केंद्रीय गृहमंत्री का नहीं देखा गया|  कांग्रेस में पी चिदंबरम, शिवराज पाटील और बूटा सिंह जैसे गृह मंत्री रहे लेकिन उनकी भूमिका मंत्रिमंडल के एक सदस्य से ज्यादा नहीं देखी गई|

अमित शाह के स्वागत में कश्मीरी पंडितों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया| इसके पीछे यह संदेश छिपा हुआ है कि कश्मीर में धारा 370 हटाने और केंद्र शासित तीन प्रदेश बनाने का इतिहास अमित शाह के नेतृत्व में ही रचा गया है| सख्त प्रशासक अमित शाह ने अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए हैं| अभी हाल ही में उन्होंने उत्तर पूर्व के राज्यों में विवाद का समाधान कराया| अमित शाह के गृह मंत्री बनने के बाद देश की आंतरिक सुरक्षा मजबूत हुई है|

एनआरसी और सी.ए.ए. केंद्रीय गृह विभाग की ही पहल है| यद्यपि यह दोनों पहल अभी लागू नहीं हो सकी है लेकिन देश वासियों को इस बात की पूरी उम्मीद है कि इन कानूनों को शाह की लीडरशिप में  हर हालत में लागू किया जाएगा| भारत के पड़ोसी देशों से आने वाले हिंदुओं को भारत में नागरिकता देने का ऐतिहासिक काम भी गृह मंत्रालय ने अमित शाह के नेतृत्व में किया है|

अभी 6 महीने पहले ही जंबूरी मैदान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिरसा मुंडा जयंती पर आदिवासियों के महासम्मेलन में आये थे| उसी दौरान रानी कमलापति रेलवे स्टेशन का भी लोकार्पण किया गया था| प्रधानमंत्री के लिए जिस तरह की तैयारियां की गई थी, जिस तरह की सारी व्यवस्थाएं की गई थी, उसी प्रकार की व्यवस्थाएं, जंबूरी मैदान पर अमित शाह के लिए भी सरकार ने की है| अमित शाह का रोड शो और उसमें पार्टी की ओर से जिस उत्साह और तैयारी के साथ स्वागत अभिनंदन किया गया. वह भी अमित शाह की पार्टी में सर्वोच्चता और व्यक्तित्व को दिखाता है|

भारत की आजादी के बाद पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल बने थे| उन्होंने देश के एकीकरण के लिए जो ऐतिहासिक काम किए थे| आज भी उन्हें देश याद करता है| कश्मीर की जिस  समस्या के समाधान के लिए अमित शाह ने 370 हटाई थी, उसकी सोच पटेल ने शुरू की थी, लेकिन उस समय के सत्ताधीशों ने उन्हें ऐसा करने नहीं दिया|

देश में कई प्रधानमंत्री ऐसे बने जो पहले गृहमंत्री रहे हैं| लाल बहादुर शास्त्री भी प्रधानमंत्री बनने के पहले देश के गृहमंत्री थे| चरण सिंह ने भी प्रधानमंत्री बनने के पहले भारत के गृह मंत्री के रूप में दायित्व निभाया था| पी वी नरसिंह राव भी पहले गृह मंत्री रहे हैं और बाद में प्रधानमंत्री बने| केंद्रीय गृह मंत्रालय कितना महत्वपूर्ण है कि उसे कई बार प्रधानमंत्रियों ने अपने अधीन ही रखा| जवाहर लाल नेहरु, इंदिरा गांधी ने भी प्रधानमंत्री के रूप में कुछ समय के लिए गृह विभाग अपने पास रखा था| मोरारजी देसाई, चंद्रशेखर और एच डी देवगौड़ा ने तो प्रधानमंत्री के रूप में गृह विभाग भी संभाला था|

नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी के राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय होने के बाद, राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा ने जो मुकाम हासिल किया है, वैसा पहले कभी नहीं मिला, मोदी और अमित शाह की जोड़ी गुजरात से ही साथ साथ है, राजनीतिक विश्लेषक तो कई बार उनकी जोड़ी को देखकर आश्चर्य करते हैं| दो बड़े नेताओं में इतनी गहरी आपसी समझ, भारतीय राजनीतिक परिदृश्य पर पहले कभी नहीं देखी गई है| इस बात पर आश्चर्य होता है कि कैसे दोनों बड़े नेता, पार्टी की रणनीति हो, राष्ट्र की एकता के साथ ही सरकार के कामकाज पर सामूहिक और सटीक फैसला लेते हैं|

दोनों नेताओं के बीच विचार-विमर्श के दिखावे कभी सामने नहीं आए| लेकिन हर छोटे बड़े फैसले में दोनों नेताओं की निकटता और सहभागिता की झलक साफ दिखती है| यूपी चुनाव में अमित शाह ने प्रभारी के रूप में जिस तरह की रणनीति अपनाई उसकी यूपी की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका रही| मध्यप्रदेश में भी 2023 में विधानसभा चुनाव होने हैं| अमित शाह का यह दौरा मध्य प्रदेश के मिशन 23 की तैयारियों को स्पष्टता के साथ सक्सेस का रोड मैप बनाने में महत्वपूर्ण होगा|